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कोवैक्सीन की मंजूरी पर 1 जनवरी को आपत्ति की, 2 जनवरी को हरी झंडी दे दी

24 घंटे के भीतर ही कोवैक्सीन को लेकर कमेटी का मन कैसे बदल गया?

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देश में दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है. फोटो- आजतक
भारत बायोटेक कंपनी पिछले हफ्ते से ही सुर्खियों में हैं. कोरोना की नई वैक्सीन लॉन्च करने को लेकर, कुछ वैक्सीन लाने की जल्दबाजी के आरोपों को लेकर. अब कंपनी की वैक्सीन को मंजूरी की सिफारिश करने वाली सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) की बैठक के ब्यौरे से पता चला है कि कैसे 24 घंटे के भीतर ही इस वैक्सीन को लेकर कमेटी ने अपना मन बदल लिया था. मीटिंग के मिनट्स में है पूरी कहानी भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन नाम से कोविड 19 की वैक्सीन बनाई है. इसके अप्रूवल की कहानी SEC के मीटिंग मिनट्स से पता चलती है. हर सरकारी या बड़ी मीटिंग में हुई बातचीत का लोखा-जोखा रखा जाता है. इन्हें ही मीटिंग मिनट्स कहते हैं. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, SEC के मीटिंग मिनट्स बताते हैं 1 और 2 जनवरी की मीटिंग में किन परिस्थितियों में कोवैक्सीन को हरी झंडी देने का फैसला लिया गया. बता दें कि इस वैक्सीन को बिना ह्यूमन ट्रायल के एफिकेसी रिजल्ट के पहले ही इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अप्रूव कर दिया गया है. एफिकेसी लैब रिजल्ट पर आधारित वैक्सीन की क्षमता बताती है. Covaxin पर 2 जनवरी को हुआ फैसला सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कोवैक्सीन के लिए सीमित अप्रूवल 2 जनवरी को दिया था. अगली सुबह Drug Controller General of India (DCGI) डॉक्टर वीजी सोमानी ने वैक्सीन को सीमित इमरजेंसी यूज की अनुमति दे दी. इसके बाद लोग भारत बायोटेक के दावों पर सवाल उठाने लगे. कोविशील्ड नाम से वैक्सीन बनाने वाले सीरम इंस्टिट्यूट के चीफ अदार पूनावाला ने कोवैक्सीन को पानी की तरह न फायदा और न नुकसान देने वाला बता दिया. कोविशील्ड वही वैक्सीन है, जिसे कोवैक्सीन के साथ इमरजेंसी अप्रूवल दिया गया है. इसके बाद भारत बायोटेक कंपनी के एमडी डॉक्टर कृष्णा एला ने पटलवार किया. दूसरी वैक्सीन पर भी सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि इस तरह के सवाल कोविशील्ड के एक वैरिएंट AZD1222 के वर्ल्ड ट्रायल के बाद क्यों नहीं पूछे गए थे.
Covaxin 3
2 जनवरी को कोवैक्सीन को अप्रूवल की सिफारिश कर दी गई जबकि 1 जनवरी को कमेटी ने इसे लेकर चिंताएं जताई थीं.
SEC ने क्या कहा था? सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने 1 जनवरी को अपने अप्रूवल नोट में लिखा था कि कोरोना वैक्सीन के म्यूटेंट स्ट्रेन पर भी कोवैक्सीन असरदार दिखी है. हालांकि कंपनी ने जो डेटा पेश किए हैं, वह इस बात के लिए नाकाफी हैं कि इसके इमरजेंसी ट्रायल की परमीशन दी जा सके. मीटिंग के मिनट्स में लिखा गया था-
मौजूद आंकड़े बताते हैं कि वैक्सीन के जरिए ताकतवर इम्यून रेस्पॉन्स मिला है. वर्तमान ट्रायल काफी बड़ा है. 25,800 भारतीयों पर हो रहा है. इनमें से 22 हजार लोगों पर यह अब तक सेफ नजर आ रहा है. हालांकि अब भी एफिकेसी का सवाल है. इसे दिखाना अभी बाकी है. कंपनी को चाहिए कि वह अंतरिम विश्लेषण के आधार पर एफिकेसी का डेटा पेश करे, जिससे आगे के लिए फैसला लिया जा सके.
इसके अगले ही दिन 2 जनवरी को SEC ने क्लीनिकल ट्रायल मोड में रहते हुए ही इमरजेंसी यूज का अप्रूवल दे दिया. इसके लिए नॉन प्राइमेट मतलब जानवरों के ऊपर वैक्सीन के असर के डेटा को आधार माना. कहा गया कि कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को देखते हुए भारत बायोटेक ने कमेटी से इसके लिए रिक्वेस्ट की थी. कमेटी ने कहा-
कमेटी जनहित में वैक्सीन के सीमित इस्तेमाल की इजाजत देती है. यह इजाजत क्लीनिकल ट्रायल मोड में दी जा रही है. यह वैक्सीन के ज्यादा विकल्प देगी. खासतौर पर जब कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन सामने आया है, कंपनी अपना फेज़ 3 का ट्रायल जारी रखेगी. इससे मिले डेटा को कमेटी के सामने रखा जाएगा.
मीटिंग मिनट्स के मुताबिक, अप्रूवल की रिक्वेस्ट के लिए भारत बायोटेक ने 'अपडेटेड डेटा' और 'न्यायसंगत जवाब' कमेटी के सामने रखे. लेकिन मिनट्स में यह नहीं बताया गया कि वो 'अपडेटेड डेटा' क्या है, और 'न्यायसंगत जवाब' क्या है.
इंडियन एक्सप्रेस को भारत बायोटेक के प्रमुख डॉ. एला ने बताया कि हमने एफिकेसी का कोई अंतरिम डेटा पेश नहीं किया है. हमने तेज एंटी बॉडी रेस्पॉन्स और लंबे वक्त तक प्रतिरोधकता के बारे में बताया है.

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