Submit your post

Follow Us

अमरूद दिखाकर आतंकियों ने प्लेन हाइजैक किया और लाहौर ले गए

आज 27 अगस्त है और आज की तारीख़ का संबंध है एक प्लेन हाइजैकिंग से.

गुलज़ार साहब का लिखा एक गीत है जिसे ‘अमन की आशा’ एल्बम में ‘शंकर महादेवन’ ने गाया है. ‘अमन की आशा’ भारत और पाकिस्तानी गायकों का एकजुट प्रयास है, जिससे दोनों देशों के बीच अमन और चैन की बात हो सके. गुलज़ार जो खुद बंटवारे के हादसे से गुजरे हैं, उन्होंने भारत और पाकिस्तान को सोचकर कुछ यूं लिखा,

‘पतंग उड़ाएं छतों पे चढ़के मोहल्ले वाले
फलक तो सांझा है उसमें पेचें लड़ाए कोई
उठो कबड्डी-कबड्डी खेलेंगे सरहदों पर
जो आए अब के तो लौटकर फिर ना जाए कोई’

भारत और पाकिस्तान का रिश्ता तो जगज़ाहिर है. लेकिन एक किस्सा है, जो भारत और पाकिस्तान के सहयोग की एक अनूठी मिसाल है. एक दिन ऐसा भी आया था, जब भारत और पाकिस्तान ने मिलकर काम किया और सैकड़ों लोगों की जान बच गई थी.

पहले शुरुआत आज की तारीख़ से.

2018 में आज ही के दिन यानी 27 अगस्त को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक फ़ैसला सुनाया. मामला था 1981 में हुए प्लेन हाइजैकिंग का. फ़ैसले के अनुसार, सबूतों के अभाव में इस केस के दो अभियुक्तों को बरी कर दिया गया.

क्या था पूरा मामला? 

पंजाब का जालंधर ज़िला. यहां मॉडल टाउन इलाक़े में एक गुरुद्वारा है. गुरुद्वारे के बाहर तज़िंदर पाल सिंह की एक छोटी सी दुकान है, जिसमें वो कड़े, किताबें और ताबीज़ बेचते हैं. 68 साल की उम्र के तजिंदर सिंह को देखकर कोई नहीं कह सकता कि कभी इन्होंने एक प्लेन हाइजैक किया होगा.

Untitled Design (3)
लाहौर पहुंचते ही प्लेन को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने चारों तरफ़ से घेर लिया (सांकेतिक तस्वीर)

तज़िंदर की कहानी शुरू होती है, 7 सितम्बर 1981 से. तज़िंदर की उम्र तब 29 साल थी. शादी हो चुकी थी और कुछ ही दिन पहले तज़िंदर के घर एक बेटा भी पैदा हुआ था. कुल मिलाकर ज़िंदगी में सब कुछ बढ़िया चल रहा था. रोज़गार के लिए तज़िंदर ने जालंधर के इसी मॉडल टाउन इलाक़े में किताबों की एक दुकान खोली. दुकान खोलने के अवसर पर एक उद्घाटन समारोह भी रखा गया. आसपास के लोग तज़िंदर की दुकान पर आए. चाय नाश्ते का इंतज़ाम तो था ही. साथ में बड़े चाव से तज़िंदर लोगों को अपनी दुकान का सामान दिखा रहे थे.

इतने में एक आदमी आया और उसने चुपके से तज़िंदर के कान में कुछ कहा. अचानक तज़िंदर के चेहरे की मुस्कुराहट ग़ायब हो गई. उन्होंने लोगों से बाहर जाने को कहा. दुकान में ताला लगाया और वहां से ग़ायब हो गए. ग़ायब भी ऐसे हुए कि 35 साल तक वापस ना लौटे.

अमृतसर से लाहौर 

इसके ठीक 12 दिन बाद यानी 29 सितम्बर को तज़िंदर अमृतसर के एयरपोर्ट पर दिखाई दिए. वो और उनके 4 साथी, सतनाम सिंह, गजेंद्र सिंह, करन सिंह और जसबीर सिंह चीमा एक फ़्लाइट का इंतज़ार कर रहे थे. फ़्लाइट IC 423 जो अमृतसर से श्रीनगर जाती थी. पिछले एक हफ़्ते में ये पांचों इसी रूट पर तीसरी बार जा रहे थे. फ़्लाइट में कौन कहां है, इसका पूरा अंदाज़ा इन्हें हो चुका था. जैसे ही फ़्लाइट ने टेक ऑफ़ किया, गजेंद्र और जसबीर अपनी सीट से उठ गए. इसके बाद ये दोनों जाकर कॉकपिट के नज़दीकी टॉयलेट के बाहर खड़े हो गए. जैसे ही एयर होस्टेस पायलट को चाय देने के लिए कॉकपिट में घुसी, पीछे से गजेंद्र और जसबीर भी ज़बरदस्ती कॉकपिट के अंदर घुस गए. दोनों ने अपने कृपाण निकाले और पायलट, को-पायलट की गर्दन पर रख दिए.

नोट : तब फ़्लाइट के केबिन एरिया में कृपाण ले जाने की अनुमति हुआ करती थी. सिख अभी भी डोमेस्टिक फ़्लाइट में कृपाण ले जा सकते हैं. लेकिन केवल चेक इन बैगेज में. ‘इन पर्सन’ या ‘हैंड बैगेज’ में ले जाना अलाउड नहीं है.

ख़ैर वापिस क़िस्से पर लौटते हैं.

गजेंद्र और जसबीर ने पायलट और को-पायलट को अपने कब्जे में कर लिया था. इधर केबिन में तज़िंदर, सतनाम और करन भी अपनी सीट से खड़े होकर बीच गलियारे में आ गए. इसके बाद इन तीनों ने भी अपने कृपाण निकाल लिए. सतनाम ने कृपाण अपनी कलाई पर दे मारा और खून से सना हुआ हाथ हवा में उठाया. ये लोग जताना चाह रहे थे कि मामला सच में सीरियस है, कोई उन्हें हल्के में ना ले.

इसके बावजूद कुछ लोग घबराहट के मारे शोर मचाने लगे. इस पर तज़िंदर ने एक कपड़े में लपेटे हुए तीन ग्रेनेड निकाले. और को-ऑपरेट ना करने पर प्लेन को उड़ा देने की धमकी दी. इसके बाद उन्होंने पायलट से कहा, प्लेन को लाहौर ले चलो. प्लेन लाहौर पहुंचा, जहां उसे लैंडिंग की इजाज़त मिल गई.

सवाल था कि अपनी नई-नई दुकान छोड़कर तज़िंदर प्लेन हाइजैक करने क्यों पहुंच गया था? और प्लेन हाइजैक करने के पीछे इन लोगों की क्या मंशा थी?

ख़ालिस्तान कनेक्शन 

दरअसल इसके कुछ ही दिन पहले पंजाब में ‘जरनैल सिंह भिंडरावाले’ को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था. मामला था, हिंद समाचार ग्रुप के मालिक लाला जगत नारायण की हत्या का. ये पांचों हाइजैकर्स ख़ालिस्तान मूवमेंट के समर्थक थे और इनकी मांग थी ‘भिंडरावाले’ की रिहाई. इसके साथ-साथ इन लोगों ने 5 लाख डॉलर की फिरौती की मांग रखी. आज के हिसाब से लगभग 3.7 करोड़ रुपए.

29 सितम्बर की दोपहर जैसे ही एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को पता चला कि प्लेन हाइजैक कर लिया गया है, उसने तुरंत केंद्रीय मंत्रालय को इसकी सूचना दी. प्लेन पाकिस्तान में था और दोनों देशों के रिश्तों के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना बेहतर है. भारत के लिए ज़रूरी था कि पाकिस्तानी अधिकारियों से जल्द से जल्द कॉन्टैक्ट किया जाए.

दिल्ली में जल्द ही एक क्राइसिस मैनेजमेंट टीम का गठन किया गया. और सबसे पहले पाकिस्तान स्थित भारतीय हाई कमिश्नर को फ़ोन लगाया गया. ये थे नटवर सिंह, जो आगे चलकर भारत के विदेश मंत्री नियुक्त किए गए.

Untitled Design (2)
2004 में मनमोहन सरकार में नटवर सिंह विदेश मंत्री बनाए गए (तस्वीर: PTI)

भारत की तरफ़ से सिचुएशन को मॉनिटर करने के लिए नटवर सिंह ने मोर्चा संभाल लिया. उन्होंने सबसे पहले पाकिस्तानी अधिकारियों से ये कंफ़र्म किया कि प्लेन लाहौर में ही है. प्लेन जैसे ही लाहौर में लैंड हुआ, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उसे चारों तरफ़ से घेर लिया था. स्थिति से निपटने के लिए भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों में लगातार बात चल रही थी. उस समय भारत के राष्ट्रपति थे नीलम संजीव रेड्डी. इस दौरान उनके और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक़ के बीच दो बार फ़ोन पर बात हुई. अचरज की बात थी कि जिया ने रेड्डी को पाकिस्तान के पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया. साथ में ये भी कहा कि मुसाफ़िरों की सुरक्षा अब पाकिस्तान की ज़िम्मेदारी है. प्लेन में कुछ विदेशी यात्री भी थे. मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ना पहुंच जाए, शायद इस वजह से जिया ऐसा कह रहे थे. कारण चाहे जो भी हो, पर इस मामले में पाकिस्तान से भारत को पूरा सपोर्ट मिल रहा था.

पाकिस्तानी SSG कमांडोज की एंट्री 

इसके बाद नटवर सिंह ने लाहौर फ़ोन मिलाया . जहां लेफ्टिनेंट जनरल लोधी ने पाकिस्तान की तरफ़ से मोर्चा संभाला हुआ था. लोधी ने नटवर सिंह को बताया कि वो एक रेस्क्यू ऑपरेशन प्लान कर रहे हैं. इसके लिए SSG कमांडो की एक ख़ास टीम बुलाई गई थी. ये टीम वेस्ट जर्मनी से कुछ ही महीने पहले ट्रेनिंग लेकर लौटी थी. ले. जनरल लोधी से कहा गया कि जब तक भारत सरकार ग्रीन सिग्नल ना दे, तब तक कोई कार्रवाई ना की जाए. इस बीच पाकिस्तानी अधिकारियों ने हाइजैकर्स के साथ लगातार कम्यूनिकेशन बनाए रखा जिसके नतीजे में बच्चों और औरतों को रिहा कर दिया गया. अब प्लेन में क्रू को मिलाकर कुल 50 लोग बचे थे.

रात 10.30 बजे नटवर सिंह ने फ़ॉरेन सेक्रेटरी को फ़ोन करके रेस्क्यू ऑपरेशन की इजाज़त मांगी. फ़ॉरेन सेक्रेटरी ने उनसे कहा कि ऑपरेशन कब करना है, इसका निर्णय वो खुद लें. आधी रात के कुछ ही देर बाद नटवर सिंह ने Lt. जनरल लोधी को ऑपरेशन की इजाज़त दे दी.  Lt. जनरल लोधी ने रात 12.30 बजे एक कमांडो को मेंटिनेंस स्टाफ़ बनाकर प्लेन में भेजा ताकि वो अंदर के हालत का मुआयना कर सके.

हाइजैकर्स के पास पिस्तौल नहीं थी. कृपाण भी कोई बड़ा ख़तरा नहीं थे. लेकिन हाइजैकर्स बार-बार ग्रेनेड से विस्फोट की धमकी दे रहे थे. डर था कि ऑपरेशन के दौरान अगर ग्रेनेड फट गया तो सबकी जान को ख़तरा हो सकता था. SSG कमांडो बहाने से सभी हाइजैकर्स के पास गया और उसने नज़दीक से उन ग्रेनेड्स को चेक किया. ग्रेनेड्स एक कपड़े में बांधे गए थे. SSG कमांडो ने चुपके से कपड़ा खोलकर देखा तो पता चला कि वो ग्रेनेड नहीं, अमरूद और संतरे थे. उसने बाहर खड़ी टीम को ग्रीन सिग्नल दिया. इसके बाद SSG की टीम प्लेन में घुसी, और उन्होंने पांचों हाइजैकर्स को कब्जे में ले लिया. बाक़ी बचे यात्रियों को आसानी से छुड़ा लिया गया.

रिटर्न टू इंडिया

दिल्ली में अगली सुबह कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पास किया. प्रस्ताव में पाकिस्तान और राष्ट्रपति जनरल ज़िया-उल-हक़ को उनकी मदद के लिए धन्यवाद दिया गया. इसके अलावा पांचों हाइजैकर्स के प्रत्यर्पण के लिए पाकिस्तान के पास एक औपचारिक अनुरोध भेजा गया.

Untitled Design (4)
पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल ज़िया-उल-हक़ (तस्वीर: Getty)

लेकिन पाकिस्तान ने हाइजैकर्स को भारत भेजने से इनकार कर दिया. पाकिस्तान की अदालत ने 1986 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. बड़ी कोशिशों के बाद सन 2000 में पाकिस्तान दो लोगों को भारत को सौंपने पर राज़ी हुआ. तज़िंदर और सतनाम सिंह.

भारत आकर इन दोनों पर दुबारा मुक़दमा चला. 2011 में पंजाब पुलिस ने दोनों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया. लेकिन कोर्ट में तज़िंदर और सतनाम के वकील ने दलील दी कि दोनों पाकिस्तान में सजा काट चुके हैं. और एक ही मामले में दो बार सजा देना अन्याय होगा. दोनों के इकरारनामे के अलावा पुलिस के पास कोई गवाह भी नहीं था. इसके बाद 2018 में दिल्ली कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया. सतनाम सिंह तो अपने परिवार के पास चले गए. लेकिन तज़िंदर की पत्नी और बेटे ने उनसे मिलने से मना कर दिया. ग़ुस्सा हाइजैकिंग से ज़्यादा इस बात का था कि वो चंद दिनों के बेटे को छोड़कर, बिना किसी को बताए ग़ायब हो गए थे.

एपिलॉग

पाकिस्तान और भारत के रिश्तों के इतिहास को देखें तो ये घटना एक Anomaly है. इससे पहले या इसके बाद शायद ही भारत और पाकिस्तान ने किसी मामले में इस तरह मिलकर काम किया हो. पाकिस्तान के सहयोग का कारण जो भी रहा हो, ये फ़ैक्ट है कि पाकिस्तान ने इस स्थिति में भारत का पूर्ण सहयोग किया था. एटलीस्ट सभी यात्री को सुरक्षित प्लेन से उतार लिए जाने तक.

Amazon Prime पर हाल ही में एक फ़िल्म रिलीज़ हुई. नाम है ‘The Courier’. फ़िल्म में बेनेडिक्ट कंबरबैच ग्रेविल नाम के एक इंग्लिश व्यापारी का रोल करते हैं. बैक्ग्राउंड है 1960 में कोल्ड वॉर के दौरान हुए क्यूबा मिसाइल क्राइसिस का.

Untitled Design (1)
2018 में तज़िंदर पाल सिंह और सतनाम सिंह (तस्वीर:ANI)

दुनिया को न्यूक्लियर वॉर से बचाने के लिए एक रशियन अधिकारी ओलेग पेन्कोव्स्की MI6 से सम्पर्क करता है. MI6 ग्रेविल को रशिया भेजती है. जहां ग्रेविल और ओलेग की अच्छी दोस्ती हो जाती है. इसी सिलसिले में ओलेग एक बार ब्रिटेन आता है और ग्रेविल के परिवार से मिलता है. खाने की टेबल पर ग्रेविल का बेटा ओलेग से कहता है,

‘क्या रशिया के लोग हमसे नफ़रत करते हैं?’

ओलेग जवाब देता है,

‘हमारे राजनेता तुम्हारे राजनेताओं से नफ़रत करते हैं और ऐसे ही तुम्हारे नेता हमारे नेताओं से. ये बात कभी मत भूलना. लेकिन दोनों तरफ़ के लोग, जैसे कि तुम्हारे पिता और मैं, हम साथ वक्त बिताते हैं, साथ बिज़नेस करते हैं. यहां तक कि हम एक-दूसरे के परिवार से भी मिलते हैं. जैसे कि मैं तुम लोगों से मिल रहा हूं. हो सकता है हम केवल दो लोग हों. लेकिन ऐसे ही बदलाव की शुरुआत होती है’

ये बात रशिया और अमेरिका के संदर्भ में थी. बाक़ी आप इशारा समझ गए होंगे.


वीडियो देखें- ‘ग्रेटेस्ट डे लाइट रॉबरी’: 1914 की वो लूट, अंग्रेजों को जिसकी भनक भी नहीं लगी!

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.