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एयर इंडिया बिकने के बाद क्या एविएशन मिनिस्टर के पास कोई काम नहीं बचा है?

एयर इंडिया (Air India) एक बार फिर टाटा की हो गई है. इसका ऐलान होते ही ट्विटर पर एक अलग तरह की चर्चा शुरू हो गई. बात ये उठी कि जब भारत की कोई सरकारी विमान कंपनी ही नहीं रही तो मिनिस्ट्री और मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास काम ही क्या बचा है? लोगों ने तरह-तरह के मीम चलाना शुरू कर दिया. क्या वाकई में उड्डयन मंत्रालय के पास एक एयरलाइंस ऑपरेट करने के अलावा कोई काम नहीं है, और ज्योतिरादित्य सिंधिया अब खाली हो गए हैं? आइए नजर डालते हैं इस बात पर कि उड्डयन मंत्रालय करता क्या है और सरकारी एयरलाइंस के बिक जाने के बाद भी उसके पास क्या-क्या काम बचे हैं.

एयर इंडिया टाटा की हुई और मीमबाजी शुरू हो गई

8 अक्टूबर को वक्त का पहिया पूरा एक चक्कर घूम गया. एक जमाने में टाटा एयरलाइंस रही एयर इंडिया की घर वापसी हो गई. इसकी खुशी खुद रतन टाटा ने ट्वीट करके जाहिर की. उन्होंने ट्वीट किया,

“वेलकम बैक एयर इंडिया.”

भारत की सरकारी विमान कंपनी एय़र इंडिया के बिकने के साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर भी जोक औऱ मीम चलने लगे. देखिए,

बीजेपी से सांसद रहे और अब कांग्रेस के नेता उदित राज ने लिखा,

मोहतसिम मुनीर ने ट्वीट किया,

कविता आनंद ने लिखा,

इस तरह के तमाम ट्वीट सिर्फ इस बात को साबित करते नजर आए कि अब सिविल एविएशिन मिनिस्टर का काम ही खतम हो गया. लेकिन ऐसा नहीं है. देश की इस बड़ी मिनिस्ट्री के पास अभी भर-भर के काम है कि मंत्री 12 घंटे काम करें, फिर भी बाकी रह जाए.

कित्ता काम करती है सिविल एविएशन मिनिस्ट्री?

अगर शॉर्ट में कहा जाए तो इसे ऐसा समझिए कि देश में हवाईअड्डों से लेकर हवाई यातायात पर पूरा कंट्रोल सिविल एविएशन मिनिस्ट्री का होता है. ये मंत्रालय ही देश भर में उड़ान भरने वाली हर एयरलाइंस को लेकर नीतियां बनाता है. वो चाहें हवाई अड्डे के किसी जगह पर खुलने को लेकर हो या फिर हवाई यात्रा के रूट का निर्धारण हो. मतलब हवाई जहाज तो प्राइवेट कंपनियों के हैं लेकिन ये उड़ेंगे कैसे और किन नीतियों के तहत, ये सिविल एविएशन मिनिस्ट्री तय करती है. ये सब काम करने के लिए मिनिस्ट्री के कई हिस्से हैं. समझिए हाथ-पैर-दिमाग. इनके नाम हैं-

#डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA)
#ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS)
#एयरपोर्ट्स इकॉनमिक्स रेग्युलेटरी अथॉरिटी इंडिया ऑफ इंडिया ( AERAI)
#कमीशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS)
#एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI)
#पवन हंस हेलिकॉप्टर लिमिटेड (PHL)

अब इन सबके काम समझ लीजिए

DGCA मतलब सेफ्टी दरोगा

जिस हवाई जहाज में हम और आप बेफिक्र होकर सवार हो जाते हैं, उसका हवा-पानी यही डिपार्टमेंट चेक करता है. मतलब हवाई-जहाज में सब कुछ सही है या नहीं, इसकी जिम्मेदारी इस विभाग के जिम्मे होती है. इसके कामों में शामिल है-

# हवाई जहाजों के लिए नियम-कायदे बनाना. उन्हें सर्टिफिकेट देना. उनका रजिस्ट्रेशन करना और ये तय करना कि ये उड़ने लायक हैं भी कि नहीं. ये सब डीजीसीए तय करता है. मतलब साफ है कि इसके सर्टिफिकेट के बिना कोई भी हवाई जहाज उड़ान नहीं भर सकता. चाहे वो सरकारी एयरलाइंस का हो या प्राइवेट.
# हवाई जहाज के कर्मचारियों जैसे पायलट और एयरक्राफ्ट की देखभाल करने वाले इंजीनियरों की लाइसेंसिंग का काम भी यही विभाग करता है. इसके लिए बाकायदा एग्जाम होता है. वक्त-वक्त पर उसकी चेकिंग करता है.
# हवाई यातायात के लिए जिम्मेदार एय़र ट्रैफिक कंट्रोलर्स को भी यही लाइसेंस देता है. मतलब जो लोग तय करते हैं कि कौन सी फ्लाइट लेट होगी और कौन सी समय पर रहेगी, उनको भी हरी झंडी यही देते हैं.
# अगर कोई एक्सीडेंट या अनहोनी हो जाए तो मामले की जांच भी यही विभाग करता है.
# कौन सा सामान ढुलाई के लिए सेफ है और कौन सा नहीं, ये भी डीजीसीए ही तय करता है.

ये तो मोटे-मोटे काम हैं. बाकी साल भर पॉलिसी बनाने के कई काम इनके जिम्मे रहते हैं. ये विभाग सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को ही रिपोर्ट करता है. तो एविएशन मिनिस्टर के जिम्मे से काम भी आता है.

भारत में घरेलू उड़ानें 25 मार्च से ही बंद हैं. (File Photo)
विमान उड़ने लायक हैं या नहीं, इससे लेकर सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी डीजीसीए पर है. (File Photo)

BCAS मतलब औचक निरीक्षक

BCAS मतलब  ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी. पहले BCAS अलग से काम नहीं करता था. ये DGCA का ही एक हिस्सा था. लेकिन डीजीसीए के बढ़ते काम के चलते इसे 1987 में अलग विभाग बना दिया गया. इसका काम है मुख्य रूप से डीजीसीए के सेफ्टी रूल्स को लागू करवाने के लिए सर्वे करने का.

# सेफ्टी के लिए बताए गए किसी नियम-कायदे का पालन हो रहा है या नहीं, इसका औचक निरीक्षण करने का काम ये विभाग करता है.
# हवाई यातायात की सुरक्षा से जुड़े नियम-कायदों का पालन हो, इसको सुनिश्चित करने का काम भी यही विभाग करता है.
# सिक्योरिटी स्टाफ सही तरीके से और पूरे प्रोटोकॉल से काम कर रहा है या नहीं, इसके लिए ये विभाग लगातार औचक निरीक्षण करता रहता है.
# अगर सेफ्टी को लेकर कहीं पर को-ऑर्डिनेशन की जरूरत होती है तो ये विभाग बीच में आता है.

AAI मतलब एयरपोर्ट्स का माई बाप

एय़रपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के सिर पर देश भर के एयरपोर्ट्स को सही तरह से चलाने का जिम्मा है. अगर कोई एयरपोर्ट प्राइवेट कंपनी को भी दिया गया है तो वहां सब सही काम हो रहा है, इसकी जिम्मेदारी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की है. इसके मुख्य काम कुछ इस तरह से हैं-

# किसी भी सिविल एय़रपोर्ट का डिजाइन, रखरखाव व ऑपरेशन कैसे होगा, ये अथॉरिटी ही तय करती है.
# पैसेंजर टर्मिनल कैसा होगा. एंट्री किधर से होगी. वेटिंग कहां पर होगी. इनके साथ ही आम पैसेंजर्स की सुविधाओं के हिसाब से प्लानिंग करने का बारीक काम भी अथॉरिटी तय करती है.
# रडार और कम्यूनिकेशन की दूसरी कौन सी तकनीक कहां पर इस्तेमाल करनी है, इसे भी अथॉरिटी ही तय करती है.

विदेश से आने वाले व्यक्ति को ग्रीन और रेड चैनल से गुजरना होता है. (इंदिरा गांधी एयरपोर्ट की तस्वीर.)
देश भर के एयरपोर्ट्स के डिजाइन और सुविधाएं कैसी होंगी, ये एयरपोर्ट अथॉरिटी ही तय करती है. (IG एयरपोर्ट की तस्वीर.)

CRS मतलब रेलवे इंस्पेक्टर

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि एविएशन मिनिस्ट्री के पास हवाई जहाज के अलावा रेल की एक जिम्मेदारी भी है. ऐसी जिम्मेदारी जो सबसे जरूरी है. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के तहत ही आता है कमीशन ऑफ रेलवे सेफ्टी. इस कमीशन का काम है किसी भी रूट पर रेल चलने से पहले ये जांच करना कि सब कुछ सही है कि नहीं. काम इतना महत्वपूर्ण है कि जब तक ये कमीशन हरी झंडी नहीं दिखाता, रेल नहीं दौड़ सकती.

आपको लग रहा होगा कि इतना बड़ा रेल मंत्रालय है तो ये काम इन्हें काहे सौंप दिया. इसे चेक एंड बैलेंस कहते हैं. जिन इंजीनियरों ने पटरी बिछाई और उस पर रेल चलाने की तैयारी कर रहे हैं, वो अपने ही बनाए प्रोजेक्ट की सेफ्टी कैसे जांच पाएंगे? इसके लिए एक निष्पक्ष और काबिल इंस्पेक्टर की जरूरत तो बनती ही है. इस रोल में आता है कमीशन ऑफ रेलवे सेफ्टी. देश भर में कहीं भी मेट्रो रेल चलनी हो, इसकी चेकिंग के बिना हरी झंडी नहीं मिल सकती. ये पूरी तरह से एविएशन मिनिस्ट्री के अंतर्गत आता है और एविएशन मिनिस्टर के काम का हिस्सा है.

PHL यानी सरकारी उड़न खटोला

एयर इंडिया के टाटा के पास चले जाने के बाद अब भी एविएशन मिनिस्ट्री के पास उड़नखटोले की सर्विस बरकरार है. हम बात कर रहे हैं पवन हंस हेलिकॉप्टर लिमिटेड की. ये सरकारी हेलिकॉप्टर सर्विस है जो पूरी तरह से एविएशन मिनिस्ट्री के इशारे पर काम करती है. इसमें 43 हेलिकॉप्टरों का एक बेड़ा है जो अलग-अलग तरह की सर्विसेज़ देता है. मिसाल के तौर पर इन्हें पर्सनल इस्तेमाल के लिए किराए पर लिया जा सकता है, दुर्गम इलाकों में बचाव के काम भी आते हैं, वीआईपी मूवमेंट और कॉर्पोरेट सर्विसेज आदि का काम भी ये हेलिकॉप्टर कंपनी करती है.

AERAI तय करती है एयरपोर्ट फीस

एयरपोर्ट्स इकॉनमिक्स रेग्युलेटरी अथॉरिटी इंडिया ऑफ इंडिया (AERAI) का काम एयरपोर्ट पर खर्चे-पानी का हिसाब-किताब रखना है. यह विभाग सब हिसाब-किताब लगाकर मंत्रालय को बताया है कि एयरपोर्ट्स पर अलग-अलग सर्विस के लिए कितना चार्ज लिया जाना चाहिए. कुल मिलाकर इसका काम आने वाले खर्चे के बारे में अंदाजा लगाना और फिलहाल हो रहे खर्चे की जानकारी देने का है.

तो इस बार जब ज्योतिरादित्य सिंधिया को देखें तो ये न समझें कि एयर इंडिया के बिकने से सिविल एविएशन मिनिस्टर काम खत्म करके खाली हो गए हैं. एक सिविल एविएशन मिनिस्टर का काम किसी विमान कंपनी से कहीं ज्यादा बड़ा है.


वीडियो – टाटा ने एयर इंडिया के लिए कितने हजार करोड़ की बोली लगाई?

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