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डियर यशवीर कोई भी जो किसी की तरह बना, कभी फेमस नहीं हो पाया. फेमस वही हुआ, जो अपनी तरह बना. सचिन गावस्कर नहीं बने. विराट सचिन नहीं बने. मोदी अटल नहीं बने और केजरीवाल अन्ना नहीं बने. सबने अपना रास्ता खुद बनाया. कन्हैया ने भी. और हां, वह लाल अपनी मां के हैं. बाकी के लिए कुमार हैं. कन्हैया कुमार. मैं भी जेएनयू में पढ़ता था. आज जो कुछ भी हूं, उसमें जेएनयू के माहौल का, वहां की सीख का बड़ा योगदान है. कन्हैया भी वहीं पढ़ता है. तो उसने भी कैंपस से बहुत कुछ सीखा होगा. अच्छा स्टूडेंट बनने की बात करें तो सही रहे. जेएनयू में दाखिला मिल जाए तो बल्ले बल्ले. मगर एंट्रेंस बहुत मुश्किल होता है. ऑब्जेक्टिव सवालों वाला रट्टाफिकेशन काम नहीं आता. सब्जेक्टिव पेपर होता है, एमए, एमफिल एंट्रेंस के लिए. अपनी सोच समझ से जवाब लिखने होते हैं. हर तरह की राय रखनी होती है. फिर अपनी भी राय दे सकते हैं. तो मेरी राय में, आप खूब पढ़ाई करें. पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर. जो मत आपको विरोधी लगे, उसे भी जानें. सुनी सुनाई बातों के फेर में मत पढ़ें. कोशिश करें कि ऑरिजिनल टेक्स्ट पढ़ें. और सिर्फ पढ़ें ही नहीं. जो पढ़ा है, सीखा है, उसे व्यवहार में अमल में लाएं. आपके सवाल से लग रहा है कि जवान व्यक्ति होंगे. तो आसपास के अंधेरों से लड़ने की आपकी जिम्मेदारी औरों से ज्यादा है. क्योंकि समय आपके हक में है. तो जहां कुछ गलत हो रहा है, वहां सही के लिए खड़े हों. अंबेडकर कहा करते थे. पढ़ाई और संघर्ष. इन दो शब्दों को याद रखें. कन्हैया कुमार एक वामपंथी छात्र संगठन के नेता हैं. जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष भी हैं अभी. लेफ्ट संगठनों के काडरों को मेहनत करनी होती है. मेरे गुरु पुरुषोत्तम अग्रवाल अकसर कहते थे. इस देश में आगे की देखकर दो ही संगठन राजनीति कर रहे हैं. संघ और लेफ्ट. काडर बेस्ड होते हैं लेफ्ट वाले. खू मेस मीटिंग अटेंड करनी होती हैं. पर्चे चिपकाने होते हैं. घूम घूमकर कैंपेनिंग करनी होती है. बाकी कैंपस की तरह आठ बांके छबीले खुली जीप में बैठकर पर्ची उछालते हुए नेता नहीं बन जाते. और सबसे बड़ी बात. नीयत साफ रखकर जो भी मत सही लगे, उसके साथ निष्ठा के साथ जुड़ना होता है. शरीर गलाना होता है. जिस जनता की बात कर रहे हैं, उसके यथार्थ और उनके अंतरविरोधों को समझना होता है. छात्र नेता की बात करूं तो हर वक्त हर छात्र की मुश्किलों में साथ देने के लिए तत्पर रहना होता है. और इन सबके साथ अपनी पढ़ाई भी तसल्लीबख्श ढंग से पूरी करनी होगी. उम्मीद है कि इस लंबी लंतरानी से कुछ बात बनी होगी. तो कन्हैया की तरह क्यों, यशवीर की तरह फेमस हो जाओ. कुछ अच्छा करो. सच्चा करो. सादर सौरभ
चंचल शुभी edited question ago
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