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क्यों 2018 के Oscars की सबसे बड़ी फिल्म है 'द शेप ऑफ वॉटर'

'ऑस्कर वाली फ़िल्में' - सीरीज़ में पहली फिल्म है राइटर-डायरेक्टर गुएर्मो डेल टोरो की The Shape of Water.

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“जब वो मुझे देखता है, और जैसे वो मुझे देखता है, तब वो नहीं जानता कि मुझमें क्या कमी है. कि कैसे मैं अधूरी हूं. वो मुझे वैसे ही देखता है जैसी मैं हूं, जो मैं हूं. वो मुझे देखकर खुश होता है. हर बार. हर रोज़. अब या तो मैं उसे बचा सकती हूं या उसे मरने दे सकती हूं.”

– एलाइज़ा, 1962 के बाल्टीमोर (अमेरिका) में एक गोपनीय सरकारी प्रयोगशाला में पोछा-झाड़ू करने वाली महिला जो बचपन से बोल नहीं सकती. इस लैब में पुरुष की आकृति वाला एक अनजान जलीय प्राणी है जिससे उसका प्यार और स्नेह का धागा जुड़ गया है. एक अदनी, सामान्य औरत होने के बावजूद वो एक खतरनाक एजेंट की नाक के नीचे से इस जीव को छुड़ा ले जाना चाहती है, इससे पहले कि उसे मार दिया जाएगा. उसके बारे में अपने भाव एलाइज़ा अपने अधेड़-समलैंगिक पड़ोसी जाइल्स को बता रही है जो संसार में उसके दो सबसे करीबी लोगों में से एक है.

2018 में हम वैश्विक और स्थानीय दोनों स्तरों पर, जिन हानिकारक राजनैतिक और सामाजिक स्थितियों के बीच बैठे हैं, उनमें ज्यादातर को संबोधित करने वाली कोई एक फिल्म अगर है तो वो है – ‘द शेप ऑफ वॉटर’. सबसे मोटे तौर पर जिस स्थिति को ये संबोधित करती है वो है – किसी दूसरी पहचान/अस्तित्व वाले से हम जैसे डर रहे हैं और नफरत कर रहे हैं. ये सब जगह हो रहा है. सबसे ऊपर से शुरू कर सकते हैं. अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी नीतियों और दुष्प्रचार के जरिए ये माहौल बना दिया कि बड़ी संख्या में वाइट अमेरिकी नागरिक दूसरी पहचान वाले लोगों को लेकर असुरक्षा पाले हैं. जैसे, मुसलमानों से – छह मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के अमेरिका आने पर बैन लगा दिया गया है; मैक्सिकन लोगों से – बॉर्डर पर दीवार बनाई जा रही है ताकि मैक्सिकन लोग अमेरिका न आ सकें (इस फिल्म के डायरेक्टर गुएर्मो भी मैक्सिकन हैं); भारतीयों से – अमेरिका में एच-1बी वीज़ा नियमों में बदलाव कर दिया गया है जिसका प्रतिकूल प्रभाव यूएस में काम करने वाले करीब 5 लाख भारतीयों पर पड़ेगा; अफ्रीकी-अमेरिकियों से – ट्रंप white supremacy की पॉलिटिक्स कर रहे हैं, उन्होंने अपनी सरकार में अश्वेतों का प्रतिनिधित्व न के बराबर रखा है. उन्होंने विविधता के मूल्य का पालन नहीं किया. ब्लैक स्पोर्ट्स सेलेब्रिटीज़ पर वे लगातार ज़बानी हमले बोलते रहे हैं.

ट्रंप-ऑक्टोपस कार्टून जो राष्ट्रपति ट्रंप की सब बुरी नीतियां दिखाता है. (फोटोः Reappropriate)
ट्रंप-ऑक्टोपस कार्टून जो राष्ट्रपति ट्रंप की सब बुरी नीतियां दिखाता है. (फोटोः Reappropriate)

फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे उदारवादी-आधुनिक देशों में हाल में उग्र-दक्षिणपंथी राजनीतिक दल मजबूत हुए हैं और वहां मुसलमानों या विपरीत पहचान वाले (शरणार्थी/प्रवासी) लोगों के प्रति भय/फोबिया फैलाया जा रहा है. भारत में मुसलमानों का शुद्धिकरण चल रहा है. उन पर चौतरफा हमले हैं. गाय के नाम पर या राम के नाम पर बहुसंख्यक हिंदुओं को ब्रेनवॉश किया जा रहा है और वे अपनी पहचान को लेकर ज्यादा आक्रामक और अतार्किक हो रहे हैं. जातियों के आधार पर फेसबुक पर ज्यादा से ज्यादा पेज बन रहे हैं. उन पेजों में हिंसक, अमर्यादित और घृणित बातें दूसरी पहचान वाले लोगों के लिए लिखी जा रही है. झूठ, नफऱत, डर औऱ भ्रम फैलाया जा रहा है. अब भारत के लोग अनगिनत टुकड़ों में बंट गए हैं.

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इस फिल्म के राइटर-डायरेक्टर गुएर्मो डेल टोरो अभी के दौर की इसी संकटपूर्ण स्थिति में लोगों का उपचार करने वाली कहानी लाए हैं. वे कह चुके हैं कि राजनीतिक और मानवीय तौर पर एक आपातकालीन जरूरत है कि हम – दूसरों को देख सकें, उनके अंदर की खूबसूरती और दैवीयता को देख सकें, बजाय इसके कि हम उनसे डरें और उनसे नफरत करें.

गुएर्मो डेल टोरो कहते हैं कि बिना मॉन्सटर्स/डरावने जीवों के वे कभी कोई कहानी नहीं कह सकते.
गुएर्मो डेल टोरो कहते हैं कि बिना मॉन्सटर्स/डरावने जीवों के वे कभी कोई कहानी नहीं कह सकते.

‘द शेप ऑफ वॉटर’ यही करती है. ये कहानी 60 के दशक के अमेरिका की है. रूस से उसका शीतयुद्ध चल रहा है. इसी दौर में एलाइज़ा (सैली हॉकिन्स) नाम की महिला है. एक सिनेमाघर के ऊपर बने घर में रहती है. बोल नहीं सकती. उसका कोई परिवार नहीं है. सिर्फ दो ही लोग हैं जो उसकी दुनिया है. सामने के फ्लैट में रहने वाला जाइल्स (रिचर्ड जेनकिन्स) जो बूढ़ा हो रहा है. असफल आर्टिस्ट है. पेंटिंग्स बनाता है. दूसरी है उसके साथ गोपनीय सरकारी प्रयोगशाला में सफाई का काम करने वाली ज़ेल्डा (ऑक्टेविया स्पेंसर). कहानी में सब अलग-अलग identity वाले इंसान हैं. ऐसी पहचानों वाले जिन्हें सदियों तक उत्पीड़ित किया गया, मारा गया. ज़ेल्डा अश्वेत है, वही नस्ल जिसे जानवर समझा जाता था, ग़ुलाम बनाकर खरीदा-बेचा जाता था, जिसे आज तक अमेरिका में बराबरी नहीं मिली है. जाइल्स समलैंगिक है, वो यौन उन्मुखता जिसके लिए लोगों को सरेआम फांसी दी जाती थी, चौराहे पर पत्थरों से मारा जाता था और आज भी अलग यौन उन्मुखता को लेकर समाज सामान्य नहीं हुआ है. कहानी में एक जगह जाइल्स के साथ ऐसा होता भी है. एलाइज़ा गूंगी है, सफाईकर्मी है, वो पहचान जिसे समाज सम्मान की नजर से नहीं देखता, वो शारीरिक स्थिति जिसके कारण आपको वर नहीं मिलते, प्रेमी नहीं मिलते, जिसे एक शारीरिक कमी माना जाता है.

जाइल्स और एलाइज़ा की भूमिकाओं में रिचर्ड जेनकिन्स और सैली हॉकिन्स.
जाइल्स और एलाइज़ा की भूमिकाओं में रिचर्ड जेनकिन्स और सैली हॉकिन्स.

लेकिन इस कहानी में विपरीत पहचान वाले लोग एक-दूसरे से प्यार करते हैं, एक-दूसरे का सहारा हैं. कहानी में दो और ऐसे पात्र हैं. एक है डॉक्टर हॉफस्टेटलर (माइकल स्टूलबर्ग) जो इस प्रयोगशाला में साइंटिस्ट हैं लेकिन असल में एक रूसी जासूस हैं. लेकिन शीतयुद्ध के राष्ट्रवाद वाले दौर में भी अमेरिकी एलाइज़ा और इस रूसी जासूस में जो संपर्क होता है वो सामान्य होता है. दोनों मिलकर कहानी के पांचवें अलग पहचान वाले पात्र को बचाने में लगे हैं. ये पांचवां पात्र है इंसान जैसे शरीर वाला एक जलीय प्राणी. इसे एक दक्षिण अमेरिकी नदी से एक आर्मी ऑफिसर (माइकल शैनन) ने पकड़ा और बंदी बना लिया. कहा जाता है कि वो उस नदी के किनारे बसे कबीलों का देवता है. इस जीव (डग जोन्स) को इस प्रयोगशाला में टॉर्चर किया जाता है. लेकिन एलाइज़ा और उसका विशेष रिश्ता बनता है. डॉ. हॉफस्टेटलर भी एक मोड़ पर अपने रूसी जासूस होने से ज्यादा, वैज्ञानिक होने की पहचान को ऊपर रखते हैं, और इस जीव के भिन्न होने को दिव्यता, प्रेम और जिज्ञासा से देखते हैं.

दो अलग नस्लों, पहचानों वाली मौजूदगियों के बीच प्रेम.
दो अलग नस्लों, पहचानों वाली मौजूदगियों के बीच प्रेम.

प्रशंसित वेब सीरीज ‘मास्टर ऑफ नन’ के राइटर-एक्टर अजीज़ अंसारी पर एक युवती ने आरोप लगाया है कि पिछले सितंबर में दोनों डेट पर गए थे जिसके बाद इच्छा न होते हुए भी उन्हें अजीज़ के साथ यौन क्रिया में हिस्सा लेना पड़ा और वे इससे बहुत दुखी हैं. अजीज़ ने उनके पर्सनल मैसेज का जवाब देते हुए कहा कि यौन क्रिया सहमति से हुई थी, फिर भी वे माफी चाहते हैं अगर स्थिति को सही से नहीं पढ़ पाए. ऐसे मामले लगातार आ रहे हैं. दिख रहा है कि स्त्री और सेक्स को लेकर सहजता पहली पंक्ति के बुद्धिजीवियों में भी नहीं आ पाई है. ये एक बड़ी चुनौती है. इस सहजता को भी ‘द शेप ऑफ वॉटर’ में देखा जा सकता है. एलाइज़ा का चाहे उस जलीय प्राणी से शारीरिक संबंध हो या अपने पड़ोसी जाइल्स से सेक्स पर बातें, ये सब पारस्परिक रूप से सहज होता है. एक-दूसरे के शरीर को लेकर या यौनिकता को लेकर कोई कुंठा नहीं है, कोई objectification नहीं है. इसी वजह से इस विषय पर बातें और सेक्सुअल एक्ट, यहां नेचुरल है. एलाइज़ा रोज़ सुबह नहाने से पहले मास्टरबेट करती है. इस दृश्य में वो निर्वस्त्र दिखती हैं लेकिन उन्हें यहां ऐसे प्रस्तुत किया गया है कि वो ललचाने वाला नहीं लगता.

जो राजनीतिक-मानवीय समझदारियां इस फिल्म में दी गई हैं, वो सिनेमाई कलात्मकता बरतते हुए दी गई हैं. मूल रूप से गुएर्मो ऐसे डायरेक्टर नहीं हैं जो सामाजिक संदेश देने वाली फिल्में बनाते हों. वे एक बच्चे की तरह हैं. परी कथाओं, भूतों, राक्षसों और रहस्यभरी कहानियों में उनकी दिलचस्पी रही है. वो बच्चे थे तब दादी के घर के गेस्ट रूम में उन्हें आधी रात को दिखता था कि एक बकरी जैसे मुंह और पैर वाला आदमी अंधेरे से निकलते हुए उनकी तरफ बढ़ रहा है. इसके बाद वो चीख पड़ते थे.

गुएर्मो, अपने बनाए एक मॉन्सटर के साथ.
गुएर्मो, अपने बनाए एक मॉन्सटर के साथ.

बाद में वो ऐसी ही कहानियों के होकर रह गए. इस तरह की बालमन को सम्मोहित करने वाली कहानियां कहने की वजह से कोई सोच सकता है कि वे कोई टैरेंस मलिक या स्टैनली कुबरिक या ऑलिवर स्टोन नहीं हैं लेकिन ऐसा नहीं है. उनका विश्व-दर्शन बहुत मैच्योर है. और उनका मन बच्चे की तरह निर्मल-निर्दोष है. वे 25 बरस से फिल्में (क्रोनोस, ब्लेड-2, हैलबॉय, हैलबॉय-2 द गोल्डन आर्मी, पैसिफिक रिम, क्रिमसन पीक) बना रहे हैं लेकिन आज भी नर्वस होते हैं. रोते हैं. हंसमुख हैं लेकिन ‘द शेप ऑफ वॉटर’ की मेकिंग के हर एक दिन भारी तनाव और कष्ट से गुजरे.

गुएर्मो मैक्सिको की उस डायरेक्टर तिकड़ी में से एक हैं जिसने अमेरिकी फिल्म उद्योग में मजबूत जगह बनाई. ये तिकड़ी है उनकी, एल्फांज़ो क्यूरॉन और आलेहांद्रो गोंजालेज इनारितू की. तीनों दोस्त हैं. शुरू से. भाइयों जैसे हैं. तीनों अपनी-अपनी फिल्में जब लिख रहे होते हैं तो एक-दूसरे को पढ़ने के लिए देते हैं. फिल्म लंबी हो गई हो और कटवानी हो तो दूसरे को बुलाते हैं कि तुम काटो. एक-दूसरे की फिल्मों पर इनका भी पूरा अधिकार होता है. फिल्म फेस्टिवल में दूसरे की फिल्म जा रही होती है तो अपनी रोक लेते हैं ताकि उसकी फिल्म जीत जाए. ‘इ तू मामा तांबियान’ और ‘चिल्ड्रेन ऑफ मेन’ जैसी ताकतवर फिल्में बनाने वाले एल्फांजो की फिल्म ‘ग्रैविटी’ ने 2014 में बेस्ट डायरेक्टर समेत सात ऑस्कर जीते थे. फिर इनारितू ने ‘बर्डमैन’ और ‘द रेवनेंट’ के लिए 2015 और 2016 में लगातार बेस्ट पिक्चर और बेस्ट डायरेक्टर के ऑस्कर जीते. ये अवॉर्ड जीतने में गुएर्मो ही रहे हुए थे और अब मार्च में ‘द शेप ऑफ वॉटर’ के साथ जीतने की बारी उनकी है.

गुएर्मो, इऩारितू और एलफांजो क्यूरॉन. उनके साथ दिख रहे हैं इमैनुएल लुबेज़्की जो सिनेमैटोग्राफर हैं और इनारितू व एलफांजो की फिल्मों का छायांकन करते हैं. लुबेज़्की ने इन्हीं दोनों की फिल्मों का छायांकन करते हुए तीन साल लगातार बेस्ट सिनेमैटोग्राफी (ग्रैविटी 2013, बर्डमैन 2014, द रेवनेंट 2015) का रिकॉर्ड बनाया था.
गुएर्मो, इऩारितू और एलफांजो क्यूरॉन. उनके साथ दिख रहे हैं इमैनुएल लुबेज़्की जो सिनेमैटोग्राफर हैं. लुबेज़्की ने इनारितू और एलफांजो़ की  फिल्मों का छायांकन करते हुए तीन साल लगातार बेस्ट सिनेमैटोग्राफी (ग्रैविटी, बर्डमैन, द रेवनेंट) के ऑस्कर जीतने का रिकॉर्ड बनाया था.

हाल ही में इस फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड जीतने के बाद गुएर्मो ने भावुक होते हुए जो स्पीच दी थी वो उनके मस्तिष्क में और सिनेमा के पीछे उनके विचारों की सुखद झलक देती है. उन्होंने जो कहा वो लगातार कानों में गूंजता रहता है,

“ बचपन से ही मैं monsters / राक्षसों के प्रति वफादार रहा हूं. मैं उनके द्वारा बचाया गया हूं. उन्होंने मुझे मुक्ति दिलाई है. क्योंकि मैं मानता हूं मॉन्स्टर्स हमारी परमसुख देने वाली अपूर्णता के रखवाले संत हैं. और वे असफल होने और जीने की संभावना की अनुमति देते हैं और अपने में समाहित रखते हैं. 25 बरस तक मैंने मोशन, कलर, लाइट और परछाइयों से बनी छोटी-छोटी विचित्र कथाएं कही हैं. और इनमें से तीन मौकों पर इन विचित्र छोटी कथाओं ने मेरी जिंदगी बचाई है. एक बार ‘द डेविल्स बैकबोन’ (2001) ने, दूसरी बार ‘पैन्स लैबरिंथ’ (2006) ने और अब ‘द शेप ऑफ वॉटर’ ने. क्योंकि निर्देशकों के तौर पर ये चीजें सिर्फ हमारी फिल्मोग्राफी में लिखी एंट्रीज़ मात्र नहीं हैं, बल्कि हमने एक विशेष प्रकार के असंतुष्ट शैतान के साथ सौदा कर लिया है जो हमारी जिंदगी के तीन वर्षों के बदले आईएमडीबी पर एक एंट्री देने का व्यापार करता है. और ये चीजें हमारी जीवनियां हैं. हमारी जिंदगी है.”


ऑस्कर 2018 में ‘द शेप ऑफ वॉटर’:
कुल 13 नामांकन मिले, चार में विजेता रही.

बेस्ट पिक्चर – गुएर्मो डेल टोरो, जे. माइल्स डेल (विजेता) 
बेस्ट डायरेक्टर – गुएर्मो डेल टोरो  (विजेता)
बेस्ट एक्ट्रेस – सैली हॉकिन्स
सपोर्टिंग एक्टर – रिचर्ड जेनकिन्स
सपोर्टिंग एक्ट्रेस – ऑक्टेविया स्पेंसर
राइटिंग (ओरिजिनल स्क्रीनप्ले) – गुएर्मो डेल टोरो, वैनेसा टेलर
सिनेमैटोग्राफी – डैन लाउस्टसन
फिल्म एडिटिंग – सिडनी वॉलिन्स्की
कॉस्ट्यूम डिजाइन – लुई सिक्वेरा
म्यूजिक (ओरिजिनल स्कोर) – एलेग्जांद्र दूप्ले (विजेता)
प्रोडक्शन डिजाइन – पॉल डेनहम ऑस्टरबेरी; सेट डेकोरेशन – शेन विएऊ, जैफ्री ए. मैल्विन (विजेता)
साउंड मिक्सिंग – क्रिश्चियन कुक, ब्रैड ज़ोर्न, ग्लेन गौथियर
साउंड एडिटिंग – नैथन रॉबिटेल, नेल्सन फरेरा

सीरीज़ की अन्य फिल्मों के बारे में पढ़ें:

The Post – आज के डरे हुए मीडिया के लिए एक बड़ी urgent फिल्म
Call My By Your Name – वो आनंदभरा स्थान जहां दो पुरुषों के प्रेम में कोई बाधा नहीं
The Shape Of Water – क्यों 2018 के Oscars की ये सबसे बड़ी फिल्म है
Get Out – शॉकिंग, विषैली और भयानक फिल्म जो बहुत सही समय पर आई है
Dunkirk – वो वॉर मूवी जिसमें आम लोग युद्ध से बचाकर अपने सैनिकों को घर लाते हैं
Lady Bird – क्यों इस अवॉर्ड सीज़न में इस नन्ही सी फिल्म की दीवानगी है?
Three Billboards Outside Ebbing, Missouri – दुनिया को गांधीगिरी का नया आइडिया देने वाली फिल्म
Darkest Hour – गैरी ओल्डमैन के विशिष्ट अभिनय ने इसे 2018 ऑस्कर में बुलंद फिल्म बनाया

(Award tally edited post the Oscar ceremony on March 5, 2018.)
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