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पाकिस्तान के यूसुफ का पंजाब की राजविंदर से इश्क वैलेंटाइंस डे की बदौलत नहीं था

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Poonam
पूनम

पूनम ऑल इंडिया रेडियो के जालंधर स्टेशन में अनाउन्सर हैं. और इनके पास रेडियो से जुड़े किस्सों का पूरा संसार है. आज रेडियो दिवस या रेडियो डे के अवसर पर अपने पिटारे से सुना रही हैं ऐसे ही तीन किस्से. पढ़िए. दी लल्लनटॉप रेडियो होता तो कहते – मीडियम वेल अमुक आशारिय अमुक यानी अमुक किलोहर्त्ज़ पर ये आकाशवाणी का दी लल्लनटॉप केंद्र है. आइये सुनते हैं तीन किस्से:


रेडियो डे, दास्तान # 1

मैं तैनूं फिर मिलांगी

अमृता प्रीतम बंटवारे से पहले लाहौर रेडियो स्टेशन में अनाउन्सर थीं. तब वो साईकल से रेडियो में प्रोग्राम पेश करने आया-जाया करती थीं.

वो अपनी एक किताब में बताती हैं कि वहां, यानी लाहौर रेडियो स्टेशन में एक ड्यूटी ऑफिसर किसी अनाउन्सर को पसंद करता था. ड्यूटी ऑफिसर ने बड़ी कोशिश की कि लड़की मान जाए. एक दिन वो ड्यूटी ऑफिसर अनाउन्सर के स्टूडियो में आया और उसने कहा कि – ‘मैं तुमसे आज फिर जवाब मांगने आया हूं. अगर तुम्हारा जवाब हां में तो तुम चुप कर जाना.’

और इतना कहते ही उसने अनाउन्सर का माइक ऑन कर दिया.

अनाउन्सर न चाहते हुए भी हंस पड़ी और इस तरह से ये प्यार परवान चढ़ा.

अमृता प्रीतम - रेडियो लाहौर
अमृता प्रीतम – रेडियो लाहौर

रेडियो डे, दास्तान # 2

दुनिया सुनेगी अब ये आकाशवाणी 

एक बार हिमाचल में बाढ़ आने वाली थी और तब रेडियो के अलावा जानकारी प्राप्त करने/देने का कोई और साधन नहीं था.

सुबह का समय था और आर्मी ने आकशवाणी को एक इमरजेंसी के बारे में अनाउन्स करने के लिए कहा. इमरजेंसी ये कि लोगों को गांव ज़ल्द से ज़ल्द खाली करने के लिए कहा जाए क्यूंकि बाढ़ आने वाली थी.

लेकिन सुबह 10 बजे की सभा समाप्त हो चुकी थी. अब सभा दोबारा शुरू करना संभव न था. और शुरू करके भी क्या ही हो जाना था? सबने तो रेडियो बंद ही कर दिया होगा.

बहरहाल, जब बाढ़ के बाद स्थिति थोड़ी सामान्य हुई तो आर्मी ने रेसक्यू ऑपरेशन शुरू किया और देखा कि हर तरफ सब सुरक्षित था, गांव खाली हो चुके थे.

आर्मी ने पता किया तो पता चला कि आकशवाणी ने एनीवे सभा दोबारा शुरू कर दी थी… इस एक खास अनाउंसमेंट के लिए… और तब वहां सिर्फ एक किसान था जो काम करते-करते रेडियो बंद करना भूल गया था. उसने सभा खत्म होने के बाद भी रेडियो की शांss… शांss… की आवाज़ भी चलने दी. सो गया होगा शायद, वरना उस वक्त रेडियो के सेल हर कोई बचाना चाहता था.

खैर, शांss… शांss… की आवाज़ के बाद एक सूचना प्रसारित हुई जिसमें बाढ़ की वजह से गांव खाली करने को कहा गया था. बस उसी एक किसान ने इस सूचना को सुना और बाकियों को आगाह किया, जिस वजह से तबाही होने से बच गई.

Love is on the air
Love is on the air

रेडियो डे, दास्तान # 3

ये सुर बुलाते हैं जब तुम इधर नहीं आते.

जालंधर रेडियो में रेडियो डे के ठीक दो महीने बाद यानी 13 अप्रैल 1969 से हिंदुस्तान-पाकिस्तान को ध्यान में रखकर एक खास प्रोग्राम शुरू किया गया. इस प्रोग्राम को पाकिस्तान में भी बहुत पसंद किया गया था. इसकी चाहत का आलम ये था कि इधर से कुछ कहा जाता उधर से जवाब आता. टोकरियां भर भर कर पाकिस्तान से चिट्ठियां आतीं.

उसी प्रोग्राम के माध्यम से पाकिस्तान के एक लड़के, यूसुफ रज़ा और पंजाब की लड़की, राजविंदर कौर का लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशन परवान चढ़ा.

वो एक दूसरे को चिट्ठियां लिखते और यूं प्यार इतना बढ़ गया कि दोनों ने सरहद पार से दूर एक दूसरे से जुड़ने का फैसला किया. अपने परिवार के खिलाफ जाकर दोनों ने शादी करने का फैसला लिया और फिर आखिर ये बात दोनों मुल्कों के वज़ीरों तक ये बात पहुच गई.

सरकारों ने भी साथ देने का ऐलान किया और आखिर दोनों की शादी हो गई. आखिरी बार वो पाकिस्तान जाते हुए जालंधर रेडियो स्टेशन को माथा टेक कर गए. इस तरह इस प्रोग्राम ने, जिसका नाम है देस पंजाब और जो अब भी ब्रॉडकास्ट हो रहा है, हिंदुस्तान पाकिस्तान को उसकी जनता को प्रेम में बांधने का सफल प्रयास किया.


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