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गलवान घाटी के अलावा चीन ने भारत के खिलाफ कौन-कौन से मोर्चे खोल रखे हैं?

भारत और चीन के बीच तनाव बरकरार है. पहले पैंगोंग झील के पास चीन ने भारत के इलाके में घुसने की कोशिश की. फिर गलवान घाटी का वो इलाका, जो भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है, वहां पर भी चीन मुसीबत बना. इसी इलाके में 15 जून की रात दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई. भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए. सिर्फ इन्हीं दो जगहों पर नहीं, बल्कि चीन दौलत बेग ओल्डी (DBO) और देपसांग सेक्टर में भी मुसीबतें बढ़ा रहा है. चीन ने भारत के खिलाफ कौन-कौन से मोर्चे खोल रखे हैं? इन जगहों पर कब, क्या हुआ? यहां हम इसी पर चर्चा करेंगे.

टाइमलाइन

चीन ने अप्रैल में ईस्टर्न लद्दाख में LAC के पास सेना बढ़ाना शुरू कर दिया था. लद्दाख में गलवान घाटी और LAC पर पड़ने वाली पांगोंग झील के उत्तरी किनारे के पास चीन के सैनिकों का जमावड़ा बढ़ने लगा था.

पहली बार 5 मई को चीन और भारत के सैनिकों की आपस में हिंसक झड़प हुई. ये हिंसक झड़प पैंगोंग झील के उतरी किनारे के पास हुई. झगड़ा इसलिए हुआ, क्योंकि चीन के सैनिक LAC पार करके कई किलोमीटर तक भारत के इलाके में आग गए थे. जब भारत के जवान पेट्रोलिंग करने गए, तो चीनी सैनिकों ने रोक दिया. फिर आपस में मारपीट हुई. दोनों तरफ से कई जवान जख्मी हुए.

# पैंगोंग झील के साथ ही गलवान घाटी में भी तीन जगह PLA के सैनिक भारत के इलाके में पहुंच गए. चीनी सैनिकों ने टेंट गाड़ना शुरू कर दिया. वो अपने साथ वाहन भी लाए थे. उन्होंने भारत के सड़क निर्माण के काम को भी रोकने की कोशिश की.

9 मई को चीन के सैनिक सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत के इलाके में घुस गए. यहां चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच झड़प हुई. भारत के चार और चीन के सात जवानों के जख्मी होने की खबर आई. यहां लोकल मिलिट्री कमांडर स्तर पर झगड़ा सुलझा लिया गया.

12 मई को LAC के पास चीन के हेलिकॉप्टर उड़ते देखे गए, तो भारत ने भी सुखोई-30 लड़ाकू विमान लद्दाख में एलएसी के पास उड़ाया. इस बीच भारत और चीन, दोनों ही सेनाएं LAC के पास अपनी फोर्स बढ़ा रही थी. मिरर डिप्लॉयमेंट किया जा रहा था. लोकल कमांडर स्तर पर झगड़ा सुलझाने के लिए बातचीत भी की गई.

Galwan River Map Into
सैटेलाइट इमेज के ज़रिए ऐसी दिखती है गलवान नदी और घाटी. (तस्वीर: प्लैनेट लैब्स/इंडिया टुडे)

पहली बार 30 मई को रक्षा मंत्री ने ‘आजतक’ से बातचीत करते हुए कहा कि माना कि लद्दाख में टकराव चल रहा है, लेकिन बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा.

2 जून को दोनों सेनाओं में मेजर जनरल स्तर की बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

5 जून को भारत और चीन के राजदूतों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आपस में बात की. इसके एक दिन बाद 6 जून को लद्दाख के भारत और चीन के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई.

9 जून को गलवान घाटी के कुछ इलाकों और हॉट स्प्रिंग में भारत और चीन की सेनाओं में तनाव कम होने की खबर आई. दोनों सेनाएं पीछे हटने को राज़ी हो गईं. खबर आई कि चीन ने अपने टेंट भी हटा लिए हैं. हालांकि आधिकारिक तौर पर इस खबर की पुष्टि भारतीय सेना या सरकार के स्तर पर नहीं की गई थी.

13 जून को आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने कहा कि चीन के साथ सीमा पर हालात काबू में है. उन्होंने कहा कि चीन और भारत के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत हो रही है और बातचीत के जरिए हम हर तरह के विवादित मुद्दों को सुलझाने में सक्षम हैं.

इस नक्शे में आप भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को देख सकते हैं. लाल बिंदू में गलवान घाटी दिख रही है. यहीं पर अभी झडप हुई है.
इस नक्शे में आप भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को देख सकते हैं. लाल बिंदु में गलवान घाटी दिख रही है. यहीं पर अभी झड़प हुई है.

14 जून को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और चीन के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत चल रही है. चीन भी झगड़ा सुलझाना चाहता है. राजनाथ सिंह ने कहा था कि हम किसी को अंधेरे में नहीं रखेंगे और देश पर कोई आंच भी नहीं आने देंगे.

15 जून: दोनों देशों के बीच ब्रिगेडियर कमांडर, कमांडर ऑफिसर लेवल की बातचीत हुई. ये बातचीत PP14 इलाके के पास की गई. इसमें गलवान घाटी में सैनिकों को वापस भेजने और फिर अप्रैल से पहले जैसी सामान्य स्थिति कायम करने को लेकर चर्चा हुई.

इसके बाद ताजा घटना 15-16 जून की दरमियानी रात की है, जिसमें चीन के साथ हुई झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए.

ये अप्रैल से 16 जून तक की घटना की टाइम लाइन है. इसमें आपने जाना कि कब, क्या हुआ. चीन ने गलवान घाटी, पैंगोंग झील, दौलत बेग ओल्डी, देपसांग सेक्टर और नाकुला सेक्टर में मोर्चा खोल दिया है. आगे इस पर बात करते हैं कि इन जगहों की वर्तमान स्थिति क्या है?

गलवान घाटी में अभी क्या हालात हैं?

सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि गलवान घाटी में चीन और भारत के सैनिक नई जगहों पर तैनात हैं. 22 जून को ली गई तस्वीरों में दिख रहा है कि पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास चीनियों ने एक नया फॉरवर्ड बिल्ड-अप बना लिया है. Maxar’s Worldview-3 Satellite से ली गई तस्वीरों में वाहनों की आवाजाही, जेसीबी मशीन और निर्माण दिख रहा है.

‘इंडिया टुडे’ ने सैटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट कर्नल (रिटायर्ड) विनायक भट से इन तस्वीरों का विश्लेषण कराया. कर्नल भट ने बताया, ‘दोनों पक्षों ने नदी के किनारों पर अपने सैनिकों को तैनात किया है, लेकिन लगता है कि PLA के सैनिक अपने वादे के मुताबिक पीछे नहीं हटे हैं.’ कर्नल भट ने नोट किया कि भारतीय पक्ष की ओर तंबू संघर्ष की जगह से 500 मीटर दूरी पर हैं. वहीं चीनियों का तबुंओं और स्टोरेज का दायरा ज्यादा बड़ा फैला है और संघर्ष की जगह के बहुत पास है. कर्नल भट ने कहा, ‘तस्वीरों में ऑब्जर्व की गई अधिकतर स्टोरेज संघर्ष की जगह से 200 मीटर से दो किलोमीटर तक है.’

सेटेलाइट से ली गई तस्वीर जिसमें चीन का निर्माण दिख रहा है.
सैटेलाइट से ली गई तस्वीर, जिसमें चीन का निर्माण दिख रहा है.

हिंसक झड़प के बाद चीन ने पिछले हफ्ते पूरी गलवान घाटी पर दावा करते हुए बयान जारी किया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है. भारत ने कहा है कि गलवान घाटी पर स्थिति ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट है.

25 जून को खबर आई कि चीन गलवान घाटी में झड़प वाली जगह से एक किलोमीटर पीछे हट गया है. गलवान घाटी के पास चीन के सैनिकों की संख्या में कमी देखी गई है.

पैंगोंग झील 

पैंगोंग झील 135 किलोमीटर लंबी है. भारत के हिसाब से 45 किलोमीटर का हिस्सा भारत का है और बाकी चीन का. झील के उत्तर में उभार बने हुए हैं. पश्चिम से पूर्व की तरफ ऐसे आठ उभार हैं. इन्हें फिंगर्स कहा जाता है. भारत का मानना है कि LAC फिंगर 8 से गुजर रही है. भारत फिंगर 4 तक पेट्रोलिंग करता है. लेकिन हाल के कुछ साल में चीन ने पट्रोलिंग फिंगर 2 तक शुरू कर दी.  भारत के जवान 5 मई को फिंगर 2 से आगे पट्रोलिंग करने गए, तो उनको चीन ने वहीं रोक दिया. पैंगोंग सो के उत्‍तरी किनारे पर 5 और 6 मई को भारत-चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई. इसके बाद से ही इस इलाके में तनाव है.

‘इंडिया टुडे’ के डिफेंस जर्नलिस्ट शिव अरूर ने सैटेलाइट तस्वीरों का एनालिसिस करने वाले ऑस्ट्रेलिया के नेथन रुसर से इस बारे में बात की. नेथन ने ही कुछ तस्वीरों का एनालिसिस कर चीन की हरकत की जानकारी दी थी.
‘इंडिया टुडे’ के डिफेंस जर्नलिस्ट शिव अरूर ने सैटेलाइट तस्वीरों का एनालिसिस करने वाले ऑस्ट्रेलिया के नेथन रुसर से इस बारे में बात की. नेथन ने ही कुछ तस्वीरों का एनालिसिस कर चीन की हरकत की जानकारी दी थी.

22 जून को खबर आई कि चीनी सेना ने पैंगोंग झील के आस-पास हलचल बढ़ा दी है.सेटेलाइट इमेज से पता चला कि चीन ने LAC पर भारत की ओर के क्षेत्र में पिलबॉक्स बना लिए हैं. पिलबॉक्स का मतलब होता है ऐसे बंकर, जिनमें जवान के छिपने की पूरी जगह रहती है. बस छोटा-सा छेद रहता है, जिससे हथियार बाहर निकालकर निशाना लगाया जा सकता है. चीन ने LAC के इस तरफ 330 मीटर के दायरे में दो पिलबॉक्स तैयार कर लिए हैं. ये भारत के बीच LAC पर हालात को यथास्थिति रखने की कोशिश का ये साफ तौर पर उल्लंघन है.

दौलत बेग ओल्डी और देपसांग सेक्टर

24 जून को पता चला कि दौलत बेग ओल्डी (DBO) और देपसांग सेक्टर में चीन की सेना का मूवमेंट बढ़ा रहा है. LAC के पास स्थित DBO इलाके में, पेट्रोलिंग पॉइंट 10 से 13 के बीच चीन, भारतीय जवानों के लिए दिक्कत बढ़ा रहा है. चीन काराकोरम दर्रे के आसपास के इलाकों में अतिक्रमण करना चाहता है, ताकि पाकिस्तान और यूरोप के देशों की तरफ जाने वाले हाइवेज़ के लिए रास्ता मिल जाए.

सूत्रों का कहना है कि चीन सड़क के ज़रिए भारी वाहनों और तोपों को LAC के पास मौजूद पेट्रोलिंग पॉइंट (PP) 15, PP 17 और PP 17-A के करीब ले आया है. इन इलाकों में चीन की सेना की गतिविधियां और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज़ बंद नहीं हुई हैं. फिंगर (छोटी-छोटी पहाड़ियां, जिन्हें फिंगर्स कहकर मार्क किया गया है.) इलाकों में भी, चीन खुद को मजबूत कर रहा है. फिंगर-4 और उससे लगे इलाकों में चीन ने खुद को काफी मजबूत कर लिया है.

Daulat Beg
तस्वीर में दिख रहा है कि चीन ने दौलत बेग ओल्डी से 23 किमी दूर कैंप बनाए हैं.

चीनी बेस के पास कैंप और वाहन देखे गए हैं. चीन की ओर से ये बेस 2016 से पहले ही बनाए गए थे, लेकिन इस महीने सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यहां पर नए शिविरों और वाहनों के लिए ट्रैक बनाए गए हैं. जमीनी ट्रैकिंग के जरिये भी इसकी पुष्टि हो चुकी है.

भारत ने मई के आखिर में ही भांप लिया था कि चीन देपसांग में लामबंदी कर सकता है. ये वो इलाका है, जहां पर चीन की सेना ने 2013 में घुसपैठ की थी.

नाकु ला सेक्टर

9 मई को चीन के सैनिक सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत के इलाके में घुस गए थे. यहां चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. भारत के चार और चीन के सात जवानों के जख्मी होने की खबर आई थी. नाकू ला वाली झड़प में तो दोनों तरफ से मिलाकर करीब 150 जवान लड़ाई में शामिल थे. हालांकि यहां लोकल मिलिट्री कमांडर स्तर पर झगड़ा सुलझा लिया गया था.

बाद में एक वीडियो वायरल हुआ था. इसमें भारत और चीन के सैनिक हाथ-पैर और छोटे-मोटे हथियारों से आपस में लड़ रहे थे. वीडियो नॉर्थ सिक्किम के करीब 22 हज़ार फुट ऊंचे चोमो युमो पहाड़ के बेस का था. चोमो युमो नाकू ला से सिर्फ छह किमी दूर है. चीन से तनाव के बीच नाकुला में भी भारत पहले से ज्यादा सतर्कता बरत रहा है.


कैसे उतारी जाती हैं ये सैटेलाइट तस्वीरें, जिनकी मदद से गलवान घाटी का गणित हल हुआ?

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