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सत्यम शिवम सुंदरम सुपर ट्रोलम: डीडी को सोनाक्षी सिन्हा का मज़ाक उड़ाकर क्या मिला?

सितंबर 2019 की बात है. एक्टर सोनाक्षी सिन्हा ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो में अमिताभ बच्चन के सामने ‘हॉट सीट’ पर बैठी थीं. सवाल किया गया, ‘हनुमान किसके लिए संजीवनी बूटी लाने गए थे?’ जवाब के विकल्प थे सुग्रीव, लक्ष्मण, राम और सीता. सोनाक्षी इस सवाल का जवाब नहीं दे पाईं. और लाइफलाइन का सहारा लिया.

उन्हें क्रूरता से ट्रोल किया गया. कहा गया कि उनके पिता का नाम शत्रुघ्न है. राम, लक्ष्मण और भरत- शत्रुघ्न सिन्हा के तीन बड़े भाइयों के नाम हैं. सोनाक्षी के खुद के भाइयों के नाम लव और कुश हैं. उनके घर का नाम रामायण है.

सोनाक्षी का मजाक उड़ाते हुए कैसे ये ट्वीट स्त्री विरोधी नैरेटिव बन गए, ये बताने की ज़रूरत न होगी. खैर.

हम लोगों से अपेक्षा रखते हैं कि उन्हें कॉमन रेफरेंस में इस्तेमाल हुई चीजें पता हों. रामचरितमानस तुलसीदास ने कही, शेक्सपियर अंग्रेजी के बड़े नाटककार थे, सचिन दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में से एक हैं, वगैरह. मगर ये अपेक्षाएं कब डिमांड में बदल जाती हैं हमें पता नहीं चलता. और हमारा अपना ज्ञान, जो खुद हल्का और सतही है, कब अहंकार और क्रूरता में बदल जाता है. ये भी हमें मालूम नहीं पड़ता.

‘यो सोनाक्षी सो डंब’

केबीसी के उस एपिसोड के बाद ट्विटर पर ‘यो सोनाक्षी सो डंब’ हैशटैग ट्रेंड किया. उनकी तुलना आलिया भट्ट से की गई. क्योंकि कुछ साल पहले आलिया भट्ट भी करन जौहर के शो में इंडिया के प्रेसिडेंट का नाम नहीं बता पाई थीं. हालांकि आलिया ने खुद ही पूरे मसले को एक पीआर एक्टिविटी बनाकर AIB (ऑल इंडिया बक**) के वीडियो फीचर में किया. और लोगों ने कहा, ‘आलिया इज अ स्पोर्ट’.

मगर सोनाक्षी ने ऐसा नहीं किया. और कहा कि ऐसा बहुत कुछ है जो उन्हें नहीं आता. तो ट्रोल करने वाले उसपर भी ट्रोल करें. कुल मिलाकर सोनाक्षी ने ये साफ़ किया कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता.

लेकिन भीष्म पितामह को फ़र्क पड़ता है

रामायण और महाभारत के रीरन जब टीवी पर शुरू हुए, मुकेश खन्ना से पूछा गया कि उनके लिए ये कितना मायने रखता है. याद दिला दें कि मुकेश खन्ना ने बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में भीष्म का किरदार किया था. मुकेश खन्ना ने जवाब दिया:

‘मुझे लगता है ये रीरन उनके लिए अच्छे साबित होंगे जिन्होंने पहले ये शो नहीं देखे. ये सोनाक्षी सिन्हा जैसे लोगों की भी मदद करेगा. जिन्हें हमारी माइथॉलजी के बारे में कुछ भी नहीं पता है. उन्हें ये तक नहीं पता कि हनुमान किसके लिए संजीवनी लाने गए थे.’

भीष्म के किरदार में मुकेश खन्ना.
भीष्म के किरदार में मुकेश खन्ना.

इसके बाद मुकेश खन्ना ने और भी काफी कुछ कहा. जिसका अर्थ ये था कि युवा अपनी जड़ों से दूर, विदेशी ऐप्स में खर्च हो रहा है.

इस तरह बहती हवा जितनी सहजता से मुकेश खन्ना ने उस एक्टर को ट्रोल किया, करियर के लिहाज से जिसका कद उनसे आधा है. जिसने मुट्ठीभर फ़िल्में की हैं. मॉडेस्टी की सांस यहीं पर फूलने लगी. क्योंकि शक्तिमान जी बिना सोनाक्षी का नाम लिए भी अपना पॉइंट रख सकते थे.

दूरदर्शन ने इसमें उनका साथ दिया. सीधे तौर पर तो नहीं. मगर कहा यही जा रहा है. केबीसी वाला सवाल दोबारा ट्वीट करके पूछा गया. लोगों ने सोनाक्षी को याद किया. और एक बार फिर कई तरीकों से उनको मूर्ख साबित करने में लग गए.

ठीक यही सवाल केबीसी में सोनाक्षी से पूछा गया था.
ठीक यही सवाल केबीसी में सोनाक्षी से पूछा गया था.

एक बार बात संजीवनी बूटी प्रसंग की

चूंकि बात रामानंद सागर की रामायण की है. हम उसी में दिखाया ये प्रसंग दोहराएंगे. लक्ष्मण को जब मेघनाद का बाण लगा, राम बहुत परेशान हो गए. कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी. तब विभीषण ने बताया कि वैद्य सुषेण ही कुछ कर सकते हैं. हनुमान उनको उनके घर समेत उठा लाए. वैद्य सुषेण ने जांच करके संजीवनी बूटी के बारे में बताया. मगर वो सिर्फ हिमालय पर मिल सकती थी. और दुर्लभ थी. ऋषि-मुनि उस बूटी की सुरक्षा में तैनात रहते थे.

हनुमान ये सभी मुश्किलें समझते हुए भी बूटी लाने निकल पड़े. लक्षमण के पास एक ही रात का वक़्त था. हनुमान वहां पहुंचे तो पहाड़ पर कई बूटियां दिखीं. कुछ न समझ आया तो पूरा पर्वत उठा लाए. वापस आने पर जब उनसे पूछा गया कि पूरा पर्वत क्यों ले आए. तो हनुमान जी ने कहा, ‘मैं अज्ञानी हूं श्रीमान. मुझे कहां इतनी समझ कि बूटी पहचान सकूं?’

विद्या ददाति विनयम

यानी ज्ञान से विनम्रता, अंग्रेजी में कहें तो मॉडेस्टी मिलती है. इतना कुछ करने के बाद भी हनुमान खुद को अज्ञानी कहने से नहीं झिझकते. आम भाषा में कहें तो यही क्लासिक हनुमान मोमेंट है.

मगर हमने क्या किया

हमने मॉडेस्टी छोड़कर उपहास किया. हां ये सच है कि हम रामायण में नहीं जी रहे हैं और एक दूसरे को हमेशा चीनी में लिपटे बोल नहीं बोलते. हम चुटकुले कहते हैं, मीम बनाते हैं.

सटायर और कॉमेडी सबसे कारगर हथियार होते हैं. मगर सत्ता के खिलाफ. कुर्सियों से चिपके नेताओं के खिलाफ. प्रताड़ित कर रहे पावर स्ट्रक्चर के खिलाफ. मगर कोई व्यक्ति जो पहले ही बैकफुट पर है. जब हम उसका मज़ाक उड़ाते हैं तो से उसे क्रूरता कहा जाता है.

‘छोटी-छोटी मगर मोटी बातें’

जापानी कल्चर की एक बहुत ख़ास बात है. जिस आपसी विनम्रता की हम बात कर रहे थे. उसे वहां की भाषा में तेयने (teinei) कहते हैं. अंग्रेजी भाषा में कहें तो माइंडफुलनेस.

यानी दूसरों की सहूलियत की बारे में सोचो. कहीं हम अपने आस-पास किसी को तकलीफ तो नहीं पहुंचा रहे हैं. पब्लिक ट्रांसपोर्ट में हमसे किसी को धक्का तो नहीं लग रहा. कहीं हम किसी ज़रुरतमंद की सीट तो नहीं ले रहे. किसी वृद्धा का बोझा उठा लें. किसी ज़रूरतमंद को लिफ्ट दे दें. दूसरों की इज्ज़त करें. उनकी संवेदनाओं को जगह दें.

शक्तिमान की ‘छोटी-छोटी मगर मोटी बातों’ में ये शामिल नहीं था क्या?

ऑर्गनाइज्ड अटैक

सोनाक्षी पर लौटें. इस पूरे प्रकरण में ये बुरा नहीं कि लोगों ने ट्विटर पर सोनाक्षी के मीम चला दिए. खतरनाक ये है कि उनकी इस बात को मुकेश खन्ना जैसे वेटेरन एक्टर ने याद रखा. और उसका इस्तेमाल एक पूरी पीढ़ी को दोष देने में किया. खतरनाक ये है कि दूरदर्शन ने ये ट्वीट मुकेश खन्ना की टिप्पणी आने के बाद किया.

दूरदर्शन भारत सरकार की ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री के अंतर्गत आने वाली इकाई है. इट कैन डू बेटर दैन ट्रोलिंग.


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