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चांद पर क्या करने जा रहा है चीन?

23 जुलाई 2020 को चीन ने तियनवेन-1 मिशन लॉन्च किया था. ये चीन का बेहद महत्वाकांक्षी मंगल मिशन है. फिलहाल ये मिशन मंगल पहुंचने के अपने रास्ते पर है. चार महीने बाद चीन एक और स्पेस मिशन लॉन्च करने जा रहा है. इस मिशन का नाम है चंग’अ – 5. ये मिशन चांद के लिए है. इससे पहले चांद पर चीन के कई सफल मिशन्स जा चुके हैं. और अब ये चंग’अ – 5 नया कारनामा करने जा रहा है.  आज हम इसी पर बात करेंगे.

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चंग’अ – 5. इसे अंग्रेज़ी में Chang’e लिखते हैं, लेकिन चंगे नहीं बोलते. इसका सही प्रोननसिएशन चंग’अ है. चीन में चांद की देवी का नाम चंग’अ है. इन्हीं के ऊपर चाइना ने अपने मून मिशन्स का नाम रखा है.

जैसे भारत में ISRO है, वैसे ही चीन की स्पेस एजेंसी का नाम है CNSA. चाइनीज़ नेशनल स्पेस एड्मिनिस्ट्रेशन. चंग’अ-5 मिशन को CNSA ही अंजाम देगी.

CNSA अपना सब काम चुपके-चुपके करती है. (विकिमीडिया)
CNSA अपना सब काम चुपके-चुपके करती है. (विकिमीडिया)

चंग’अ-5 मिशन के लिए लॉन्ग मार्च-5 रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. ये चीन का सबसे आधुनिक रॉकेट है. इसी रॉकेट से चीन ने अपना मंगल मिशन तियनवेन-1 भी लॉन्च किया था.

पहले चंग’अ-5 मिशन 2017 में लॉन्च किया जाना था. लेकिन इससे पहले ही 2017 में एक सैटेलाइट लॉन्च मिशन के दौरान लॉन्ग मार्च 5 रॉकेट का इंजन फेल हो गया. इसलिए इस मिशन को आगे बढ़ाना पड़ा. इसका लॉन्च 2020 में शिफ्ट हो गया.

ये मिशन चीन के हाइनान आयलैंड से लॉन्च किया जाएगा. 17 नवंबर को लॉन्ग मार्च 5 को लॉन्च के लिए तैयार किया जाने लगा. अब ये मिशन जल्दी ही लॉन्च होने वाला है. ऑफिशियल चाइनीज़ सोर्सेस ने ये मिशन लेट नवंबर में लॉन्च होने की बात कही थी. उन्होंने इसकी कोई तय लॉन्च डेट नहीं बताई है. लेकिन नासा की वेबसाइट के मुताबिक ये मिशन 24 नवंबर 2020 को लॉन्च होगा.

चीन का सबसे पावरफुल रॉकेट लॉन्ग मार्च 5. तियनवेन 1 का लॉन्च. (विकिमीडिया)
चीन का सबसे पावरफुल रॉकेट लॉन्ग मार्च 5. तियनवेन 1 का लॉन्च. (विकिमीडिया)

जेसीबी की खुदाई (चांद पर)

चंग’अ-5 बेसिकली एक मून सैंपल रिटर्न मिशन है. इस मिशन के ज़रिए चांद के सैंपल्स पृथ्वी पर लाए जाएंगे. चांद के टुकड़े. साठ और सत्तर के दशक में अमेरिका और रूस चांद के सैंपल्स लेकर आए थे. लेकिन उसके बाद ये सिलसिला थम गया. 1976 में रूस का लूना 24 चांद से सैंपल लाने वाला आखिरी मिशन था. अब 44 साल बाद चंग’अ 5 चांद के सैंपल्स पृथ्वी पर लाने वाला है.

इस मिशन के चार मॉड्यूल चांद के ऑर्बिट (कक्षा) में पहुंचेंगे. सर्विस मॉड्यूल, अर्थ रिटर्न कैप्सूल, लैंडर और असेंट मॉड्यूल.

इनमें से दो मॉड्यूल नीचे चांद की सतह पर लैंड करेंगे. नीचे जाने वाले हिस्सों का नाम है – लैंडर और असेंट मॉड्यूल. जबकि सर्विस मॉड्यूल और अर्थ रिटर्न कैप्सूल चांद की परिक्रमा ही करते रहेंगे.

वो इलाका जहां से चांद के सैंपल इकट्ठे किए जाएंगे. (नासा)
वो इलाका जहां से चांद के सैंपल इकट्ठे किए जाएंगे. (नासा)

चांद पर लैंडिंग के लिए जिस जगह को चुना गया है, उसका नाम है मॉन्स रुमकर. ये ज्वालामुखी वाला इलाका है. यहां से करीब 1.21 अरब साल पुराने सैंपल्स मिलेंगे. जबकि नासा के अपोलो मिशन्स से जो सैंपल लाए गए थे, वो 3-4 अरब साल पुराने थे.

चांद की सतह पर लैंडिंग के बाद शुरू होगी जेसीबी की खुदाई. लैंडर मॉड्यूल में चांद से सैंपल कलेक्ट करने का बंदोबस्त है. इसका ड्रिल मैकेनिज़्म सतह से दो मीटर नीचे तक की खुदाई कर सकता है. इस मिशन में कम से कम 2 किलोग्राम सैंपल इकट्ठा करने का प्लान है.

ड्रिल के अलावा लैंडर में तीन साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स भी लगाए गए हैं.
1. कुछ कैमरे हैं, जो लैंडिंग साइट की तस्वीरें लेंगे.
2. एक ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार है, जो सतह के नीचे की जानकारी इकट्ठी करेगा.
3. एक स्पेक्ट्रोमीटर भी है, जो लैंडिंग साइट पर खनिजों की जानकारी निकालेगा. साथ ही इस चीज़ का भी हिसाब लगाएगा कि चांद की मिट्टी में कितना पानी है.

वो हिस्सा जो चांद पर जाकर खुदाई करेगा.

वो हिस्सा जो चांद पर जाकर खुदाई करेगा.

इन उपकरणों से ली गई रीडिंग वैज्ञानिकों के काम आएगी. जब वे पृथ्वी पर चांद के सैंपल्स को स्टडी करेंगे, तब तुलना के लिए उनके पास ये रीडिंग्स भी होंगी.

चांद के सैंपल असेंट मॉड्यूल में इकट्ठे किए जाएंगे. करीब चौदह दिन के बाद असेंट मॉड्यूल उड़ान भरेगा. ऊपर चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद वो सर्विस मॉड्यूल से जुड़ जाएगा. असेंट मॉड्यूल चांद के सैंपल अर्थ-रिटर्न कैप्सूल में ट्रांसफर कर देगा. यही वो हिस्सा है जो पृथ्वी पर सैंपल्स लेकर आएगा.

जब कोई चीज़ बहुत तेज़ रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होती है, तो बहुत ज़्यादा घर्षण होता है. ऐसे में इस कैप्सूल को सुरक्षित रखना एक चैलेंजिंग काम है. चीन पहले ही इस कैप्सूल के डिज़ाइन को अच्छी तरह टेस्ट कर चुका है.

वो कैप्सूल जो सैंपल लेकर पृथ्वी पर लौटेगा. (विकिमीडिया)
वो कैप्सूल जो सैंपल लेकर पृथ्वी पर लौटेगा. (विकिमीडिया)

अक्टूबर 2014 में CNSA ने चंग’अ-5 के इस कैप्सूल के ऐट्मॉस्फेरिक री-ऐंट्री टेस्ट किए. ये कैप्सूल चांद का एक चक्कर काटकर पृथ्वी पर वापस लौट आया.

चीन का चांद वाला प्लान

चंग’अ-5 चीन के लूनर ऐक्स्प्लोरेशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसे चंग’अ प्रोजेक्ट भी कहा जाता है. इस प्रोजेक्ट में चांद पर कई रोबॉटिक मिशन्स भेजे जाएंगे. चीन के मून मिशन्स अब तक सफल ही रहे हैं.

2007 में चीन ने चांद पर अपना पहला मिशन भेजा. इस मिशन का नाम था चंग’अ-1. चंद्रयान 1 की तरह ये भी एक ऑर्बिटर मिशन था. यानी इसे सिर्फ चांद की परिक्रमा करनी थी. चीन ने 2010 में चंग’अ-2 नाम का एक और ऑर्बिटर मिशन भेजा.

2013 में चीन ने चांद पर पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग की. मिशन का नाम था चंग’अ-3. इसमें लैंडर के साथ एक रोवर भी था. रोवर यानी चांद पर घूमने वाली गाड़ी.

2018 में चीन ने दोबारा चांद पर लैंडिंग की. मिशन चंग’अ-4. ये मिशन ऐतिहासिक साबित हुआ. ये चांद की फार साइड पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला मिशन बना.

चंग'अ 4 का लैंडर और रोवर. (विकिमीडिया)
चंग’अ 4 का लैंडर और रोवर. (विकिमीडिया)

अगर चंग’अ-5 सफल रहा तो ये दिसंबर के बीच में चांद के सैंपल्स पृथ्वी पर लेकर पहुंचेगा. इसके बाद चंग’अ प्रोजेक्ट के कई और मिशन लॉन्च होंगे.

2030 तक चीन चांद पर मनुष्यों को भेजना चाहता है. चंग’अ प्रोजेक्ट इससे पहले होने वाली तैयारी है. चंग’अ-5 से आने वाले सैंपल्स को स्टडी किया जाएगा.


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