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महाभारत का मंतर याद रखें. शठे शाठ्यम समाचरेत. अर्थात दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करें. ये आधुनिक दुष्ट हैं. इसलिए युद्ध मैदान में नहीं दफ्तर में पाए जाते हैं. डुअल फेस हैं. तो आप भी इनके लिए वैसे ही बन जाएं. सवाल से जाहिर है कि आपको पता है कि सामने वाला कैसा है. तो खूब मीठा बोलें. इत्ता कि उसकी टांगें गुड़ में धंस जाएं. हिल ही न पाए. वहीं भिनकता रहे. तुम्हारी तरफ से निश्चिंत हो जाए. ब्रो या बेस्टी वाली फीलिंग दे दो उसे. और ऑबजर्व करो. मानव मन का कैसा विचित्र नमूना. तुम्हारे सामने कैसे कैसे विधान कर रहा है. आपको किक मिलेगी. बीपी दुरुस्त रहेगा. मन निश्चिंत.
पर ध्यान रहे. आप इस केस को कैसे हैंडल कर रहे हैं, ये दफ्तर में किसी को पता न चले. एक जाने तो जादू. सब जानें तो…


चाय बनाने को ‘जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो’ कौन सी कहानी में कहा है?

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

एक राइटर होने की शर्तें?

ऐसा क्या करें कि हम भी जेएनयू के कन्हैया लाल की तरह फेमस हो जाएं?

तुम लोग मुझे मुल्ले लगते हो या अव्वल दर्जे के वामपंथी जो इंडिया को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते हो

चंचल शुभी edited question ago
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