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साइकिल-बाइक में ग्रीस तो लगाया होगा, पर किस रंग का कब इस्तेमाल करना है, आज ये जान लीजिए

Grease Color and Types: ग्रीस का इस्तेमाल मशीनों में पुर्जों के बीच घर्षण, घिसाव को कम करने के लिए किया जाता है. ये कई रंगों में आते हैं. जैसे कि लाल, नीला, सफेद, ट्रांसपेरेंट आदि. किसका इस्तेमाल कब और कहां करना है ये जान लीजिए.

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14 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 14 अगस्त 2025, 05:14 PM IST)
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ग्रीस एक लुब्रीकेंट होता है. (फोटो-Machinery Lubrication)
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बाइक की चेन से आवाज आ रही है, तो ग्रीस लगा लो. ब्रेक में से चीं-चीं की आवाज आ रही, तो भी ग्रीस लगा लो. किसी भी गाड़ी में कहीं पर भी कुछ हो रहा है, तो पहला सॉल्यूशन वहां ग्रीस लगा दो. गाड़ी स्मूथली चलेगी. ठीक बात. ग्रीस लगाने से चीजें ठीक हो जाती हैं. क्योंकि वो लुब्रिकेंट का काम करती है. लेकिन आपको पता है कि कौन सा ग्रीस गाड़ी में इस्तेमाल करना चाहिए? आप दुकान से जाकर कोई भी रंग का ग्रीस लेकर नहीं आ सकते हैं. हर रंग का अपना काम और मतलब होता है. उसके बारे में बात करते हैं लेकिन उससे पहले जान लेते हैं कि ग्रीस का काम क्या होता है.

ग्रीस एक लुब्रिकेंट है. ये तेल से बनता है लेकिन इसे गाढ़ा बनाने के लिए साबुन या अन्य Emulsifying agents (दो चीजों को मिलाने में मदद करना) का इस्तेमाल किया जाता है. ग्रीस का काम मशीनों में पुर्जों के बीच घर्षण, घिसाव को कम करने के लिए किया जाता है. ये मशीन को पानी, धूल और छोटे कणों से भी बचाता है. ग्रीस खासकर उस जगह पर इस्तेमाल होता है, जहां तेल नहीं टिक पाता. जैसे कि बियरिंग, गियर और चेन. या फिर जिन पुर्जों तक पहुंचना मुश्किल होता है. अब बात कर लेते हैं कि ग्रीस का रंग का क्या कहता है.

गहरे नीले रंग का ग्रीस

नीले रंग के ग्रीस को पारंपरिक बेस स्टॉक से बनाया जाता है. आप किसी भी एंटी फ्रिक्शन और प्लेन बियरिंग की जरूरतों के लिए इस ग्रीस का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये ग्रीस कई तरह के तापमान में इस्तेमाल किया जाता है.

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सफेद रंग के ग्रीस का इस्तेमाल फूड फैक्ट्री में होता है. (फोटो-सोशल मीडिया)
लाल रंग का ग्रीस

लाल रंग ज्यादा तापमान में भी काम करता है. लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं होता है. रेड ग्रीस मैकेनिकल इक्विपमेंट और पार्ट्स को प्रोटेक्ट करता है और लुब्रिकेशन देता है. लाल और नीला ग्रीस एक दूसरे की जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है. 

ग्रे और ब्लैक ग्रीस

इस रंग के ग्रीस में अक्सर मोलिब्डेनम डाइसल्फाइड ग्रेफाइट होता है. इसे अक्सर "मोली" कहा जाता है. ये इस ग्रीस को गंभीर परिस्थितियों के लिए परफेक्ट बनाता है. कई ओरिजिनल इक्विपमेंट्स मैन्युफैक्चरर (OEM) कंपनियां, ऑफ रोड इक्विपमेंट के लिए मोली ग्रीस की ही सलाह देती हैं. ये ग्रीस उत्खनन मशीनों, स्किड स्टीयर और क्रेन जैसी मशीनों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें: एंटी रस्ट कोटिंग क्या सभी कारों के लिए जरूरी है, जंग से बचाने वाली ये कोटिंग कब करानी चाहिए?

ट्रांसपेरेंट या सफेद ग्रीस

ट्रांसपेरेंट या सफेद ग्रीस का इस्तेमाल फूड फैक्ट्री में होता है. जैसे कि फूड प्रोसेसिंग या पैकेजिंग मशीनरी में.  

ग्रीस का बदलना क्या संकेत देता है?

लंबे समय तक इस्तेमाल करने से ग्रीस का रंग बदल सकता है. जैसे कि ग्रीस का रंग गहरा होना या ओरिजनल कलर खो देना. इसकी कई वजह हो सकती हैं-

  • अगर ग्रीस का रंग अपनी चमक खो दे, तो ये उच्च तापमान की वजह से हो सकता है.
  • ग्रीस का रंग दूधिया दिखने लगे, तो पानी का कंटामिनेशन इसकी वजह हो सकता है.
  • ऑक्सीजन के ज्यादा संपर्क में आने से ग्रीस का रंग काला हो सकता है.

इसलिए जरूरी है कि अपनी गाड़ी के लिए सही रंग के ग्रीस को चुनें. यदि रंग बदलने लगे, तो आपको ग्रीस की कोटिंग बदलनी पड़ सकती है. या इस्तेमाल के लिए दूसरे प्रकार का ग्रीस चुनना पड़ सकता है. क्योंकि खोई हुई चमक, कालापन और दूधिया रंग, ये सभी ग्रीस का प्रभाव खत्म के संकेत हैं. 

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