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नमाज पढ़ने की जिद लेकर कोर्ट पहुंची भावना, बोली- 'फरमान के साथ ही पढ़ूंगी', मचा बवाल

कोर्ट ने पूछा- "हिंदू होकर क्यों पढ़ना चाहती हो नमाज?"

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हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुरक्षा देने का आदेश दिया है. (सांकेतिक फोटो: Pexels)

एक हिंदू महिला ने उत्तराखंड हाई कोर्ट से नमाज (Hindu Woman Namaz) पढ़ने के लिए सुरक्षा की मांग की है. मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की बेंच ने महिला को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी.

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आजतक से जुड़े संवाददाता मुदित अग्रवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट में याचिका दायर करने वाली महिला का नाम भावना है. वो मध्य प्रदेश के नीमच जिले की रहने वाली है. महिला हरिद्वार स्थित सिडकुल की एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, महिला के साथ फरमान नाम का एक युवक भी उसी कंपनी में नौकरी करता है. उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर कर महिला ने कहा था कि उसका नमाज पढ़ने का मन करता है. महिला ने कोर्ट को ये भी लिखा कि वो अपने सहकर्मी के साथ कलियर शरीफ में नमाज पढ़ना चाहती है.

‘कुछ संगठन विरोध करते हैं’

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने बताया कि कलियर शरीफ में नमाज अदा करने के लिए वो जब जाती है, तो कुछ संगठन उसका विरोध करते हैं. महिला ने अपनी याचिका में इसे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बताया है.

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मामले पर कोर्ट ने 11 मई को सुनवाई की. कोर्ट ने महिला को नमाज पढ़ने की इजाजत देते हुए पुलिस सुरक्षा देने के आदेश दिए. कोर्ट ने कहा कि महिला जब नमाज पढ़ने जाए तो उससे पहले वो संबंधित थाने के SHO को एक प्रार्थना पत्र दे. SHO उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराएं. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान महिला से सवाल किया कि उसने अपना धर्म नहीं बदला है फिर भी नमाज क्यों पढ़ना चाहती है?

इस पर महिला ने कोर्ट को बताया कि वो नमाज से प्रभावित है, इसलिए पढ़ना चाहती है. महिला ने ये भी कहा कि उसने फरमान से शादी नहीं की है और न ही वो अपना धर्म बदलना चाहती है. उसने कहा कि वो हिंदू धर्म मानती है और बिना किसी डर, आर्थिक लाभ, भय और दबाव के कलियर शरीफ में नमाज पढ़ना चाहती है. महिला ने कोर्ट से ये भी कहा कि हरिद्वार के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देशित कर उसके परिवार को सुरक्षा दिलाई जाए.

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