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रात दिन गर्दिश में हैं सात आसमां.  हो रहेगा कुछ न कुछ, घबराएं क्या.
कुछ नहीं होगा. धरती तब भी उसी रफ्तार से घूमेगी. सूरज की किरणें उतनी ही चिनकारी पैदा करेंगी. जय हिंद, वंदे मातरम. गाय बचाओ. सेकुलरिज्म निभाओ. विराट कोहली ने सेंचुरी क्यों नहीं मारी. सेंसेक्स कितना गिरा हुआ है, जो रोज गिरता है. सलमान ने शादी क्यों नहीं की. पापड़ में भुनगा क्यों लग गया. बॉस ने बिना वजह क्यों हड़का डाला. कद्दू की सब्जी में अमचुर कम क्यों है...ये सब सवाल कायम रहेंगे. सब कुछ यथावत चलता रहेगा. पप्पू किसे कहते हैं. उसे जो प्यारा होता है. जिसकी पप्पी लेने का मन करे. चाचा ताऊ वाली जेनरेशन में एकआध नाम ऐसा जरूर होता था. मेरे यहां तो दोदो हैं पप्पू नामधारी. कैडबरी वालों की चॉकलेट में कीड़े निकले, तो उन्होंने राष्ट्रव्यापी कैंपेन चलाया. गलती मानी. मशीनें बदलीं. फिर लाए बच्चन अमिताभ को. पीयूष पांडे ऐड गुरु ने लिखा. पप्पू पास हो गया. पता नहीं ये पप्पू फेल कब हो गया. कैसी मुस्की ढीलता होगा वो आदमी, जिसने उठाई कहीं से चिप्पी और आलू से मिसमिसा के राहुल गांधी के माथे पर चेप दिया. फेवीक्विक से भी जल्दी और उससे भी ज्यादा पक्का. सौ बात की एक बात. इस मुलुक में हर तरह के पीएम हुए हैं. सब पाले के हिसाब से पेलते हैं और झेलते हैं. नेहरू से किसी को दिक्कत है, तो कोई मोरार जी भाई की पेशाब चिकित्सा को लेकर परेशान है. किसी को अटल में सी 814 कंधार, करगिल और संसद अटैक नजर आता है. तो किसी को मनमोहन में 26-11. और बीच में देवेगौड़ा और गुजराल भी हैं. तो अगर देश की जनता जनादेश देगी. कांग्रेस को. उसके गठबंधन को. या कि अटोरा बटोराओं को जो मिलकर एक कनाती के नीचे आ जाएं. तो राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन भी सकते हैं. हो सकता है कि वो भी एक मनमोहन खोज लें. मम्मी जी ही बता सकती हैं पक्के से तो. और याद रखें. हम जैसे हैं, हमें वैसे ही हुक्मरान मिलते हैं. बाकी अच्छी चीज ये है. कि किसी को पता नहीं होता. कि कल क्या हो जाए. बाबाओं को खासतौर पर नहीं. इसीलिए वो झिलाते सबसे ज्यादा हैं.    
विकास टिनटिन edited question ago
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