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अमेरिका में 67 साल बाद किसी महिला को मौत की सज़ा मिली है

क्या किया था इस महिला ने?

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अमेरिका में 67 साल बाद किसी महिला को मौत की सजा दी गई है. मुजरिम का नाम लीज़ा मोंटगोमरी है जिन्होंने एक महिला की 16 साल पहले जघन्य हत्या कर दी थी.
अमेरिका के कैनसस सिटी में 52 साल की लीसा मोंटगोमरी को मौत की सजा दी गई. साल 1953 के बाद यह पहला मौका है जब किसी महिला को मौत की सजा दी गई है. अमेरिका में मौत की सजा पर काफी बहस होती है. इसके चलते अमेरिका के कई राज्यों में मौत की सजा नहीं दी जाती. ऐसे में किसी महिला को मौत की सजा देने का मामला भी कोर्ट पहुंचा. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महिला की मौत की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद मोंटगमरी को दी गई मौत की सजा का रास्ता साफ हो गया था. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, मृत्युदंड देने से पहले जब लीसा मोंटगोमरी से उसकी आखिरी इच्छा के बारे में पूछा गया तो उसने 'नहीं' में सिर हिलाया. मौके पर मौजूद पत्रकार ने बताया कि मोंटगोमरी नर्वस लग रही थी लेकिन वह पूरी तरह से शांत थी. मौत की सजा देने वाले इंजेक्शन दिए जाने के बाद मोंटगोमरी का शरीर शांत हो गया. लीसा को मौत की सजा क्यों दी गई दिसंबर, 2004 में लीसा मोंटगोमरी की बॉबी जो स्टिन्नेट से बात हुई थी. लीसा एक पिल्ला ख़रीदना चाहती थीं. इसके लिए लीसा कैनसस से मिसोरी गईं, जहां बॉबी रहती थीं. बॉबी के घर में घुसने के बाद लीसा ने उन पर हमला किया और गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी. तब बॉबी आठ महीने की गर्भवती थीं. इसके बाद लीसा मोंटगोमरी ने बॉबी की पेट पर चाकू मारकर चीरा लगाया और बच्चा निकालकर उसका अपहरण कर लिया. लीसा ने कुछ वक़्त तक यह जताने की कोशिश भी की थी कि बच्चा उसी का है. साल 2007 में, एक जूरी ने लीसा को हत्या और अपहरण का दोषी पाया और सर्वसम्मति से उसे मौत की सज़ा दिये जाने की सिफ़ारिश की. लेकिन मोंटगोमरी के वकील यह दलील दी थी कि बचपन में लीसा मोंटगोमरी को बहुत ज़्यादा पीटा गया, उसका उत्पीड़न हुआ जिससे उसके मस्तिष्क को नुकसान हुआ है, वो मानसिक रूप से अस्वस्थ है, इसलिए उसे मौत की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के दौरान मौत की सजा देने के मामले में तेजी देखी गई है. जुलाई, 2020 के बाद लीसा मोंटगोमरी ऐसी 11वीं कैदी थी जिसे मौत का इंजेक्शन दिया गया है. डॉनल्ड ट्रंप मौत की सजा के हिमायती माने जाते हैं और 2016 में उनके राष्ट्रपति बनने के बाद मौत की सजाएं भी दी जाने लगीं. इससे उनके राष्ट्रपति बनने के 17 साल पहले तक किसी को मौत की सजा नहीं दी गई थी.

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