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इस साल कोई भी फिल्म 400 करोड़ रुपये नहीं कमाएगी. बल्कि 300 करोड़ की ही कमाई हो जाए तो गनीमत जानिए. वो क्यों. यूं. अब तक दो फिल्मों ने 300 करोड़ रुपये कमाए हैं. पहली, आमिर खान की 2014 के लास्ट में आई पीके. और दूसरी 2015 में आई बजरंगी भाईजान. पीके रिलीज हुई 19 दिसंबर 2014 को. और इसके बाद तीन हफ्ते तक कोई बड़ी रिलीज नहीं. यानी फैलने का पूरा मौका. क्योंकि डायरेक्टर राजकुमार हिरानी 3 ईडियट्स की अपार सफलता के बाद ये फिल्म ला रहे थे. साथ में थे आमिर खान. म्यूजिक भी चल गया था. इसलिए कोई मुकाबले में आसपास भी नहीं आया. फिल्म कंट्रोवर्सी में भी खूब आई. सबने कहा, भगवान का मजाक उड़ाया गया है. सब देखने भी चले गए. मजाक का तो नहीं पता, मगर बॉक्सऑफिस पर पैसे खूब उड़े. फिल्म ने 17 दिन में 300 करोड़ पीट लिए. और एक नए क्लब की शुरुआत कर दी. ध्यान है न गुरु. हिरानी और आमिर ने ही 3 ईडियट्स से 200 करोड़ क्लब की भी शुरुआत की थी. खैर. दूसरी फिल्म आई पिछले साल. 17 जुलाई 2015 को. ईद के मुबारक दिन. चार दिन का वीकएंड मिला. फिर दो हफ्ते तक कोई तगड़ी फिल्म नहीं. सलमान खान का अपना कल्ट और फैन फॉलोइंग. तिस पर ये चर्चा कि पहली बार सलमान की फिल्म में स्टोरी है. मार्मिक स्टोरी लेकर आए डायरेक्टर कबीर खान. तीसरा फैक्टर. सलमान खान को नरेंद्र मोदी पाले में गिना जाता है. भाईजान ईद के दिन भी बजरंग बली की जय कर रहे हैं. वह भी पर्दे पर पाकिस्तान जाकर. बहुसंख्यक देशभक्ति जाग उठी. भारतीय हिंदू पुरुष पाकिस्तानी मुस्लिम बच्ची को बचाता है. न सिर्फ बचाता है, बल्कि घर छोड़कर आता है. भगवान बजरंग बली की तरह. तो हीरो, हिंदू, पाकिस्तान को सॉफ्ट तमाचा. ऐसी कई थीम मिल गईं. और लोग हपककर देखने गए. गोया सरहद के उस पार लानत भेजने का एक कारगर जरिया मिल गया हो. और 20 दिन में बजरंगी भाईजान भी पाले के उस पार. सलमान भक्त अतिरिक्त खुश. कि भाई का मुकाबला तो ऊ चिरकुट शाहरुख से रहा है. आमिर तो अपना है. और देखो. सल्लू 300 करोड़ में पहले पहुंच गया. जो गया, वो चला गया. जो है, वो है 2016. और गंगा, गोमती, सबमें बहुत पानी बह गया है. आमिर खान देशविरोधी हो गए हैं. स्नैपडील के बहिष्कार से लेकर पाकिस्तान भेजे जाने तक तमाम हरकतें हो चुकी हैं. पीके को लेकर आईएस की मदद पर भी स्वामी फूल बरसा चुके हैं. शाहरुख खान भी एंटी मोदी अर्थात एंटी इंडिया हो चुके हैं. इसीलिए तो सज्जनों के हिसाब से दिलवाले नहीं चली. सच्चे अच्छे लोग सफल हो गए. और इसीलिए 300 करोड़ क्लब के एक दावेदार शाहरुख खान को अप्रैल में फैन और अक्टूबर में रईस की रिलीज के बाद भी मातम ही मनाना होगा. अब ये देश शाहरुख खान का फैन नहीं रहा. टॉलरेंस की हद होती है भाई. बचे कौन. आमिर, सलमान और रितिक. आमिर की फिल्म दंगल एक तगड़ी दावेदार है. हरियाणे का पहलवान बाप. समाज से जूझकर अपनी दो बेटियों को पहलवान बना रहा है. यानी प्लॉट तगड़ा है. मगर दो दिक्कतें हैं. एक, आमिर खान भी देशविरोधी करार दिए गए हैं. इसलिए उनकी फिल्म की पायरेटेड कॉपी देखना ही सज्जनों के मुताबिक सच्चा जवाब होगा. सनीमा हाल न जाएंगे साधुजन. दूसरा, कंसेप्ट तगड़ा है, मगर नितेश तिवारी बतौर डायरेक्टर अभी तक अपना लोहा नहीं मनवा पाए हैं. सिर्फ आमिर के दम पर ओपनिंग तो मिल जाएगी, मगर उसके बाद फिल्म अपने दम ही भाग सकती है. और कितना भी भागेगी, 400 करोड़ तक तो नहीं ही पहुंच पाएगी. लोग कहेंगे, सलमान खान. सल्लू की फिल्म आ रही है सुल्तान. दीवाली है. ओपनिंग अच्छी मिलेगी. और भाई तो बिना गेरुआ रंगे ही देशभक्त है. मगर माराधाड़ है इसमें. फिल्म वही चलती है अपार. जो फैमिली क्लास को खींच सके. और सुल्तान के डायरेक्टर अली अब्बास जफर अभी उतना पोटास नहीं दिखा पाए हैं. इसलिए सुल्तान 200 करोड़ तो पार कर लेगी. मगर उसके बाद रिस्क ही रिस्क है. एक और बड़ा प्लेयर, बड़ा कॉम्बो है आशुतोष गोवारिकर और रितिक रोशन का. क्या जोधा अकबर का जादू रिपीट होगा. इसका कयास तो तब लगे जब ये पता चले कि इनकी नई फिल्म मोहन जो दारो रिलीज कब हो रही है. अभी कुछ पक्का नहीं हो पा रहा. शिड्यूल से पीछे चल रही है गाड़ी. और फिर रितिक का क्रेज है, आशु का भी. मगर शाहरुख, सलमान, आमिर की तरह धर्मांधता की हद तक दीवानी फॉलोइंग नहीं है.
चंचल शुभी edited question ago
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