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इंडिया टुडे की वो रिपोर्ट, जिसके हवाले से PM मोदी राजीव गांधी की छुट्टी का जिक्र कर रहे हैं

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31 जनवरी, 1988. अंग्रेजी की पत्रिका इंडिया टुडे ने उस वक्त के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी की 10 दिन लंबी छुट्टी की एक रिपोर्ट छापी थी. इस रिपोर्ट को लक्षद्वीप से लिखा था अनीता प्रताप ने. इंडिया टुडे मैगज़ीन के पेज नंबर 26,27 और 28 पर ये रिपोर्ट छपी थी. हम आपको उस रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद पढ़ा रहे हैं.

1987 का साल खत्म होने वाला था और 1988 के रूप में नया साल आने वाला था. 87 का साल प्रधानमंत्री राजीव गांधी के लिए चुनौतियों भरा रहा था. सियासत के पेचोखम से दूर होने के लिए राजीव गांधी ने 10 दिन की छुट्टियां प्लान कीं. तय हुआ कि राजीव गांधी अपने परिवार और दोस्तों के साथ 10 दिन की छुट्टी के लिए लक्षद्वीप में रहेंगे. इस छुट्टी के लिए जगह चुनी गई, जो एक आईलैंड था. आईलैंड का नाम था बंगारम, जिसका क्षेत्रफल करीब आधा वर्ग किलोमीटर का था. ये आईलैंड लक्षद्वीप के 36 आईलैंड में से एक था जो कोचीन से 465 किलोमीटर पश्चिम की ओर था. इसकी खासियत ये थी कि ये इकलौता ऐसा द्वीप था जिसपर विदेशी मेहमानों के आने पर कोई पाबंदी नहीं थी. इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से भी ये द्वीप बेहद सुरक्षित था. उस वक्त के लक्षद्वीप पुलिस के मुखिया पीएन अग्रवाल ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि ये द्वीप प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सबसे अच्छी जगह थी.

दुनिया से हुई छिपाने की कोशिश, मीडिया को लग गई भनक

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छुट्टियों में नारियल पानी पीते राजीव गांधी. (फोटो- इंडिया टुडे)

प्रधानमंत्री के इस दौरे को मीडिया से छिपाने की भरपूर कोशिश की गई थी. लेकिन मीडिया को इसकी भनक लग गई. और भनक लगने के पीछे था लक्षद्वीप प्रशासन का वो नारंगी-सफेद रंग का हेलिकॉप्टर, जो 26 दिसंबर को वहां उतरा था. हेलिकॉप्टर को उतारने के लिए बालू पर हवाई पट्टी बनाई गई थी, जिसकी भनक मीडिया को लग गई थी. इस हेलिकॉप्टर में राहुल गांधी और उनके चार दोस्त भी थे. ये उस समूह का हिस्सा थे, जो राजीव गांधी के साथ इस आईलैंड पर छुट्टियां मनाने आया था. प्रशासन ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी कि न तो समंदर के रास्ते और न ही हवा के रास्ते किसी को भी इस बात की भनक लगे कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी वहां छुट्टियां मना रहे हैं.

मेहमानों के नाम सामने आए और फिर सुर्खियां बन गईं

राजीव गांधी की इस ट्रिप में जिन मेहमानों के नाम थे, उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरीं. इस लिस्ट में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के चार दोस्त थे. इसके अलावा सोनिया गांधी की बहन थीं, उनके पति थे, उनकी बेटी थी, सोनिया की मां आर माइनो थीं और सोनिया के मामा थे. इसके अलावा फिल्म ऐक्टर और पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और उनके बच्चे थे. इसके अलावा अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ बच्चन की बेटी भी वहां पर मौजूद थीं, जिनके ऊपर फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन ऐक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था. इन सबके अलावा इस लिस्ट में कुछ और भारतीय मेहमान थे, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण सिंह के भाई विजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी भी थीं. इसके अलावा इस पार्टी में दो और विदेशी मेहमान भी थे.

30 दिसंबर, 1987 की दोपहर से शुरू हुईं छुट्टियां

अमिताभ बच्चन की ये तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर जीवन जोश ने खींची थी, जो इंडिया टुडे में छपी थी.
अमिताभ बच्चन की ये तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर जीवन जोश ने खींची थी, जो इंडिया टुडे में छपी थी.

राजीव गांधी और सोनिया गांधी की छुट्टियां 30 दिसंबर, 1987 की दोपहर से शुरू हुईं. पार्टी के स्टार गेस्ट अमिताभ बच्चन एक दिन बाद कोचिन-कावारत्ती हेलिकॉप्टर से वहां पहुंचे. उनकी पत्नी जया बच्चन चार दिन पहले ही अपने बच्चों और प्रियंका के साथ वहां पहुंच गई थीं. ये सब इस वजह से किया गया था कि अमिताभ बच्चन के वहां पहुंचने की जानकारी को छिपाया जा सके, लेकिन इस छोटे से द्वीप पर ये बड़ी खबर ज्यादा देर तक छिप नहीं सकी. 31 दिसंबर को जब अमिताभ बच्चन बंगारम जाने के लिए कोचिन-कावारत्ती हेलिकॉप्टर पर सवार हुए, तो हेलिकॉप्टर को तेल भरवाने के लिए रास्ते में रुकना पड़ा. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 50 मिनट लगे. इन 50 मिनटों के लिए अमिताभ बच्चन एक होटल में रुके और इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस के एक पत्रकार को इसकी भनक लग गई. जब तक अमिताभ को पत्रकार के बारे में पता लगता और वो उसपर अपना गुस्सा उतारते, उसने चार तस्वीरें खींच ली थीं.

अब राजीव गांधी की छुट्टियों और उनके मेहमानों की लिस्ट के बारे में दुनिया को पता चल गया था. इसके बाद विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए. कावारत्ती में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के जनरल सेक्रेटरी कुंजी कोवा ने सवाल किया कि अपने मेहमानों में अमिताभ बच्चन और अजिताभ बच्चन को शामिल कर प्रधानमंत्री अपने अफसरों को क्या संदेश देना चाहते हैं, जो अफसर अजिताभ बच्चन की स्विटजरलैंड की संपत्ति की जांच कर रहे हैं. कुंजी कोवा ने कहा कि ऐसा करना बेहद डरावना है कि हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल एक ऐसा भी आदमी कर सकता है, जिसका नाम देश के सबसे बड़े घोटाले में शामिल है.

छुट्टियां मनाते राजीव गांधी
छुट्टियां मनाते राजीव गांधी. (तस्वीर- इंडिया टुडे)

लेकिन जो लोग छुट्टियां मनाने गए थे, उन्हें इन विवादों से कोई फर्क नहीं पड़ा. वो पूरी मस्ती से अपनी छुट्टियां बिताते रहे. वो बोटिंग करते रहे, सन बाथ लेते रहे, मछली पकड़ते रहे और तैराकी का आनंद लेते रहे. इसके अलावा वो लोग पास के दो आईलैंड थिन्नाकरा और पराली में पिकनिक मनाने के लिए भी गए. वहां बीच पार्टी हुई, नाच-गाना हुआ और मछलियां पकड़ी गई. राजीव गांधी, राहुल और प्रियंका बहुत देर तक पानी में रहे, लेकिन सोनिया गांधी अपने अस्थमा की वजह से बोट से मोतियों की खूबसूरती निहारती रहीं. इस बोट की तलहटी शीशे से बनी थी, जिससे पानी साफ-साफ दिख रहा था और इस बोट में उनके साथ सोनिया की मां और जया बच्चन भी थीं. वहीं बाकी बचे हुए लोग झील में मस्ती करते रहे. सोनिया कभी-कभार नारियल के पेड़ के नीचे बैठकर अपनी मां या जया बच्चन से बात करती नज़र आती थीं.

राजीव बीच पर जहां-तहां ऐसे घूम रहे थे जैसे उन्हें वहां की पूरी जानकारी हो. एक घायल पड़ी डॉल्फिन को बचाने के लिए राजीव समंदर में भी उतर गए थे और डॉल्फिन को बचाकर लाए थे. वो नवंबर, 1985 में भी एक दिन बंगारम द्वीप पर गुजार चुके थे. प्रधानमंत्री सचिवालय में कार्यरत रहे और उस वक्त लक्षद्वीप के प्रशासक रहे वजाहत हबीबुल्लाह ने भी उस वक्त को याद करते हुए बताया था कि राजीव गांधी को वो जगह बेहद पसंद आई थी. सितंबर, 1986 में राहुल और प्रियंका भी अपने चार दोस्तों के साथ इस द्वीप पर आए थे और बाद में राजीव गांधी ने 18,000 रुपये का बिल भी भरा था.

राजीव गांधी के इस दौरे पर कुल खर्च कितना आया था, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन था, क्योंकि इस पूरी यात्रा के दौरान कई सरकारी एजेंसियां शामिल थीं. लक्षद्वीप प्रशासन की एक शाखा सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ रिक्रिएशन, टूरिज्म एंड स्पोर्ट्स ने खाने की व्यवस्था की थी. इस सोसायटी के पांच लोग बंगारम द्वीप पर लगे थे, जिनमें दो रसोइए शामिल थे. इनके खाने की देखरेख करने के लिए दिल्ली से आया हुआ रसोइया तैनात था.

राजीव गांधी की छुट्टियों की तस्वीर. (फोटो-इंडिया टुडे)
राजीव गांधी की छुट्टियों की तस्वीर. (फोटो-इंडिया टुडे)

राजधानी से शराब और वाइन की भी व्यवस्था की गई थी. अगत्ती में 100 मुर्गों का चिकन फॉर्म बनाया गया था. चीनी और ताजी मछलियों के अलावा द्वीप के फल जैसे लक्षद्वीप का पपीता, चीकू, छोटे-छोटे पीले रंग के केले और अमरूद भेजे गए थे. कावारत्ती से बटर और 100 ब्रेड भेजे गए थे. कोचिन से कैडबरी के चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स की 40 क्रेट्स, 300 बोतल मिनरल वाटर, अमूल चीज, काजू, मीठा सोडा, 20 किलो सूजी, 105 किलो बासमती चावल और ताजी सब्जियां भेजी गई थीं. लंबे समय तक खराब न होने वाली चीजों की पहली खेप 23 दिसंबर को शिप से बंगारम के लिए भेजी गई थी. बची हुई चीजें तीन दिन बाद भेजी गईं और 1 जनवरी, 1988 को फिर से चीजें भेजी गईं.

अधिकारियों के मुताबिक प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि वो बिल जमा करें ताकि राजीव गांधी उसको मंजूरी दे सकें. लक्षद्वीप के कलेक्टर केके शर्मा ने कहा था-

”इस वीआईपी छुट्टियों के लिए हमने कोई विशेष व्यवस्था नहीं की थी.”

वजाहत हबीबुल्लाह ने कहा था कि मेरी जिम्मेदारी सिर्फ इतनी थी कि मैं प्रधानमंत्री को बंगारम तक पहुंचा दूं. इसके बाद वो खुद से ही वहां रहना चाहते थे.

पीएम को ले जाने के लिए लगाया गया था आईएनएस विराट

प्रधानमंत्री राजीव गांधी के इस दौरे पर सबसे बड़ा सवाल उठा था देश के सबसे अच्छे लड़ाकू जहाज आईएनएस विराट के इस्तेमाल को लेकर. आईएनएस विराट का इस्तेमाल राजीव गांधी की यात्रा के लिए किया गया था. 10 दिनों तक आईएनएस विराट अरब सागर में रहा था. समंदर में उतरने के बाद विराट का हर रोज का खर्च बहुत ज्यादा था, क्योंकि विराट के साथ कई और भी जहाज चलते थे. एक पनडुब्बी भी लगाए जाने की बात सामने आई थी और रक्षा विशेषज्ञों ने सवाल किए थे कि राजीव गांधी की छुट्टियों के लिए विराट जैसे लड़ाकू जहाज का इस्तेमाल क्यों किया गया. इतना ही नहीं, छुट्टियों के दौरान अगत्ती में स्पेशल सेटेलाइट के लिंक भी लगाने पड़े थे.

इसका सकारात्मक पक्ष भी था. राजीव गांधी के लक्षद्वीप के इस दौरे ने लक्षद्वीप और उसकी खूबसूरती को सुर्खियों में ला दिया. लक्षद्वीप के सांसद पीएम सईद ने कहा-

”अब हम टूरिस्ट्स की भीड़ का इंतजार कर रहे हैं. लक्षद्वीप की पब्लिसिटी हमारे लिए तो अच्छी ही है.”

लक्षद्वीप प्रशासन के कोचिन ऑफिस ने बताया कि 8 जनवरी को टूरिस्टों की ओर से की जाने वाली पूछताछ पिछले दिनों के मुकाबले पांच गुना बढ़ गई थी. हबीबुल्लाह ने कहा कि हम टूरिज्म को उद्योग की तरह बनाना चाहते हैं, जिससे लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था बढ़ सके और पढ़े-लिखे लोगों को रोजगार मिल सके.

6 जनवरी को खत्म हुई थी छुट्टियां

6 जनवरी को राजीव गांधी की छुट्टियां खत्म हुई थीं.
6 जनवरी को राजीव गांधी की छुट्टियां खत्म हुई थीं.

राजीव गांधी की छुट्टियां 6 जनवरी को खत्म हुईं. प्रियंका गांधी इस टीम की पहली सदस्य थीं जो अपने दोस्तों के साथ गोवा चली गईं. उनके बाद विदेशियों का भी ग्रुप निकल गया. अमिताभ बच्चन और उनका परिवार भी उसी दिन निकल गया. 6 जनवरी की दोपहर में 1 बजकर 20 मिनट पर राजीव गांधी राहुल के साथ नेवी के हेलिकॉप्टर में बैठे और अमिनी आईलैंड गए, जहां उनका नए साल यानी कि 1988 का पहला कार्यक्रम था. राहुल को भी आईएनएस विराट पर उतार दिया गया, जिससे वो अपने पिता के साथ मंगलौर जा सकें. सोनिया और उनके रिश्तेदार वहां से निकलने वाले आखिरी लोग थे. सोनिया जब वहां से निकलीं तो काफी खुश थीं, लेकिन जब उनका हेलिकॉप्टर कोचिन में लैंड किया, लोगों की भीड़ की वजह से उनका चेहरा पत्थर की तरह सख्त हो गया.

वहीं राजीव गांधी 6 जनवरी को अमिनी आईलैंड पर लोगों से मिल रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा था-

”ये वंडरफुल हॉलिडे था.”

राजीव जब समंदर से कटाव को कंट्रोल करने वाली जगहों और दूसरे विकास के काम का निरीक्षण कर रहे थे, तो हालात सामान्य थे. अंतर सिर्फ इतना था कि उनके हाथ पर एक विशेष प्रकार की वाटर प्रूफ घड़ी थी, जिसका इस्तेमाल नौका विहार करने और स्कूबा डाइविंग में होता है.


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A holiday of Rajiv Gandhi and use of INS Virat which was published in India Today magazine on 31 December 1988 issue

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