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यूपी पुलिस: 41520 सीटों की वैकेंसी, लेकिन जॉइनिंग सिर्फ '36675' को मिली

अगर आपको 10 लोगों की एक टीम बनानी है तो आप टेस्ट के लिए कितने लोगों को बुलाएंगे?
जाहिर सी बात है कि 10 से ज्यादा लोगों को ताकि उनमें से आप 10 योग्य अभ्यर्थियों को चुन सकें. लेकिन यूपी पुलिस की नियमावली इसके उलट है. यूपी पुलिस सिपाही भर्ती के फाइनल राउंड में उतने ही अभ्यर्थियों को बुलाती है जितने पदों के लिए उसके पास वैकेंसी होती है. इसका नतीजा ये होता है कि फाइनल राउंड में जितने अभ्यर्थी बाहर होते हैं उतनी सीटें भर्ती में खाली रह जाती हैं.

41520 पुलिस भर्ती का नोटिफिकेशन
41520 पुलिस भर्ती का नोटिफिकेशन

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से 14 जनवरी 2018 को 41520 सिपाहियों की भर्ती निकाली गई. इसमें 23520 पद नागरिक पुलिस के लिए और 18000 पद पीएसी के लिए थे. 18 फरवरी 2019 तक मेडिकल टेस्ट के अलावा भर्ती के सारे स्टेज लिखित परीक्षा, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिजिकल टेस्ट पूरे कर लिए गए. जिसमें कुल 55444 अभ्यर्थी सफल हुए. इसके बाद बोर्ड की ओर से अभ्यर्थियों को मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाता है. कुल 41520 अभ्यर्थियों को. यानी कि जितने पदों की वैकेंसी है उतने ही अभ्यर्थियों को मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाता है. चार स्टेज पास करके आए बाकी के 13924 अभ्यर्थियों को सीधे-सीधे भर्ती से बाहर कर दिया जाता है. यह जानते हुए भी कि मेडिकल टेस्ट से भी अभ्यर्थी बाहर होंगे और सीट खाली रह जाएगी. शामली के रहने वाले विपुल मलिक उन अभ्यर्थियों में से एक हैं जो तीन स्टेज पास करने के बाद मेडिकल से पहले भर्ती से बाहर कर दिए गए थे. दी लल्लनटॉप से बात करते हुए विपुल कहते हैं,

मेडिकल के लिए केवल 41520 लोग ही बुलाए गए. इतने ही पदों के लिए वैकेंसी भी थी. इसमें भी 265 के लगभग अभ्यर्थियों का फर्जी सेलेक्शन हो गया था जिसे बोर्ड ने बाद में रद्द कर दिया. लगभग 5292 लड़के मेडिकल में फेल हो गए. बचे 36228 पदों पर ही भर्ती हो पाई. अब हमारी मांग यही है कि फिजिकल, लिखित परीक्षा और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सब पास करने के बाद भी जिन 13924 अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया उन्हें मेडिकल के लिए मौका दिया जाए. ताकि खाली सीटों को भरा जा सके. लेकिन बोर्ड और सरकार दोनों सुनने के लिए तैयार नहीं हैं. कह रहे हैं कि हम इन पदों को कैरी फॉरवर्ड करेंगे. 

कहां से आया 36288 का आंकड़ा?

यह तो पहले से ही तय था कि मेडिकल के बाद सीटें खाली रह जाएंगी. लेकिन कितनी सीटें खाली रह गई हैं इसकी जानकारी मिली आरटीआई और पासिंग आउट परेड से. अभ्यर्थियों का दावा है कि पहले स्टेज में 23520 नागरिक पुलिस आरक्षियों का मेडिकल टेस्ट हुआ. लेकिन ट्रेनिंग के बाद 16 दिसंबर 2019 को पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया केवल 20349 ने. इस तरह पहले स्टेज में 3171 सीट खाली रह गई. इसी तरह दूसरे स्टेज यानी पीएसी के 18000 सीटों पर फिलहाल 15879 रंगरूट ही ट्रेनिंग कर रहे हैं. इस प्रकार पीएसी में भी कुल 2121 सीटें खाली हैं.

RTI में बताया गया कि नागरिक पुलिस के 23520 पदों के सापेक्ष 20525 रंगरूट ट्रेनिंग कर रहे हैं.
RTI में बताया गया कि नागरिक पुलिस के 23520 पदों के सापेक्ष 20525 रंगरूट ट्रेनिंग कर रहे हैं.

हालांकि RTI से मिली जानकारी के अनुसार नागरिक पुलिस के 20525 और पीएसी के 16150 रंगरूट ट्रेनिंग कर रहे हैं. इसमें मृतक आश्रित कोटे के अभ्यर्थी भी शामिल हैं. उरई जालौन के रहने वाले सौरभ चौरसिया बताते हैं,

मेडिकल टेस्ट के लिए जो 41520 की लिस्ट जारी की गई थी उसमें इतनी खामियां इतनी गलतियां थी कि आपको बता भी नहीं सकते. इसमें होमगार्ड भी अंदर कर दिए. ओवरएज भी अंदर कर दिए. जिनकी योग्यता नहीं थी उन्हें भी ले लिया. हालांकि बाद में इन सबको हटा दिया गया. इससे भी सीटें खाली हुईं. इसके अलावा मेडिकल में जो बाहर हुए उनकी भी सीट खाली रह गई. मेडिकल टेस्ट के बाद हर सेंटर पर पास होने वालों की लिस्ट लगती थी. हमने हर सेंटर से डेटा कलेक्ट किया. इसके बाद RTI लगाई तो पता चला कि 36288 अभ्यर्थियों के आसपास बोर्ड ने ट्रेनिंग कराई है. बोर्ड ने कभी ये बात अपनी तरफ से स्वीकार नहीं किया लेकिन हमने आरटीआई, पासिंग आउट परेड और मेडिकल टेस्ट के बाद लगने वाली लिस्ट से जो डेटा निकाला है वो इस बात को सिद्ध कर सकता है कि अभी भी 5200 के आसपास वैकेंसी खाली पड़ी है.

मेरिट डाउन कर बाकी सीटों को क्यों नहीं भरा गया?

सामान्यत: सरकारी भर्तियों में जितनी सीटें होती हैं उससे सवा गुना या फिर फिर डेढ़ गुना अभ्यर्थियों को फाइनल स्टेज के लिए बुलाया जाता है. ताकि फाइनल राउंड में बाहर होने वालों की जगह अतिरिक्त अभ्यर्थियों को मौका दिया जा सके. अगर फिर भी सीटें खाली रह जाती हैं तो मेरिट डाउन किया जाता है या फिर वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों को बुलाया जाता है. लेकिन 2015 में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक नई नियमावली बनाई गई. इस नियमावली में ऐसा प्रावधान किया गया कि जितनी सीटों के लिए वैकेंसी है उतने ही अभ्यर्थियों को मेडिकल के लिए बुलाया जाएगा. कोई वेटिंग लिस्ट नहीं बनाई जाएगी.

यूपी सरकार द्वारा 2015 में लाए गए नियमावली में किसी वेटिंग लिस्ट के न होने की बात कही गई.
यूपी सरकार द्वारा 2015 में लाए गए नियमावली में किसी वेटिंग लिस्ट के न होने की बात कही गई.

पुलिस भर्ती बोर्ड ने इसी नियमावली के आधार पर भर्ती की है. लेकिन अभ्यर्थियों का सवाल है कि नियमावली में ये प्रावधान लाया ही क्यों गया? 2015 में नियमावली आने के बाद 34716 पदों के लिए सिपाही भर्ती आई. इस भर्ती में भी 3528 सीट खाली रह गईं. मामला अभी हाईकोर्ट में है. विपुल बताते हैं,

2015 में अखिलेश यादव की सरकार ने नई नियमावली बनाई थी. 2015 की भर्ती भी अभी तक कोर्ट में ही है. 4 मार्च को उस मामले में हाईकोर्ट ने खाली सीटों को कैरी फॉरवर्ड करने पर रोक लगा दी. कैरी फॉरवर्ड यानी कि जो सीट खाली रह गई है उसे अगली भर्ती जो भी, जितने समय बाद आएगी उसमें जोड़ दिया जाएगा. हम भी हाईकोर्ट गए और हमारा मामला भी 2015 वालों के साथ ही अटैच है.

क्या चाहते हैं छात्र?
41520 पदों के लिए भर्ती निकाली गई. सरकार का दावा है कि भर्ती पूरी भी हो गई. अभ्यर्थियों का दावा है कि 5292 सीटें खाली रह गईं. अब अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाए और सीटों को भरा जाए. लेकिन बोर्ड नियमावली का हवाला देते हुए कहता है कि ऐसा संभव नहीं है. खाली सीटों को कैरी फॉरवर्ड किया जाएगा. अब सवाल ये है कि उन अभ्यर्थियों का क्या होगा जो कड़ी मेहनत से तीन-चार स्टेज पास करके मेडिकल तक पहुंचे थे. उन्हें मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए? अभ्यर्थियों का दावा है कि कई तो ऐसे हैं जो मेरिट से 0.5 या 0.2 नंबर कम होने की वजह से मेडिकल टेस्ट में भाग नहीं ले पाए. सौरभ बताते हैं,

हमारे साथ अन्याय हुआ है. हम ओवरएज हो रहे हैं. सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की उम्र-सीमा 18-22 साल की थी. हमारे साथ के कितने ही ऐसे लोग हैं जिनकी ये पहली और आखिरी वैकेंसी है. हम लिखित परीक्षा में 75-75 नंबर लेकर बैठे हैं. हम पॉइंट्स में नंबर कम होने की वजह से बाहर हो गए और आप कह रहे हैं कि योग्यता नहीं है. हमने परीक्षा पास की, दौड़ भी निकाला, डॉक्यूमेंट्स भी सही है हमारे, फिर भी सीट खाली होने के बावजूद आप हमें नहीं सेलेक्ट कर रहे हैं. जबकि हमारे नंबर कुछ पॉइंट्स में ही कम हैं. मैं स्वयं .5 नंबर से बाहर हुआ था.

बोर्ड का क्या कहना है?

खाली सीटों को भरने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन किया. लखनऊ में मुख्यमंत्री दरबार में भी गए. भर्ती बोर्ड के पास भी लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. विपुल कहते हैं,

सबसे पहले हम भर्ती बोर्ड गए. भर्ती बोर्ड के चेयरमैन ने हमसे कहा कि तुम्हारे पास दो रास्ते हैं. या तो मुख्यमंत्री या फिर कोर्ट. इन्हीं दोनों के आदेश पर ही हम सीटों को भर सकते हैं. अन्यथा हमें जो नियम मिला है हम उसी के आधार पर भर्ती करेंगे. मुख्यमंत्री दरबार में दो बार गए. उनसे मुलाकात हुई नहीं. वहां जो अधिकारी रहते हैं उन्होंने दोनों बार पुलिस मुख्यालय को लेटर लिख दिया लेकिन कोई जवाब नहीं आया. दो बार सुरेश राणा के पास गया. हमारे ही जनपद शामली से हैं कैबिनेट मंत्री हैं. दोनों बार बस आश्वासन ही मिला.

खाली सीटों को भरने के लिए अभ्यर्थी लगातार सोशल मीडिया पर कैम्पेन चला रहे हैं. इससे पहले धरना प्रदर्शन कर चुके हैं. कोर्ट में केस लड़ रहे हैं. लेकिन इन सबके बावजूद सरकार की ओर से कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जा रहा है कि जिससे योग्य अभ्यर्थियों को खाली सीटों पर मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जा सके. हमने पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. अगर जवाब आता है तो हम आगे अपडेट कर देंगे.


रंगरूट. दी लल्लनटॉप की एक नई पहल. जहां पर बात होगी नौजवानों की. उनकी पढ़ाई लिखाई और कॉलेज यूनिवर्सिटी कैंपस से जुड़े मुद्दों की. हम बात करेंगे नौकरियों, प्लेसमेंट और करियर की. अगर आपके पास भी ऐसा कोई मुद्दा है तो उसे भेजिए हमारे पास. हमारा पता है YUVA.LALLANTOP@GMAIL.COM.


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