0
सर सर सर, सिर्फ आप ही नहीं, हर होमो सैपिएन्स रजनी सर का फैन है. वैसे तो फैन अपने सुपरस्टार की काबिलियत पर कभी सवाल नहीं उठाते. पर चूंकि आपने उठा ही दिया है तो गिराना जरूरी हो जाता है. सिनेमा में आप जो फाइटिंग या स्टंट देखते हैं, वे दो तीन तरह के होते हैं. पहले जिनमें एक्टर की जगह उसके बॉडी डबल का इस्तेमाल होता है. ऐसे सीन्स आप आसानी से पहचान सकते हैं. इनमें हीरो का चेहरा नहीं दिखाया जाता है. जैसे ऊंचाई से कूदने का सीन सीक्वेंस. पहले सीन में आपको हीरो का चेहरा दिखाया जाएगा. दूसरे में कूदता हीरो, जिसका चेहरा नजर नहीं आ रहा. और तीसरा सीन, जिसमें कूद पूरी हो जाती है और फिर चेहरा दिखाया जाता है. जब बॉडी डबल का इस्तेमाल नहीं होता, तब दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है. आजकल स्टंट के लिए तार का खूब यूज होता है. जैसे हवा में गोते लगाता हीरो. वह तार के सहारे ये स्टंट करता है. फाइनल सीन में एडिटिंग कर रस्सी, तार या इस तरह के दूसरे यंत्र हटा दिए जाते हैं. आपको सिर्फ हवाबाजी नजर आती है. तीसरी तकनीक होती है एनमेशन वगैरह की. इसमें हीरो के स्टंट को कंप्यूटर की सहायता से अंजाम दिया जाता है. रोबॉट वगैरह में इसी का इस्तेमाल हुआ है. और रजनीकांत सर की खासियत यही है कि वह हमारे बॉलीवुड हीरोज की तरह अपनी इमेज के गुलाम नहीं हैं. स्क्रीन पर वह भले ही फिट और जवान और पूरे बालों में नजर आते हों. मगर रियल लाइफ में वह जब भी जनता के सामने नमूदार होते हैं, तो अपने लगभग गंजे सिर, क्यूट तोंद और छप्पन तोले की मुस्कान के साथ आते हैं. यही है असली हीरो.
चंचल शुभी edited question ago
    लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें