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पुतिन के सबसे बड़े सपने पर क्या ख़तरा है?

वैज्ञानिक प्रयोगों की एक ख़ासियत होती है. आप दुनिया की किसी भी प्रयोगशाला में वो एक्सपेरिमेंट कर लीजिए, नतीजा हर बार एक ही आएगा. मगर साइंस के इस स्वभाव पर शायद रूस को भरोसा नहीं था. उसने जर्मनी की एक लैब में हुए टेस्ट को चैलेंज कर दिया. अब जर्मनी की साख दांव पर थी. अपनी बात साबित करने के लिए उसने दो और देशों से मदद ली. उन दोनों देशों की लैब्स ने भी जर्मनी वाली बात को सही पाया. लैब के इन नतीज़ों के आगे रूस बुरी तरह फंस गया है. इस मामले में पुतिन का एक बड़ा सपना भी दांव पर लग गया है. ये क्या मामला है, विस्तार से बताते हैं आपको.

ये मामला शुरू हुआ 20 अगस्त को

रूस में तोम्स्क नाम का एक शहर है. उस रोज़ सुबह के वक़्त यहां एयरपोर्ट से एक हवाई जहाज उड़ा. चार घंटे की यात्रा पूरी करके इस विमान को मॉस्को में लैंड होना था. इस प्लेन में बैठे एक यात्री को एकाएक बेचैनी सी महसूस हुई. उसके माथे पर पसीना भर गया. उसने बगल में बैठी अपनी प्रेस सेक्रेटरी किरा यरमिश से रुमाल मांगा. फिर वो अपनी सीट से उठकर बाथरूम की तरफ बढ़ा. मगर बीच रास्ते में ही उसके मुंह से एक चीख निकली और वो लड़खड़ाते हुए नीचे गिर गया.

लोगों ने देखा, पैसेंजर बेहोश है. तत्काल प्लेन की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई. हवाईअड्डे पर मौजूद एक ऐम्बुलेंस उस आदमी को लेकर फटाफट अस्पताल की तरफ भागी. ऐम्बुलेंस में बेहोश पड़े यात्री के साथ उनकी सेक्रेटरी किरा भी थीं. उन्होंने ऐम्बुलेंस में बैठे-बैठे ही एक ट्वीट किया. किरा का ये ट्वीट कुछ ही मिनटों में ब्रेकिंग न्यूज़ बनकर इंटरनैशनल मीडिया में फ्लैश होने लगा-

रशियन अपोज़िशन लीडर अलेक्सी नवलनी को ज़हर देकर मारने की कोशिश….

Alexei Navalny
रूस के विपक्षी दल के नेता अलेक्सी नवलनी. (एपी)

शॉर्ट में समझिए आगे क्या हुआ?

इसके आगे की कहानी आप जानते हैं. मगर फिर भी हम ब्रीफ में थोड़ा रिवाइज़ कर लेते हैं. नवलनी कोमा में चले गए. उनके साथी इलाज के लिए उन्हें रूस से बाहर ले जाना चाहते थे. बहुत ना-नुकुर के बाद रूस ने इसकी इजाज़त दी. इसके बाद नवलनी को इलाज के लिए जर्मनी लाया गया. यहीं से इस हाई-प्रोफाइल ज़हरखुरानी केस की कड़ियां खुलने लगीं.

जर्मनी के फॉरेसिंक एक्सपर्ट्स को नवलनी के भीतर नोविचोक नाम के एक ख़तरनाक नर्व एजेंट का अंश मिला. हम दुनियादारी के एक एपिसोड में नर्व एजेंट और नोविचोक के बारे में आपको विस्तार से बता चुके हैं. इसी एपिसोड में हमने आपको बताया था कि नोविचोक का सीधा लिंक रूस के साथ है. ऐसे में नवलनी पर हुए हमले को लेकर सीधे पुतिन सरकार पर उंगली उठी.

जर्मनी ने इस मामले पर रूस से सफाई मांगी. जर्मनी ने रूस से कहा कि वो अगले कुछ दिनों के भीतर नवलनी पर हुए हमले के घटनाक्रम का ब्योरा दे. उसने कहा कि अगर मॉस्को जांच में सहयोग नहीं करता, तो जर्मनी उसपर आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है. इसी सिलसिले में जर्मनी ने नाम लिया- नॉर्ड स्ट्रीम 2 प्रॉजेक्ट का.

Nord Stream 2 Pipeline Project Route
नॉर्ड स्ट्रीम 2 प्रॉजेक्ट. (फोटो: Gazprom)

नॉर्ड स्ट्रीम क्या चीज है?

नॉर्ड स्ट्रीम 2 तकरीबन 1,200 किलोमीटर लंबी एक गैस पाइपलाइन परियोजना है. करीब 80 हज़ार करोड़ रुपये की लागत वाली ये पाइपलाइन बाल्टिक सागर होते हुए रूस से जर्मनी तक पहुंचेगी. ये परियोजना पुतिन के सबसे महत्वाकांक्षी सपनों में से एक है.

क्यों, बताते हैं. रूस प्राकृतिक गैस का लीडिंग एक्सपोर्टर है. समझिए कि उसकी इकॉनमी आधारित है इसपर. यूरोपीय देश भी रूस से गैस खरीदते थे. मगर वो पाइपलाइन यूक्रेन होते हुए यूरोप जाती थी. रूस इस व्यवस्था को ख़त्म करके सप्लाई का नया रूट बनाना चाहता था.

इस चाहत के पीछे दो बड़ी वजहें थीं. पहली वजह, पैसा. चूंकि गैस सप्लाई का रूट यूक्रेन से होकर जाता था, सो रूस को अपनी इनकम भी उसके साथ बांटनी पड़ती थी. इस अरेंजमेंट में यूक्रेन को करीब 14 हज़ार करोड़ रुपये मिलते थे. रूस ये पैसा बचाना चाहता था. बायपास की दूसरी वजह थी, जियोपॉलिटिक्स. रूस का यूक्रेन से झगड़ा है. 2014 के बाद से ही यूक्रेन अमेरिका के पाले में चला गया है. मान लीजिए किसी दिन टेंशन बढ़ती है और प्रेशर बनाने के लिए रूस गैस सप्लाई रोक देता है. ऐसे में केवल यूक्रेन पर असर नहीं होगा. यूरोप जाने वाली गैस सप्लाई भी रुक जाएगी. इससे रूस को आर्थिक नुकसान होगा.

Nord Stream 2 Pipeline Project Route
नॉर्ड स्ट्रीम 2 तकरीबन 1,200 किलोमीटर लंबी एक गैस पाइपलाइन परियोजना है. (एपी)

अमेरिका क्यों विरोध कर रहा था?

इसीलिए रूस यूरोप में गैस भेजने के लिए नया रूट बनाना चाहता था. इसके लिए उसने तीन पाइपलाइन्स की योजना बनाई- नॉर्ड स्ट्रीम 1, नॉर्ड स्ट्रीम 2, और टर्कस्ट्रीम. इन तीनों परियोजनाओं के सहारे रूस यूक्रेन को अलग-थलग करके यूरोप को सीधे-सीधे प्राकृतिक गैस सप्लाई कर सकता था. इसमें से दो परियोजनाएं- नॉर्ड स्ट्रीम 1 और टर्कस्ट्रीम पूरी हो चुकी हैं. तीसरी परियोजना, यानी नॉर्ड स्ट्रीम 2 में केवल 80 किलोमीटर का काम बचा है. ये प्रॉजेक्ट पूरा हो गया, तो रूस से यूरोप जाने वाली नैचुरल गैस की लगभग समूची खेप इन्हीं तीन पाइपलाइन्स से वहां जाएंगी.

मगर ये पाइपलाइन वाली बात उतनी सीधी थी नहीं. इसपर बड़ा झगड़ा-झंझट था. अमेरिका इस प्रॉजेक्ट के विरोध में था. अमेरिका के विरोध की तीन वजहें थीं-

1. अमेरिका ख़ुद ही यूरोप को नैचुरल गैस एक्सपोर्ट करना चाह रहा है.
2. नए रूट में न होने की वजह से यूक्रेन को नुकसान होगा.
3. इस पाइपलाइन के कारण रूस का क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ेगा.

Donald Trump
ट्रंप प्रशासन नॉर्ड स्ट्रीम प्रॉजेक्ट के विरोध में था. (एपी)

अमेरिका के साथ ही यूरोप भी रूस के साथ नहीं?

इसके अलावा यूरोप भी इस प्रॉजेक्ट के साथ नहीं था. फ्रांस को छोड़कर यूरोपियन यूनियन के ज़्यादातर देश इसके विरोध में थे. यहां तक कि जर्मनी में भी इसपर काफी मतभेद था. उन्हें डर था कि इस पाइपलाइन के कारण जर्मनी अपनी ऊर्जा से जुड़ी ज़रूरतों के लिए रूस पर निर्भर हो जाएगा. उन्हें ये भी डर था कि किसी दिन आपसी तनाव में रूस सप्लाई बंद करने के नाम पर उन्हें ब्लैकमेल न करें.

मगर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने सबके खिलाफ़ जाकर रूस के साथ ये पाइपलाइन डील की. मर्केल का तर्क था कि जर्मनी रूस पर निर्भर नहीं है. ज़रूरत पड़ने पर जर्मनी गैस सप्लाई का दूसरा रास्ता खोज सकता है. मगर रूसी इकॉनमी तो नैचुरल गैस की बिक्री पर ही निर्भर है. ऐसे में अगर एकबार ये पाइपलाइन शुरू हो जाए, तो रूस को कंट्रोल में रखा जा सकेगा. वो कोई बदमाशी नहीं कर पाएगा.

Angela Merkel
जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल. (एपी)

जर्मनी के मंत्री क्या कह रहे?

तो ये थे नॉर्ड 2 गैस पाइपलाइन से जुड़े अलग-अलग पहलू. इनको बताने के बाद अब हम फिर लौटते हैं नवलनी के केस पर. जब नवलनी को नोविचोक दिए जाने की बात सामने आई, तो एकबार फिर इस नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन पर फ़ोकस शिफ़्ट हुआ. जर्मनी के लीडर्स ने कहा कि अगर रूस जांच में सहयोग नहीं करता, तो उसपर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. इसी क्रम में नॉर्ड स्ट्रीम 2 प्रॉजेक्ट को भी बंद किए जाने की मांग उठी. जर्मन सरकार के ज़्यादातर मंत्री इस प्रॉजेक्ट को बंद करके रूस को आर्थिक चपत लगाने की बात करने लगे. जर्मनी के विदेश मंत्री हैं हेको मास. उन्होंने बयान दिया-

अगर नवलनी केस की जांच में रूस सहयोग नहीं करता, तो ये रूसी सरकार की मिलीभगत का एक और बड़ा संकेत होगा. मुझे उम्मीद है कि रूस हमें नॉर्ड स्ट्रीम 2 प्रॉजेक्ट पर पुनर्विचार करने के लिए मज़बूर नहीं करेगा.

Heiko Maas
जर्मनी के विदेश मंत्री हैं हेको मास. (एपी)

जमर्नी की रक्षामंत्री ऐनेग्रेट क्रैम्प बोलीं-

मुझे तो ये नॉर्ड स्ट्रीट 2 प्रॉजेक्ट पसंद ही नहीं था. अब जो भी होगा, वो रूस के बर्ताव पर निर्भर करता है.

जर्मन संसद में विदेशी मामलों की कमिटी के मुखिया हैं नॉबर्ट रोटगेन. उन्होंने भी कहा-

पुतिन केवल नैचुरल गैस की भाषा समझते हैं. इसीलिए हमें भी इसी भाषा में जवाब देना होगा.

Annegret Kramp
जमर्नी की रक्षामंत्री ऐनेग्रेट क्रैम्प. (एपी)

रूस का क्या कहना था इसपर?

उसका कहना था कि नोविचोक के इस्तेमाल की बात आधारहीन है. रूस ने जर्मनी के आरोपों को ‘खाली शोर’ बताया. उसने जर्मनी पर डबल गेम खेलने का भी आरोप लगाया.

रूस के लगाए आरोपों के जवाब में जर्मनी ने फ्रांस और स्वीडन से मदद मांगी. जर्मनी ने कहा कि वो भी नवलनी से लिए गए सैंपल्स की जांच करें. फ्रांस और स्वीडन ने ये जांच की. इस टेस्ट का रिज़ल्ट आया 14 सितंबर को. इन दोनों देशों ने भी नवलनी को नोविचोक दिए जाने की बात कन्फर्म की. इस बारे में बताते हुए जर्मनी के विदेशमंत्री हेको मास बोले-

अब दो और यूरोपियन लैब्स ने भी नोविचोक के इस्तेमाल की पुष्टि की है. मैं उम्मीद करता हूं कि अब रूस हमारी मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठाएगा.

जर्मनी ने ये भी बताया कि नीदरलैंड्स स्थित ‘प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वेपन्स’ भी नवलनी के सैंपल ले गई है. वो भी इसकी जांच कर रहे हैं. इसके अलावा एक और बड़ी डिवेलपमेंट हुई इस केस में. 14 सितंबर को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने इस मसले पर व्लादीमिर पुतिन से फोन पर बात की. मैक्रों ने पुतिन से कहा? मैक्रों ने कहा-

अलेक्सी नवलनी के साथ हुए अपराध पर मैं काफी चिंतित हूं. बिना किसी देरी के इस मामले से जुड़ा समूचा घटनाक्रम सामने रखा जाना चाहिए. जिम्मेदारी तय होनी चाहिए कि किसने नवलनी को जान से मारने की कोशिश की.

Emmanuel Macron
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों. (एपी)

जवाब में पुतिन ने मैक्रों से कहा-

इस तरह के आधारहीन आरोप लगाना अनुचित है. हमने जर्मनी से मेडिकल टेस्ट का पूरा ब्योरा मांगा था. जर्मनी ने अभी तक वो रिपोर्ट्स नहीं दी हैं. हम अपने स्तर पर इस मामले की जांच करवा रहे हैं. हम किसी और देश को अपने ऊपर दबाव नहीं बनाने देंगे.

अब यहां एक सवाल है. रूस कह रहा है कि जर्मनी उसे अपनी जांच में शामिल करे. मगर जर्मनी ऐसा नहीं कर रहा. इसकी वजह ख़ुद नवलनी हैं. वो कोमा से बाहर आ चुके हैं. जर्मनी ने उन्हें रूस के साझा जांच वाले आग्रह की बात बताई. मगर नवलनी ने इससे इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें रूस पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. इसीलिए वो इस जांच में रूस के साथ कोई सहयोग नहीं करेंगे.

इस केस में अब रूस अकेला पड़ गया है?

रूस की बदमाशियों से तंग यूरोपियन देशों को पुतिन गवर्नमेंट के खिलाफ़ बड़ा मुद्दा मिल गया है. ये देश रूस पर कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं. मगर ये कार्रवाई किस शक्ल में होगी, इसपर आमराय नहीं बन पाई है. रूस पर पहले से ही कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध हैं. अब कौन सा नया सेंक्शन लगाया जाए उसपर, ये तय नहीं हो पाया है.

Putin
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (फोटो: एपी)

उधर जर्मनी की अलग दुविधा है. वो यूरोप का लीडर है. ट्रंप के दौर में अमेरिका की कमज़ोर होती स्थिति के आगे जर्मनी की वैश्विक भूमिका भी बढ़ी है. वो मानवाधिकार, राजनैतिक आज़ादी और लोकतंत्र जैसे मुद्दों पर स्टैंड लेता है. मगर उसके ऊपर वित्तीय हितों के चलते चीन जैसे देशों के अपराधों की अनदेखी का भी आरोप है. ऐसे में नवलनी का केस जर्मनी की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. लोग कह रहे हैं, इट्स एव्रीथिंग जर्मनी स्टैंड्स फॉर. चूंकि फ्रांस जर्मनी का बेस्ट फ्रेंड है, इस वजह से वो भी इस मामले में एक स्वाभाविक पार्टी है.

सख़्त दिखने के लिए ही जर्मन सरकार के कई मंत्री नॉर्ड स्ट्रीम 2 प्रॉजेक्ट को रद्द करना चाहते हैं. मगर मर्केल का कहना है कि वो एक वित्तीय परियोजना है. उसे राजनैतिक मामलों से अलग रखा जाना चाहिए. मर्केल भले जो कहें, मगर नॉर्ड स्ट्रीम 2 पर बादल तो मंडरा ही रहे हैं. अगर रूस ने जांच में सहयोग नहीं किया, तो जर्मनी पर उसके खिलाफ़ कार्रवाई का प्रेशर बनेगा. कोई ऐक्शन न लेने पर जर्मनी कमज़ोर दिखेगा. मर्केल रूस के साथ सहयोग बढ़ाने की हिमायती हैं. ऐसे में उनके विरोधी, ख़ासकर अमेरिका, इस प्रकरण के बहाने उनकी पॉलिसी और दूरदर्शिता पर सवाल उठाएंगे.


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