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कहीं भी रहिए, कुछ भी करिए, सरकार आपको देखती रहेगी!

आप सड़क पर चल रहे हैं. किसी चाय की दुकान पर बैठे हैं. रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, हवाई अड्डे, घाट-घड़ियाल-घंटाघर कहीं भी बैठे हैं, खाना खा रहे हैं, या चौराहे पर खड़े होकर बतकुच्चन कर रहे हैं, सीसीटीवी कैमरा है, जो लगातार देख रहा है. और अब बस देख ही नहीं रहा है, ये भी जानने की कोशिश कर रहा है कि अप अपराधी तो नहीं? और अगर हैं? तो आपको कैसे धरा जाए.

क्या है पूरा मामला? कैसे होगा ये? किसने दिया है आदेश? आइये, जानते हैं आसान भाषा में.

क्या अब निगरानी होगी?

हां. ऐसा कह सकते हैं. अब गृह मंत्रालय के आदेश पर भारतीय नागरिकों की निगरानी होगी. और ये निगरानी ऐसे होगी कि सभी सीसीटीवी कैमरों से फेशियल रिकग्निशन किया जाएगा. यानी कम्प्यूटर आपके चेहरे की पहचान करेगा. और देखेगा कि आप कहीं किसी अपराध में संलिप्त तो नहीं? और ऐसा करने का प्रस्ताव आया NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की तरफ से. NCRB यानी वो संस्था जो देश में हो रहे अपराध के आंकड़े इकट्ठा करके रखती है.

ये काम NCRB के CCTNS के तहत किया जाएगा.
ये काम NCRB के CCTNS के तहत किया जाएगा.

इसके लिए NCRB ने संविदा, जिसे ठेका भी कहते हैं, आमंत्रित की है, जिसमें संस्थाओं से कहा है कि वे ऑटोमेटेड फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के लिए ज़रूरी रिसोर्स मुहैया कराएं. इस विज्ञापन को 5 जुलाई 2019 को प्रकाशित किया गया, वही दिन जब निर्मला सीतारमण संसद में बजट में पेश कर रही थीं.

क्या है तर्क?

तर्क ये है कि इससे अपराध रोकने में मदद मिलेगी. गृह मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में भी यह कहा गया है कि इससे ब्यूरो को अपराधियों को खोजने में मदद मिलेगी. साथ ही साथ गुमशुदा लोगों की खोज हो सकेगी और मृत व्यक्तियों की पहचान हो सकेगी. खबरों के मुताबिक़ ब्यूरो ने यह भी कहा है कि इससे पुलिस एक कदम आगे रहेगी.

सारा डाटा NCRB के दिल्ली सेंटर में जाएगा. डाटा क्या होगा? लोगों के चेहरों की तस्वीरों का कलेक्शन होगा डाटा. अलग-अलग समयों पर उनके चेहरे कैसे बदले हैं, इसके ब्यौरे. फोटो कहां से जाएगी? पब्लिक में लगे कैमरों से. किसी प्राइवेट संस्था ने कैमरे लगाए हैं तो वहां से भी. ज़रुरत पड़ने पर फोन से भी. एक व्यक्ति की बहुत सारी फ़ोटोज़ एक बार में अपलोड हो जाएंगी.

कभी पहले इस्तेमाल हुआ है?

चीन में तो होता ही है. कायदे से होता है. सीसीटीवी कैमरों से लोगों पर नज़र रही जा रही है. सारे कैमरे ताकतवर कम्प्यूटर से जुड़े हैं. सबकी तस्वीरें पहले से ही सिस्टम में मौजूद हैं. उन्हें पहले ही जुटा लिया गया. कम्प्यूटर सीसीटीवी से उन तस्वीरों को जोड़कर देखता है. आप अगर रडार पर हैं, तो सिस्टम एक अलर्ट देगा और आप घेरे में आ जाएंगे. ऐसा तो चीन में हो ही रहा है. लेकिन अब चीन एक कदम आगे है. चीन में चश्मा है. चश्मा पुलिसवालों के पास है. और पुलिसवालों का ये चश्मा वही काम करेगा जो सीसीटीवी कर रहा था.

चीन का चश्मा
चीन का चश्मा

खबरें हैं कि हैदराबाद एयरपोर्ट में इसका इस्तेमाल करके देखा गया है. एयरपोर्ट में इंट्री लेने वाले लोगों को इस सिस्टम से गुज़ारा गया था. हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक़, दिल्ली में अब तक 3,000 गुमशुदा बच्चों की पहचान इस सिस्टम के द्वारा की जा चुकी है.

क्या आपको कोई दिक्कत है?

शायद है. कहा तो जा सकता है कि इससे कानून व्यवस्था सुधरेगी. आपराधिक मुकदमों की जांच तेज़ी से होगी और अपराधी जल्द से जल्द पकड़ में आ सकते हैं. लेकिन सबसे बड़ी बहस है प्राइवेसी की. हम समझाते हैं कैसे?

भारत के सभी नागरिक अपराधी तो हैं नहीं. कुछ हैं तो कुछ नहीं हैं. लेकिन इसकी कोई गारंटी भी नहीं कि आने वाले समय में और अपराधी बढ़ेंगे नहीं. बढ़ सकते हैं. भारत का कोई भी नागरिक अपराधी बन सकता है. इसलिए सभी की तस्वीरें इस सिस्टम में जाएंगी. एक व्यक्ति की ढेर सारी तस्वीरें. और आपकी हमारी तस्वीरें अपने डाटाबेस में स्टोर करने के लिए हमसे पूछा भी नहीं जाएगा. न कोई परमिशन ली जाएगी. बस आपको बताए बिना आपकी ढेर सारी तस्वीरें सिस्टम में पहुंच जाएंगी.

आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपकी तस्वीर कम्प्यूटर पर चल रही है.
आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपकी तस्वीर कम्प्यूटर पर चल रही है.

बहुत सारी जगहें ऐसी हैं कि जहां लोग जाते हैं, लेकिन कुछ व्यक्तिगत वजहें होती हैं जिनकी वजह से लोग साझा नहीं करना चाहते. ये लोग अपराधी ही हैं, ये बात नहीं होती. लेकिन ये लोग पर्सनल को पर्सनल ही रखना चाहते हैं. लेकिन फेशियल रिकग्निशन शुरू होगा तो आप जहां भी जाएंगे, सरकार के राडार में रहेंगे. आपको देखा जाता रहेगा.

तस्वीरें कहां से जाएंगी?

सोशल मीडिया से. जहां आप स्टोर करते हैं. अपनी मर्जी से रखते हैं. आप सेल्फी खींचते हैं तो आपके फोन से या आपके कम्प्यूटर से. क्योंकि बीते साल आए केंद्र सरकार के आदेश में भी यही था. लब्बोलुआब यह था कि सुरक्षा के लिए आपके किसी भी कम्प्यूटर से कुछ भी डाटा ले लिया जाएगा, आप मना नहीं करेंगे. मना करेंगे तो जेल और जुर्माना.

क्या आप कानून का सहारा ले सकते हैं?

हां और नहीं भी. आप इस पूरी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दे सकते हैं. लेकिन भारत में अभी नभी डाटा प्रोटेक्शन एक्ट नहीं है. यानी आपकी जानकारियों की सुरक्षा का क़ानून नहीं है. जानकारियां चोरी हो जाएं या कोई हैकर सेंधमारी कर ले, इससे बचने के लिए क़ानून का सहारा लेना मुश्किल है. कानून की मांग तो हो रही है, लेकिन कानून बन नहीं रहा. ऐसे में डाटा की चोरी पर बहुत कुछ नहीं किया जा सकता है, जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल न दे.


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