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लॉकडाउन में किसानों को अपनी फसल बेचने में क्या-क्या दिक्कतें हो रही हैं?

4 मई से लॉकडाउन का तीसरा चरण चल रहा है. सरकार ने देश को रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में बांटा है. अलग-अलग ज़ोन में कई गतिविधियों को इजाज़त दी गई है. हालांकि 15 अप्रैल को दूसरी बार लॉकडाउन बढ़ाने के साथ ही कुछ शर्तों के साथ खेती-किसानी से जुड़ी लगभग सभी गतिविधियों को छूट दी गई थी. उस समय की गाइडलाइन के मुताबिक, सरकार ने खेती से जुड़े सभी काम, एजेंसियों की तरफ से कृषि उत्पादों की खरीद की छूट दी थी. इनमें MSP से जुड़ी चीजें शामिल थीं. एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC) की तरफ से चलने वाली मंडियां को कुछ शर्तों के साथ खोलने की इजाजत दी गई थी. ये भी कहा गया था कि राज्य सीधे किसानों या फार्म प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) की तरफ से कृषि प्रोडक्ट्स खरीद सकते हैं. लेकिन जिनके लिए ये फैसले लिए गए, उनकी जिंदगी पर क्या असर पड़ा? 

इस बार बे मौसम बारिश से भी किसानों को दिक्कत हुई है. (प्रतीकात्मक फोटो-पीटीआई)
इस बार बे-मौसम बारिश से भी किसानों को दिक्कत हुई है. (प्रतीकात्मक फोटो-पीटीआई)

क्या किसान की जिंदगी आसान हुई? वो अपनी फसल बेच पा रहे हैं, क्या उन्हें एमएसपी मिल रहा है? ख़ास तौर से गेहूं की बिक्री के मामले में क्या-क्या दिक्कतें हो रही हैं? मंडियों तक किसान अपनी फसल आसानी से ले जा पा रहे हैं कि नहीं? ये सब जानने के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने बात की अलग-अलग राज्यों के कुछ किसानों से.

नाम- निखिलेश
जगह- बलिया, यूपी

निखिलेश का कहना है कि क्रय केंद्रों तक पहुंचने में किसानों को दिक्कत हो रही है. हालांकि छूट मिली हुई है, लेकिन पुलिस वाले डंडे चलाते हैं. टैम्पो, ट्रैक्टर वालों को निकलने नहीं दिया जा रहा है. क्रय केंद्रों पर 20-25 क्विंटल गेहूं लेकर जाना, पर्ची बनवाना लॉकडाउन में मुश्किल काम है. उनका कहना है कि सब्जी वाले मंडी नहीं जा रहे हैं, क्योंकि बाजार नहीं लग रहे हैं. सीमांत किसानों पर आफत है. बड़े किसान गेहूं काटकर अपने भंडार में रख चुके हैं. वो बाद में भी बेच देंगे, लेकिन छोटे किसान तुरंत अपनी फसल बेच देते थे, लेकिन बेच नहीं पा रहे हैं.

उन्होंने कहा,

क्रय केंद्रों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है. हर आदमी के पास परमिट नहीं होता है. ऐसे में उन्हें थाने में बंद कर दे रहे हैं. कई जगहों पर क्रय केंद्र शुरू ही नहीं हुआ है. सरकारी कर्मचारी बैठ नहीं रहे हैं. वो कोरोना की ड्यूटी में लगे हैं, लेटर में भले एग्रीकल्चर को छूट दी गई है, लेकिन पुलिस वाले चलने नहीं दे रहे हैं.

स्थानीय अखबारों में छपी खबरें जिनमें बताया गया है कि कैसे किसानों ने अपने खेत में ही सब्जियों को नष्ट कर दिया.
स्थानीय अखबारों में छपी खबरें, जिनमें बताया गया है कि कैसे किसानों ने अपने खेत में ही सब्जियों को नष्ट कर दिया.

नाम-धर्मेंद्र मलिक
जगह-मुजफ्फरनगर, वेस्ट यूपी

धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या फल और सब्जियों को लेकर है. ट्रांसपोर्ट मिल नहीं रहे हैं. मंडी कुछ समय के लिए खोली जा रही हैं, तो किसानों को औने-पौने दाम पर अपनी फसल बेचकर आना पड़ता है. मजदूरी बहुत महंगी हो गई है. एक किलो मिर्च की तुड़ाई की लागत पांच रुपए किलो है, लेकिन मंडी में किसानों को चार से छह रुपए किलो दाम मिल रहा है. इसलिए फसलें नष्ट कर दीं. फूलगोभी के किसानों ने फसलों पर ट्रैक्टर चला दिए. इस बार सप्लाई का संकट नहीं है. मांग नहीं है, क्योंकि बहुत सारी चीजें बंद हैं. उन्होंने बताया,

क्रय केंद्रों तक अनाज ले जाने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है. लेकिन बेमौसम बारिश की वजह से गेहूं का कलर बदल गया है. इस वजह से क्रय केंद्रों पर किसानों को परेशान किया जा रहा है. गेहूं की सफाई के नाम पर किसानों से 20 रुपए काटे जा रहे हैं.

नाम- इरफान उल हक खां
जगह- पूर्वी चंपारण, बिहार

इरफान उल हक खां पैक्स के अध्यक्ष रह चुके हैं. उनका कहना कि पूर्वी चंपारण के केसरिया ब्लाॉक में क्रय केंद्र बनाया गया है. लेकिन क्रय केंद्रों पर अधिकारी नहीं बैठ रहे हैं. गोदाम भी नहीं है. किसान अपनी फसल नहीं पहुंचा पा रहे हैं. किसानों को समय पर पैसा नहीं मिल पा रहा है. कॉपरेटिव बैंक में खाता है, तो भुगतान नहीं हो पा रहा है. इस महीने के लास्ट में किसान धान के बीज डालेंगे, लेकिन अब तक अच्छी क्वालिटी का बीज नहीं आया है. खाद की व्यवस्था नहीं है. उन्होंने बताया,

सब्जी के किसानों को दिक्कत हो रही है. मांग है नहीं, न ही लगन है. इस महीने में लगन होती थी, तो सब्जियों की डिमांड रहती थी. लेकिन इस साल सब्जियां कौड़ी के भाव बिक रही हैं. किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है.

नाम- सुरेंदर सिंह
जगह- जयपुर, राजस्थान

किसान सुरेंदर सिंह का कहना है कि कहां अनाज बेचें? कोई खरीदने वाला ही नहीं है. जो खरीद भी रहे हैं, वो बहुत कम रेट पर ले रहे हैं. सरसों का रेट 4400 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है, लेकिन 3800 रुपए/क्विंटल के हिसाब से ले रहे हैं. क्विंटल पर 600 रुपए कम दे रहे हैं. उन्होंने बताया,

सरकार ने अभी खरीदारी शुरू नहीं की है. गेहूं, सरसों, चना, जौ, कुछ भी नहीं बिक पा रहा है. सरकार का कहना है कि 10 से 15 दिन बाद शुरू करेंगे. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा. मैसेज आएगा, फिर अपनी फसल लेकर जानी होगी. रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हुआ है. लंबा टाइम लगेगा.

नाम- ईश्वर सिंह,
जगह- सोनीपत (हरियाणा)

ईश्वर सिंह का कहना है कि बॉर्डर सील होने की वजह से दिल्ली में सब्जी नहीं जा पा रही है. सबसे ज्यादा दिक्कत सब्जी उगाने वाले किसानों को हो रही है. उन्होंने बताया कि गेहूं बेचने के लिए पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ रहा है. किसान पढ़े-लिखे नहीं हैं. दिक्कत हो रही है. उन्होंने बताया,

मैंने 20-25 दिन पहले रजिस्ट्रेशन कराया था. पहले खेत से सीधे हम मंडी में फसल पहुंचा देते थे. लेकिन अब हमें पहले अनाज खेत से घर लाना पड़ रहा है. डबल मेहनत लग रही है. मजदूरी भी ज्यादा लग रही है. मेरे पास SMS आया है. बस दिक्कत ये है कि एकसाथ अपनी फसल नहीं ले जा सकते हैं. हमें एकसाथ पूरी फसल मंडी ले जाने की इजाजत मिलनी चाहिए.

यहां खेती-किसानी पर नजर रखने वाले कुछ लोगों ने बताया कि किसानों की सब्जियां खेतों में ही खराब हो रही हैं. किसानों को सरकार एसएमएस के जरिए बुला रही है. किसान भंडारण नहीं कर पा रहे हैं. सरकार की ओर से 50 किसानों को मैसेज आता है कि आप गेहूं बेचने आइए. ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर किसानों से रजिस्ट्रेशन करवा लिया था. जिन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया है, उन किसानों के पास मैसेज आ रहे हैं. लेकिन दिक्कत ये है कि किसान को जब तक मैसेज नहीं मिल रहा है, तब तक वह स्टोर कैसे करे. हर दूसरे-तीसरे दिन मौसम खराब हो रहा है. खेत से किसान गेहूं लेकर आया, तो उसकी लोडिग-अनलोडिंग के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं. मिल भी रहे हैं, तो महंगे मिल रहे हैं.

कई राज्यों ने गेहूं की खरीद का जो लक्ष्य रखा था उसे पा लिया है. (प्रतीकात्मक फोटो-पीटीआई)
कई राज्यों ने गेहूं की खरीद का जो लक्ष्य रखा था, उसे पा लिया है. (प्रतीकात्मक फोटो-पीटीआई)

नाम- राजविंदर
जगह- संगरूर, पंजाब

हालांकि पंजाब के किसान राजविंदर सिंह का कहना है कि इस बार मंडी बढ़ा दी गई थी. थोड़ी बहुत परेशानी हुई, लेकिन बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं हुई. क्रय केंद्रों पर पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है. 90 प्रतिशत के आसपास खरीद हो चुकी है. आढ़ती के पास लॉकडाउन पास होता था. उनसे पास लेकर हम अपनी फसल मंडी में ले जाते थे. एक पास पर एक ट्रॉली, दो पास पर दो ट्रॉली ले जा सकते थे. हमें कोई दिक्कत नहीं हुई.

किन राज्यों की क्या स्थिति है?

पंजाब में किसानों से 100 लाख टन से ज्यादा गेहूं खरीदा जा चुका है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसकी जानकारी दी. उनका कहना है कि 35 लाख टन की खरीद जल्द पूरी कर ली जाएगी. पंजाब ने इस साल 135 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया गया है. हरियाणा में 51 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है. राज्य ने इस साल 95 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है.

सबसे खराब हालत उत्तर प्रदेश की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी मंडियों से समर्थन मूल्य पर 10 लाख टन से भी कम गेहूं की खरीद की सूचना है. उत्तर प्रदेश में 363 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है, जबकि खरीद हो पाई है मात्र 10 लाख टन.

केंद्र सरकार ने चालू रबी खरीद सीजन 2020-21 में एमएसपी पर 407 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है. पिछले रबी सीजन में 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी. इस साल ज्यादा उत्पादन के अनुमान को देखते हुए लक्ष्य को बढ़ा दिया गया है.


कोरोना डायरीज़: बलिया के एक किसान ने लॉकडाउन के समय की समस्या साझा की

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