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"आप जितनी गालियां सोच सकते हैं, मुझे ड्रेसिंग रूम में वो सभी दी गयीं"

लम्बा और खुले कंधे के साथ उलटे हाथ से बैटिंग करने वाला बम्बइय्या ऑल राउन्डर अभिषेक नायर. जिसके इंटरनेशनल करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि उसने 14 सितंबर 2009 को कोलम्बो में हुए कॉम्पैक कप के फाइनल में श्री लंका के खिलाफ़ खेलते हुए सचिन तेंदुलकर को मैदान में जाकर पानी पिलाया था. और ये पिलाने की क्रिया एकदम लिटरल थी. सचिन ने हेलमेट पहना हुआ था. काफी थके हुए थे. उन्होंने ग्रिल को हल्का सा ऊपर किया और अभिषेक नायर एक बोतल से उनके मुंह में पानी उड़ेल रहा था. सचिन ने उस इनिंग्स में शानदार 138 रन बनाये थे. मैन ऑफ़ द सीरीज़ और मैन ऑफ़ द मैच वही बने थे. अभिषेक नेशनल साइड में सिर्फ इतना ही योगदान दे पाए हैं. अब तक.

मगर उस रोज़ पानी की एक बोतल हाथ में लेकर मैदान तक पहुंचने की क्वालिफ़िकेशन पा सकने के लिए अभिषेक ने जो कुछ भी किया है वो बेहद इंस्पायरिंग है. ये सारी बातें अभिषेक ने कहीं इन्डियन एक्सप्रेस से.

अभिषेक ने बातचीत का फ़ोकस अपने स्ट्रगल पर रखा. स्ट्रगल ऐसा जो फॉर्म से नहीं बल्कि दिमाग से जुड़ा हुआ था. वो बातें जो बल्ले पर नहीं दिमाग पर असर करती हैं. आपकी टेक्नीक खराब होती है तो आप सलाह लेते हैं. मगर जब दिमाग खराब होता है तो सलाहें एक किनारे बैठी रहती हैं और सिर्फ़ एक बंद कमरे में आंसू गिरते हैं. और जब सलाह देने वाले, साथ देने वाले ही दिमाग खराब करने वाले बन जायें, फिर जो माहौल तैयार होता है वो बेहद डिप्रेसिंग होता है. ये वो चीज़ें हैं जो एक अच्छे भले इंसान को ज़मीन पर यूं पटकती हैं कि उसकी रीढ़ का चूरन बन जाए. मगर कहना अजय शर्मा का कि हार के जीतने वाले को ही बाज़ीगर कहते हैं. ये बेहद घिसा हुआ और टेम्पो छाप जुमला लग सकता है मगर अब्बास मस्तान की दी हुई ये पंचलाइन खून से सने, अपनी मां की गोद में लेटे अजय के अलावा अभिषेक  नायर पर भी उसी तरह फिट बैठती है. 

मुंबई के कैंप में एक शाम प्रैक्टिस के बाद अपने कमरे में रोते हुए, तिरस्कार से उपजे गुस्से, उस बेइज्ज़ती का प्रतिशोध लेने के पूरे विश्वास के साथ, अभिषेक ने मुंबई रणजी के कप्तान नीलेश कुलकर्णी को एक तेजाबी मेसेज भेजा. मेसेज फ़ोन पर भेजे गए मेसेजों के बनिस्बत कुछ लम्बा था. अभिषेक ने उस मेसेज में वो सारी बातें लिखीं जो उसे चुभती थीं और साथ ही एक बात साफ़ कर दी कि वो कभी भी वो सब कुछ नहीं भूलेगा जो उसे कहा गया है. और एक दिन वो मुंबई के लिए नंबर 4 पर खेलेगा. और मुंबई का मेन प्लेयर बनेगा. 

रीकैप: अमोल मजूमदार. मुंबई क्रिकेट का एक बड़ा नाम. शायद सबसे बड़ा. मुंबई के कोच प्रवीण आमरे से कहता पाया गया, “अरे? आप इसे बैटिंग क्यूं करने दे रहे हैं? ये नेट्स में बैटिंग करना डिज़र्व नहीं करता. यहां बैटिंग करने के लिए कुछ क्लास की ज़रुरत होती है जो इसके पास नहीं है. इसको बोलो कि बॉलिंग करे और चला जाये. आप क्या कर रहे हो प्रवीण?” ये बात ठीक अभिषेक के सामने कही गयी थी. और इसके बाद ऐसे कमेंट्स की बौछार होने लगी. वो चाहे टीम का कप्तान कुलकर्णी हो या मजूमदार या रमेश पोवार.

प्रवीण आमरे उन सभी सीनियर प्लेयर्स को अभिषेक से ऐसे दूर कर रहे थे जैसे वो कोई बिजूका हों और दानों से लदी फ़सल को फ़सल-खाऊ पक्षियों से बचा रहे हों. इन सभी बातों के बीच दबा हुआ अभिषेक नायर गिरता जा रहा था. उसका खेल गिर रहा था. उसका कॉन्फिडेंस गिर रहा था. पहले सीज़न में ज़ीरो के तीन स्कोर्स के बाद उसे टीम से बाहर कर दिया गया. ड्रेसिंग रूम में घुसते ही उसका स्वागत गालियों से किया जा रहा था. अभिषेक कहता है, “आप जितनी गालियां सोच सकते हैं, वो मुझे दी जा रही थीं. मुझे पूरी तरह से ये विश्वास दिलाया जा रहा था कि मैं टीम में रहने के लायक नहीं हूं. और मुझे क्रिकेट खेलने का सपना देखना छोड़ देना चाहिए.”

और उस रात अभिषेक अपने कमरे में बंद रो रहा था. उसके कमरे में एक नया प्लेयर विनीत इंदुलकर आया. उसका साथ देने के लिए. और अभिषेक को रोता देख वो भी रोने लगा. उसने अभिषेक को समझाया कि वो जानता था अभिषेक किन मुसीबतों को झेलकर वहां पहुंचा जहां वो था और उसे कितनी बुरी तरह ट्रीट किया गया था. अब नायर खुद चुप होकर उसे चुप करा रहा था. मगर उसके अन्दर का गुस्सा अब भी बरकरार था. सीनियर्स की बातें अब भी घंटे की तरह उसके कानों में बज रही थीं. उस रात उसने कुलकर्णी को वो गुस्से से भरा मेसेज भेजा.

मुंबई के लिए अगला सीज़न. अभिषेक बेहद परेशान स्थिति में ड्रेसिंग रूम में बैठे हुए थे. तभी अचानक प्रवीण आमरे ने उससे कहा कि पैड पहन ले. उसे नाइट-वॉचमैन के रूप में बैटिंग करनी थी. अभिषेक के सामने पिछला साल फिर आकर खड़ा हो गया. वो तीन में से दो बार ज़ीरो पर जब आउट हुआ था, नाइट-वॉचमैन के रूप में गया था. उसे फिर से वही पैटर्न बनता दिखा. वो फिर से वहीं पहुंचता दिख रहा था जहां से वो दूर भाग रहा था. एक बड़ा गोला हो जैसे. जिसपर वो चल रहा हो. और घूम फिर कर वहीं पहुंच रहा था जहां से शुरू कर रहा था. उसे इस पैटर्न को तोड़ना था. 

बल्ला उठाकर जो अभिषेक गया था वो फिर कभी वापस नहीं आया. वापस आया तो एक थका-हारा, क्रैम्प से जूझता, अपना गुस्सा एक सही दिशा में गेंदों पर निकाल कर आने वाला अभिषेक नायर. स्कोर-बुक में उसके नाम के आगे 97 रन लिखे जा चुके थे. 

बॉलिंग में अभिषेक नायर अब भी क्रैम्प से जूझ रहा था. स्पेल अच्छा नहीं गया. और ठीक इसी के साथ उसे फिर से वो बेइज्ज़ती मिलने लगी जिससे वो पीछा छुड़ाना चाहता था. मजूमदार ने उसके सामने कोच से कहा, “इससे कह दो अगर ये बॉलिंग नहीं कर सकता है तो टीम से निकल जाए.” रणजी ट्रॉफी की एक और रात रोते हुए निकली. फ़र्क बस इतना था कि उस दिन उसने 97 रन बनाये थे. रो वो फिर भी रहा था.

अगले दिन उसे गेंद नहीं दी गयी. पूरे पहले सेशन में अभिषेक फील्डिंग करता रहा. लंच के दौरान अभिषेक प्रवीण आमरे के पास पहुंचा और कहा, “सर उनसे कहो मेरे को बॉलिंग करने दें.” प्रवीण ने कोच होने के नाते कैप्टन को समझाया. लंच के बाद पहला ओवर अभिषेक नायर को मिला.

पहली गेंद. अज़हर भिलकिया. सेट बैट्समैन. कट करने के लिए गया और गली में कैच कर लिया गया. अभिषेक बेहद खुश था. अगली पांच अच्छी गेंदें. और फिर पूर्ण विराम. उस इनिंग्स में उसे अगला ओवर नहीं मिला. मगर अभिषेक के लिए वो एक बदली हुई रात थी. उस रात का मुख्य बदलाव ये था कि वो रो नहीं रहा था.

आगे अच्छी बातें बदी हुई थीं. अजीत अगरकर मुंबई रणजी टीम में वापस आये. अच्छी बात ये हुई कि नायर को हटाया नहीं गया था. 97 रन काम आये. वो टीम में था. उस इनिंग्स के बारे में अभिषेक कहता है, “मैंने वो शॉट्स खेले जो मैं तब तक नहीं खेले थे.” उसकी परफॉरमेंस को और नेट्स में उसे अजीत अगरकर ने नोटिस किया. प्रवीण आमरे से अगरकर ने एक सवाल पूछा, “ये लड़का कौन है? मुंबई के लिए अच्छा रहेगा.”

इस एक सवाल ने शायद अभिषेक की ज़िन्दगी पर सबसे ज़्यादा असर डाला. ड्रेसिंग रूम में अब अभिषेक के लिए पुरवाई बह रही थी. मद्धम मद्धम. सीज़न खतम होने पर पूरी टीम का एक वीडियो सेशन होता है जिसमें सभी प्लेयर्स को बारी बारी से वीडियो पर कुछ कहना होता है. उन सभी इंटरव्यू को पूरी टीम के सामने फिर बाद में चलाया जाता है. रमेश पोवार ने जो कहा वो अभिषेक के लिए एक अचीवमेंट से कम नहीं था. “मुझे इस बात का दुख है कि मैंने पिछले सीज़न में अभिषेक को काफी बुरी बातें बोली और इसके लिए मैं उससे माफ़ी मांगता हूं. इस सीज़न में अगर किसी ने मुंबई के लिए सबसे ज़्यादा योगदान किया है तो वो अभिषेक नायर ही है. उसकी लड़ते रहने की ताकत और अच्छा करने की स्पिरिट कमाल की है. वो एकदम अलग दिख रहा है.”

अब सब कुछ बदल रहा था. मजूमदार भी अब वो मजूमदार नहीं था जो उससे बाहर चले जाने को कहता था. हालांकि अमोल मजूमदार ने ये भी कहा कि उन्हें नहीं याद है कि उन्होंने उतनी बुरी बातें अभिषेक से कही थीं. मगर, अगर कही थीं तो वो शायद मुंबई के एक अक्खड़ कप्तान बन रहे थे. “ये मुंबई टीम का कल्चर रहा है. मगर मैं एक बात बता दूं कि इतने सारे सालों में जो बात मुझे अभिषेक के बारे में सबसे अच्छी लगी है वो है उसका कमिटमेंट और उसकी हार न मारने की स्पिरिट. अभिषेक का लम्बा करियर को आश्चर्य की बात नहीं है. मैं उसके लिए बहुत खुश हूं.”

मुंबई का क्रिकेट ऐसा ही रहा है. वहां ‘बच्चों को’ कमर में हवा भरी ट्यूब डालकर तैरना नहीं सिखाया जाता. उसमें टाइम वेस्ट होता है. उन्हें यूं ही समंदर में फेंक दिया जाता है. जिसमें या तो वो सतह पर हाथ पांव मारते हुए आ जाते हैं. या फिर फेफड़ों में सवा लीटर पानी लेकर डूब जाते हैं.  मगर इसके बारे में भी अभिषेक अपना मत रखते हैं, “मुंबई का खड़ूस नेचर अपनी जगह ठीक है. वो कल्चर है, मानता हूं. मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप लोगों पर अपने शब्दों से चोट करना शुरू कर देंगे. लेकिन ईमानदारी से कहूं तो मुझे कोई गिला शिकवा नहीं है. न अमोल के खिलाफ़ न नीलेश कुलकर्णी के खिलाफ़ और न ही किसी के खिलाफ़. उन्हीं की वजह से मैं टफ़ बना हूं. मैं किसी भी बुरी सिचुएशन से बाहर निकल सकता हूं. मुझमें ये काबिलियत उन्हीं की वजह से आई है. और मुझे ये भी मालूम है कि ऐसा हर कोई नहीं कर सकता है.”

साल 2017 का पहला हफ़्ता. मुंबई वर्सेज़ तमिलनाडु. मुंबई 97 रन के टार्गेट का पीछा करते हुए फिसल रही थी. भला हो अभिषेक नायर का जो ठंडा दिमाग रखते हुए मुंबई को जीत दिलाई. मात्र 2 विकेट से. उस दिन तमिलनाडु की इनिंग्स के दौरान दिनेश कार्तिक के खेले गए उस शॉट की चर्चा रही जिसपर वो आउट हुए. मैच के बाद दिनेश कार्तिक अभिषेक नायर से बात करते हुए दिखे. दोनों गहन विमर्श में लगे हुए थे. मैदान पर भयानक कम्पटीशन के बावजूद दिन ख़त्म होने पर कार्तिक, अभिषेक से सलाह मांग रहे थे. कार्तिक के खेले शॉट के बारे में काफी कुछ कहा जा रहा था. तमिलनाडु की टीम 129 पर थी. कार्तिक ने एक छक्के और एक चौके से शुरुआत की. टीम उनपर काफी डिपेंड करती है. कार्तिक ने बलविंदर संधू को पैडल स्वीप मारना चाहा. और आउट हो गए. पूरी टीम 185 पर खतम हो गयी.

नायर ने बताया कि उसने कार्तिक से ये नहीं कहा कि आखिर वो शॉट अच्छा था या खराब. उसने बस इतना पूछा कि वो शॉट उस समय पर क्यूं खेला? वो शॉट ज़रूरी था? और उसका मकसद कार्तिक को ये अहसास दिलाना था कि उस मौके पर और भी बहुत ऑप्शन थे जिसमें से वो एक बेहतर शॉट चुन सकता था. जिसमें रिस्क कम होता. क्यूंकि उसकी टीम उस वक़्त ऐसी सिचुएशन में नहीं थी जहां रिस्की खेला जा सके.

अभिषेक की ये मेच्योरिटी ही है जो उसे एक बेहतर प्लेयर बनाती है. दिनेश कार्तिक टीम इंडिया में इन आउट होते रहे हैं मगर वो एक ऑप्शन हमेशा मौजूद रहे हैं. वो हर मामले में नायर के सीनियर कहलाये जायेंगे. मगर फिर भी वो नायर से सलाह मांग रहे हैं. एनालिसिस करवा रहे हैं. इसकी वजह है खुद अभिषेक का कंट्रोल में रखा हुआ गेम.

अभिषेक नायर मुंबई इंडियन्स, किंग्स इलेवेन पंजाब, पुणे वॉरियर्स और राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेले हैं. और उन खिलाड़ियों में जिन्होंने बिना फ़िफ्टी मारे सबसे ज़्यादा रन बनाये हैं, दूसरे नम्बर पर हैं. नायर ने आईपीएल में 672 रन मारे हैं. इसके सिवा असली खेल यानी फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 93 मैचों में 5371 रन और 88 टी-20 मैचों में 1193 रन बनांये हैं. फर्स्ट क्लास में अभिषेक की कुल 13 सेंचुरी और 30 हाफ़ सेंचुरी हैं. बॉलिंग में 93 मैचों में 152 विकेट लिए हैं. इस दौरान उनकी इकॉनमी मात्र 2.62 की रही है.

ये रिकॉर्ड किसी भी मामले में उस खिलाड़ी का नहीं लगता जिसे एक वक़्त पर ड्रेसिंग रूम में गालियां दी जाती थीं. जिसके बारे में कहा गया कि उसमें रत्ती भर का भी क्लास नहीं है. और जो टीम में तो क्या नेट्स में बैटिंग करने के लायक नहीं है. नायर ने आज से बहुत वक्त पहले ही कुलकर्णी को भेजे उस मेसेज में किये गए वादे को पूरा कर लिया था. उसके इन सभी रिकॉर्ड्स को एक संदूक में बंद कर आज़ाद मैदान से लगभग तीन किलोमीटर दूर मौजूद समंदर में फेंक भी दिया जाये तो भी उस वादे को पूरा करना ही नायर को एक बेहतरीन खिलाड़ी बना देता है.

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