
संजलि को नहीं बचाया जा सका.
पीड़ित लड़की लालऊ गांव के जूता कारीगर हरेंद्र सिंह जाटव की बेटी थी. नाम संजलि. घर से डेढ़ किमी दूर पड़ता है नौमील गांव. वहां उसका स्कूल था. अशर्फी देवी इंटर कॉलेज. यहां वो 10वीं क्लास में पढ़ती थी. साइकल से आती और उसी से वापस जाती. 18 तारीख को भी वो स्कूल आई. पढ़ाई की. दोपहर 1:40 स्कूल की छुट्टी हुई. वह घर लौटने लगी. सवा दो बजे के करीब लालऊ पुलिया के पास बाइक सवार हेल्मेट लगाए दो युवक कहूं या शैतान आए. उसे रोका. एक बोतल खोली जिसमें पेट्रोल भरा था और उसके सिर से बोतल ना दी. फिर लाइटर जला उस पर डाल दिया और भाग गए. जी हां, यही हुआ है. दिनदहाड़े लड़की को जिंदा जला दिया गया. मजबूत लॉ एंड ऑर्डर को अपनी उपलब्धि के तौर पर गिनाने वाले योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश में.
पीड़िता संजलि का इसके बाद क्या हुआ. वो साइकिल सहित सड़क किनारे खाई में गिर पड़ी. पर उसकी हिम्मत देखिए. वो जलते हुए सड़क पर पहुंचीं. फिर जोर-जोर से चीखने लगी. रास्ते से गुजर रहे लोग रुके. आग बुझाने की कोशिश करने लगे. पर आग बुझ नहीं रही थी. इतने में वहां से गुजर रही एक बस के ड्राइवर ने लड़की को जलता देख गाड़ी रोकी. कंडक्टर ने तुरंत फायर एक्सटिंग्यूशर निकाल लड़की पर छिड़का तो आग बुझी. घटना की खबर घर पहुंची. मौके पर मां अनीता और पिता हरेंद्र पहुंच गए. यूपी-100 की टीम भी मौके पर पहुंच गई. लड़की को फिर एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ले जाया गया. मगर लड़की करीब 80 प्रतिशत जल गई थी. सो उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. पर उसे बचाया नहीं जा सका. 20 दिसंबर को उसने दम तोड़ दिया.

संजलि की मौत से गांव में मातम पसर गया और हंगामा भी हुआ.
शव गांव पहुंचा तो हंगामा
इधर, 20 दिसंबर की शाम जब संजलि का शव गांव पहुंचा तो पूरा गांव वहां जुट गया. सब गुस्से में थे. मौके पर भीम आर्मी के सदस्य भी पहुंच गए. हंगामा करने लगे. लड़की का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया गया. पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये और एक नौकरी की मांग की जाने लगी. पर कुछ घंटे बाद प्रशासन के आश्वासन पर परिवार मान गया और अंतिम संस्कार हुआ.
21 दिसंबर को सरकार के दूत बनकर डिप्टी सीएम दिनेश शर्मी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. हालांकि उनकी तरफ से किसी मदद की घोषणा नहीं की गई. ये जरूर पता चला है कि उन्होंने प्रशासन से परिवार की हर मदद करने को कहा है.

दिनेश शर्मा पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे.
घटना के बाद पुलिस ने क्या किया?
घटना के बाद पुलिस ने शुरू की जांच. पुलिस का शक इस दौरान गहराया लड़की के ताऊ के बेटे योगेश पर. उसे पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ भी की. फिर उसे छोड़ दिया गया. हालांकि पुलिस की नजर उससे हटी नहीं थी. उसका मोबाइल भी पुलिस के पास था. इस बीच लड़की की मौत की खबर आई. फिर पुलिस को एक और झटका लगा. क्योंकि अब योगेश ने जहर खा लिया था और उसकी मौत भी हो गई. पुलिस को उसी पर सबसे ज्यादा शक था. सो अब पुलिस की जांच वहीं पर अटक कर रह गई है.

योगी आदित्यनाथ की पुलिस इस मामले का खुलासा कितने दिन में करती है, देखने वाला होगा.
हमने इस मामले की जांच कर रहे मालपुरा एसओ विजय सिंह से बात की. उन्होंने वही पुलिस के नपे तुले ढर्रे में बताया कि जांच चल रही है. जब पूरी हो जाएगी तो बता दिया जाएगा. कितने दिन, महीने या साल में पूरी होगी जांच. इसका उनके पास जवाब नहीं था. एसपी अमित पाठक को फोन किया तो वो भी किसी मीटिंग में व्यस्त थे. ये मीटिंगें तो अनंत काल से चलती आ रही हैं और चलती रहेंगी. पर मामले का खुलासा कब होता है, ये देखने वाला होगा. क्योंकि घटना के 4 दिन बाद भी किसी को पता नहीं है कि संजलि को इस तरह बेरहमी से क्यों जलाया गया?
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