जुडोका तूलिका मान (Tulika Mann) ने जूडो विमेन 78kg कैटेगरी में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीत लिया है. जूडो में ये भारत का तीसरा मेडल है. फाइनल मुकाबले में तूलिका का सामना स्कॉटलैंड की सराह एडलिंगटन से हुआ. हालांकि फाइनल मुकाबले में तूलिका एक वाजा-अरी (Waza-ari) निकालने में कामयाब रहीं, लेकिन स्कॉटलैंड की खिलाड़ी ने एक आईपन (Ippon) से ये मुकाबला जीत लिया.
टाइमपास के लिए शुरू किए खेल में कॉमनवेल्थ का सिल्वर मेडल लाने वाली लड़की!
जुडोका तूलिका मान ने विमेन 78Kg कैटेगरी में जीता सिल्वर.


बता दें जूडो में आईपन का मतलब एक ऐसे थ्रो से होता है, जहां खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंदी को पीठ के बल काफी तेजी और कंट्रोल से पटक दे. वहीं वाजा-अरी, आईपन के बाद सेकंड हाईएस्ट स्कोरिंग दांव होता है, जिसमें आईपन की तरह प्रतिद्वंदी को मैट पर पटकना होता है. पर इस दांव में आईपन की तुलना में कम फोर्स लगता है.
तूलिका ने इससे पहले क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में मॉरिशस की ट्रैसी डरहोन को हराया. इसके बाद सेमीफाइनल में उनका सामना न्यूजीलैंड की सिडनी एंड्रूस के साथ हुआ. सेमीफाइनल मुकाबले को जीतने के बाद तूलिका ने फाइनल में जगह बना ली थी. तूलिका मान फिलहाल भारत की नंबर एक जुडोका और वर्ल्ड नंबर 62 हैं.
इसके अलावा वो चार बार की नेशनल चैंपियन भी रह चुकी हैं. उन्होंने पिछले चार सालों में एशियन चैंपियनशिप, एशिया कप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप और साउथ एशियन गेम्स में मेडल जीता है. हालांकि तूलिका ने आठ साल की उम्र में जूडो को सिर्फ टाइमपास और सेल्फ डिफेंस के लिए शुरू किया था. लेकिन वो जल्द ही इस खेल में पारंगत हो गई. और 2017 में अपने कोच यशपाल सोलंकी के गाइडेंस में उनके खेल में बेहतरीन सुधार देखने को मिला.
फिस्टोस्पोर्ट्स को दिए एक इंटरव्यू में तूलिका ने अपने खेल के बारे में बात करते हुए कहा था,
‘जूडो मुझे स्पेशल फील कराता है. जूडो के लिए मेरा प्यार, पैशन, डेडिकेशन, और मेरे पेरेंट्स का मुझ पर इस खेल का बेस्ट स्पोर्ट्सपर्सन बनने का विश्वास मुझे इस खेल से जोड़े रखता है. जूडो हमें जीने का तरीका और सलीका सिखाता है.’
23 साल की तूलिका मान कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप की विमेन 78Kg कैटेगरी में दो बार की विजेता रह चुकी हैं. तूलिका ने देश के लिए सीनियर नेशनल्स में कई गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं. इतना ही नहीं जूडो में तूलिका जूनियर नेशनल सिल्वर मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं. 2019 से ही तूलिका इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन के वर्ल्ड टूर में हिस्सा ले रही हैं.
उन्होंने ताइपेई में हुए एशियाई ओपन में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. 2018 में उन्होंने जयपुर में हुई कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप जीती थी. उन्होंने 2017 में बुडापेस्ट में हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना डेब्यू किया था. फिर 2019 में टोक्यो में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया. 2019 में वलसाल में वो कॉमनवेल्थ चैंपियन बनी. अभी तूलिका के कोच जीवन कुमार शर्मा हैं.
फिस्टोस्पोर्ट्स को दिए इंटरव्यू में तुलिका ने अपने लक्ष्य के बारे में बात करते हुए बताया,
‘मेरा सपना है कि मैं भारत की तरफ से जूडो की पहली वर्ल्ड चैंपियन बनूं, साथ ही मैं एक ओलंपिक चैंपियन भी बनना चाहती हूं.’
तूलिका के सिल्वर मेडल के साथ जूडो में ये भारत का तीसरा मेडल होगा. इससे पहले सुशीला देवी और विजय कुमार यादव ने जूडो में अपने-अपने वर्ग में मेडल जीत चुके हैं. CWG 2022 के चौथे दिन सुशीला देवी ने जूडो की 48Kg कैटेगरी में सिल्वर जीता था. वहीं विजय कुमार यादव ने जूडो में भारत को ब्रॉन्ज़ मेडल जिताया था. उन्होंने मेंस 60Kg कैटेगरी में रेपचेज मुकाबले में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था.
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