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बड़ा माने कित्ता बड़ा. इत्ता बड़ा कि उत्ता बड़ा. क्षैतिज या लंबवत.

मजाक छोड़िए भाईसाब. सही सही बताइए.

आज ससुरा फैसला हो ही जाए. इस पार या उस पार. ये रोज रोज का भैंभड़ा पसारना बंद हो.

तो भइया सबसे बड़ा खान है नहीं था. अल्लाह को प्यारा हो गया. अरे अपना जयंत का लौंडा. जिसकी पेशावर में पैदाइश हुई थी. आजादी से भी पहले. अमजद नाम दिया था अम्मी ने. माशाअल्लाह. जब जवान हुआ तो जबर निखर के आया. 6 फीट 1 इंच का कद. तीखे नैन नक्श. और सुराही से गुजर के आती आवाज. बालक को पहला काम मिला 17 साल की उमर में. मसें भी नहीं भीगी थीं ढंग से बरखुरदार की. फिल्म का नाम था नाजनीन. यूं सिलसिला चल निकला. सिप्पी की शोले ने जो सितम ढाए, उसके किस्से तो अब खुदाई में भी पाए जाएंगे.

लेकिन ऊपरवाले की दिल्लगी का क्या कहिए. जब सब ठीक चल रहा था. अमजद की बेगम सहला ने घर संभाल लिया था. घर में तीन किलकारी गूंज चुकी थीं. बड़ा बेटा शादाब. फिर बेटी अहलाम और एक नन्हा बदमाश सीमाब रौनकें लगा रहे थे.

amjad khan with family

तभी कयामत आ गिरी. बुलडोजर की शकल में.

साल 76 का था. मुल्क अपनी इंद्री बचाने में जुटा था. अमजद कार से जा रहे थे. बंबई से गोवा. रास्ते में सड़क पर बुलडोजर पड़े थे. बचने के चक्कर में हुआ एक्सिडेंट. रब्बा-रब्बा. अमजद बचा, मगर दे दवाई, दे इंजेक्शन. शरीर भर दिया पूरा. और उसके बाद. जवान पर जो सब तरफ से जो गज गज भर गोश्त चढ़ा. तो कसम गब्बर की. ढोलकी और पालकी, सब हिल गए.

इसका पहला नमूना दिखा सत्यजीत रे की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में. इसमें अमजद लखनऊ के शौकीन नवाब वाजिद अली शाह बने थे. क्या कमाल की ठुमरी सुनी थी साहब उनके किरदार ने. गौर फरमाएं जरा. कान्हा मैं तोसे हारी. बिरजू महाराज की सिखाई थिरक.

इसके बाद बढ़ते वजन के चक्कर में अमजद की तबीयत अकसर खराब रहने लगी. फिर भी वह फिल्में करते रहे. और 1992 में उनका इंतकाल हो गया. कम्बख्त दिल दगा दे गया. पर जाने से पहले नाम कर गया. खान.

अमजद का मतलब होता है यश. और जोरों का मिला उसे.

तो कद काठी और तबीयत, तीनों के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा खान हुआ है अमजद खान. उसका जनाजा देखिए जरा. कितनी शकलें पहचान पा रहे हैं आप. याद पर जोर दें तो एक बात और याद रखें.

माटी के ख्वाब सारे, माटी के अंग
पानी के संग बहे, जीवन के रंग
माया है जीत सारी माया
है ये जंग
आखिरी मंजिल सभी की
माटी का पलंग

इसलिए ये जो नई उमर के लपाड़े तुर्रम खान बने फिर रहे हैं इंजेक्शन और गोलियों के दम पर. इनके चमचों चम्मचों को समझाओ जरा. कि बड़ा होने में ही सब बड़ाई नहीं है. वर्ना बड़बड़ाने का क्या है. जबान को जुंबिश देते रहिए.

आइए, अब अमजद खान को याद करें. उनके आखिरी सफर के साथ. और याद रखें. वो सबसे बड़ा खान था. कद 6 फीट 1 इंच. वजन 147 किलो. इतने में ढाई शाहरुख, सवा दो आमिर और दो सलमान खान तो आराम से आ जाएंगे.

श्वेतांक edited question ago
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