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सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?


राजबीर. तुम्हें आजकल हो रहा है. मुझे बचपन से ऐसा लग रहा है. खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते. एक के ऊपर एक रखता तो झांक कर देख लेता. इसमें बैठ के कौन जा रहा है. जो जा रहा है, उसको पेशाब लगी तो क्या ऊपर से ही मूत देगा.

बड़ा हुआ कुछ. तो लगा कि बरोठे में एक भूत है. जो मेरे पलटते ही देखता है. पर दिखा नहीं कभी. अभी भी नहीं. अरे मैं कोई मकान मालिक हूं क्या जो किराया मांगूंगा. मांगूंगा सुकून. जो मिलने से रहा.

सुकून से याद आया. इब्ने इंशा की वो गजल सुनी है.

इंशा जी उठो, अब कूच करो.
इस शहर मे जी का लगाना क्या.
वहशी को सुकूं से क्या मतलब
जोगी का नगर में ठिकाना क्या.

पटियाला घराने वालों की नर्सरी से निकले उस्ताद इनायत अली खान की आवाज में सुनो. लिल्लाह. पिंडली से करेंट उठता महसूस होगा.
और अगर आपको बहुत ही ज्यादा अजीब लग रहा है. और उसके चक्कर में भूख नहीं लग रही. नींद नहीं आ रही. काम नहीं कर पा रहे. तो डॉक्टर के पास जाइए. हममें से बहुत लोग डिप्रेशन के मरीज होते हैं. मगर ट्रेस नहीं कर पाते टाइम से. डॉक्टर हेल्प कर सकता है. पर उसकी दवा भी तभी असर करेगी, जब तुम चाहोगे. तो बार फिर वहीं लौट आती है. कि तुम्हें अजीब फील हो रहा है तो तुम्हीं खोजो क्यों हो रहा है. घुस जाओ. डूब जाओ. बस ऊपर एक ख्याल, एक साथी, एक सिरा छोड़े जाना. ताकि लौट सको वापस. उजाले की दुनिया में. जैसे हैरी पॉटर लौटता था. कभी क्विडिच वर्ल्ड कप के दौरान झील से. कभी गरुणद्वार की तलवार लेकर पोखर से.

आशीष दैत्य edited question ago
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