गूगल के एक्स एम्प्लॉई सेठ स्टीफेंस की किताब Everybody Lies का रिव्यू.
गूगल ने बताया इंडियन मर्द अपनी बीवी के साथ क्या करना चाहते हैं
एक किताब आई है Everybody Lies. इसे लिखा है सेठ स्टीफेंस ने. उसी किताब में लिखी है सारी बातें.
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'Everybody Lies' में कई रोचक बातें लिखी गईं हैं.
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किशोरावस्था में हर इंसान का एक उम्रदराज़ दोस्त होता है, जिसकी शादी होती है. और सुहागरात के अगले दिन वो आकर बताता है कि मैंने तो रात में 5 बार किया. वो ये भी बताता है कि उसका लिंग 8 इंच का है. वो ये भी बताता है कि उसकी पत्नी उसके लिए जान दे देगी और वो भी उसके लिए जान दे देगा. वो ये भी कहता है कि कुछ भी हो जाए, वो अपने मां बाप के लिए जान दे सकता है. वो ये भी बताता है कि उसके छोटे भाई से बढ़कर उसके लिए दुनिया में कोई नहीं है. पर क्या आपको पता है कि ये सारी चीजें झूठ होती हैं? लोग लगातार झूठ बोलते हैं. अपने बच्चों से, मां-बाप से, दोस्तों से, जमाने से, सबसे.
आप खुद को भी भांप लीजिए:
क्या आपको कभी किसी का कत्ल करने का मन किया है? क्या आपने अपने सामने जाती लड़की को घूरा है? ये हर जेंडर पर लागू होता है. क्या आपने झूठ बोलना चाहा है छोटी-छोटी बातों पर? क्या आपने चोरी की है? होता है, ये होता है. हम लगातार झूठ बोलते हैं. पर दिन और रात मिलाकर एक वक्त होता है, जब हम सच बोल रहे होते हैं. इतना सच कि वो हम खुद से भी नहीं बोलना चाहते. ये वक्त आता है जब हम लैपटॉप हाथ में लिए इंटरनेट पर सर्च कर रहे होते हैं. उस वक्त हम हरिश्चंद्र की प्रतिमूर्ति बने होते हैं. हम वो चीजें खोजते हैं, जो हमारे दिमाग का सच है. सेक्स, रेप, धर्म, हत्या, हेल्थ, संबंध सब कुछ के बारे में खोजते हैं. यानी गूगल करते हैं.आज गूगल का बर्थडे है
आज गूगल का जन्मदिन है. 1998 में गूगल कंपनी 4 सितंबर के दिन बनी थी. तब ये बनी थी लोगों को दुनिया के बारे में ज्ञान देने के लिए. हर चीज़ बताने के लिए. पर 19 साल में स्थिति कुछ और हो गई है. गूगल को लोगों के बारे में ज्यादा पता है. एक किताब आई है Everybody Lies. इसे लिखा है सेठ स्टीफेंस ने. ये पहले गूगल में काम करते थे. एनालिस्ट थे. किताब में इन्होंने गूगल सर्च, फेसबुक सर्च और ट्वीटर सर्च के आधार पर अपनी थ्योरीज़ रखी हैं. कह तो रहे हैं कि ये सारी बातें सच हैं. कह रहे हैं तो मानना ही पड़ेगा.गूगल से सच का रिश्ता
स्टीफेंस कहते हैं कि गूगल के साथ हमारा रिश्ता डिजिटल ट्रुथ सीरम यानी सच बोलवाने वाले ड्रिंक की तरह का है. जो चीजें हम किसी से नहीं कहते, वो गूगल से कह देते हैं. यहां वो गूगल के डाटा की तुलना फेसबुक के डाटा से करते हैं. कहते हैं कि फेसबुक पर हम कुछ अलग होते हैं, गूगल पे अलग. फेसबुक पर सोशल डिजायरेबिलिटी बायस होता है जिसमें हम अच्छा बनना चाहते हैं. गूगल को लेकर हम पर कोई दबाव नहीं होता. तो गूगल के पास लोगों से जुड़ा बहुत डाटा हो गया है. वहां से लोगों का व्यवहार भी प्रेडिक्ट किया जा सकता है.
कयासों से हटकर जीते थे डोनाल्ड ट्रंप. गूगल के खेल-तमाशे
इस बारे में वो एक रोचक घटना का उल्लेख करते हैं. नवंबर 2016 में हुए अमेरिकी प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में हिलेरी क्लिंटन को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. मीडिया ने उनपर मैडम प्रेसिडेंट के नाम से कवर स्टोरी भी बना ली थी. पर डोनाल्ड ट्रंप जीत गए. स्टीफेंस बताते हैं कि गूगल सर्च का जो रेट था, उसके आधार पर ये लग रहा था. हालांकि उस समय ये किसी ने नहीं सोचा था. कहते हैं कि ओबामा के जीतने के बाद काले लोगों के लिए लोगों के मन में गुस्सा बढ़ रहा था. हालांकि ऊपर से सब कुछ ठीक ही लग रहा था. लेकिन ये पता चल रहा था लोगों के गूगल सर्च से. लोग काले लोगों को लेकर जोक्स और अत्यंत भद्दी बातें खोज रहे थे. उनके बारे में खाली नेगेटिव चीजें खोजते. चुनाव में ट्रंप के खड़े होने के बाद ये दर और बढ़ती गई. हालांकि सर्वे में लोग हिलेरी का ही सपोर्ट करते थे, क्योंकि कोई भी एक बड़बोले नेता को सपोर्ट नहीं करना चाहता था. पर लोगों के दिल में कुछ और ही चल रहा था, जिसकी बात स्टीफेंस कर रहे हैं. इसका नतीजा दिखा ट्रंप की जीत में.ये है बिग डाटा
इस डाटा को बिग डाटा कहा जाता है. इसमें स्टीफेंस ने कुछ रोचक लेकिन शॉक करने वाली बातें भी बताई हैं. मसलन इंडिया में सबसे ज्यादा सर्च होता है कि 'मैं अपनी बीवी का....', शॉक फैक्टर ध्यान में रख के पढ़िएगा. 'मैं अपनी बीवी का दूध पीना चाहता हूं'. शॉक और भी लगेगा अभी. रेप और मोलेस्टेशन आज की दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. पर गूगल सर्च में महिलाएं रेप से जुड़ा पॉर्न मर्दों की तुलना में दो गुना ज्यादा खोजती हैं. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि औरतें रेप के लिए उत्सुक हैं. ये दिमाग में चलने वाली बातों की बात हो रही है. सेक्स सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली चीजों में से एक है. पर सबसे ऊपर नहीं है.क्या खोजते हैं मर्द और औरत
मर्द अपने लिंग के साइज पर बहुत खोजबीन करते हैं. कुछ को तो गूगल पर इतना भरोसा होता है कि वो उसी से अपना साइज पूछते हैं बजाय कि खुद नाप लें. वहीं औरतें भी योनी को लेकर उत्सुक रहती हैं. वो उसकी स्मेल की बहुत चिंता करती हैं. दूसरी मजेदार बात ये है कि औरतें पुरुषों के लिंग के साइज को लेकर बहुत कम सर्च करती हैं. वहीं मर्द भी योनी की स्मेल को लेकर बहुत कम सर्च करते हैं.
किताब कहती है कि हम गूगल से सच कहते हैं. गूगल ट्रेंड्स ने की मदद
स्टीफेंस ने डाटा साइंटिस्ट के तौर पर सबसे पहले गूगल ट्रेंड्स की मदद ली. इसमें अलग-अलग समय पर अलग-अलग जगहों पर हो रहे गूगल सर्च की फ्रीक्वेंसी के बारे में पता चलता है. इसके बाद उन्होंने गूगल एडवर्ड्स की मदद ली जो सर्च की वास्तविक संख्या बताता है. इसके बाद उन्होंने विकीपीडिया डाउनलोड कर लिया. फेसबुक, पॉर्नहब, और ट्विटर की भी मदद ली. पॉर्नहब ने तो खुशी-खुशी सारा डाटा बता दिया. हर सर्च और हर वीडियो. इसके बारे में उन्होंने डिटेल में लिखा है. इसके लिए भी किताब खरीदनी होगी. उन्होंने अमेरिका की हेटसाइट स्टॉर्मफ्रंट की भी मदद ली है. इस पर नफरती लोग अपनी बातें लिखते हैं.
लेखक ने अपनी किताब में कई जगह करीब 10 साल पहले आई किताब फ्रीकोनॉमिक्स का जिक्र किया है.
बहुत खजाना है किताब में
किताब मार्क्स, फ्रायड, पॉपर, अरस्तू से लेकर सोशल साइंस और पॉलिटिक्स सबको छूती है. ये लोगों के बेडरूम में भी घुस जाती है. पर ये किताब जितनी शानदार हो सकती थी, उतनी नहीं हो पाई है. बहुत सारा डाटा और कहानियां इधर-उधर से ली गई हैं, जो कहीं-कहीं बोझिल हो जाती हैं. हालांकि स्टीफेंस दूसरी किताब भी लिख रहे हैं इसी विषय पर. तो समझा जा सकता है कि कुछ व्यावसायिक मजबूरियां रही होंगी उनकी. 32 साल के हैं वो. अपने किताबी अनुभव के बारे में उन्होंने 10 साल पहले आई किताब फ्रीकोनॉमिक्स का जिक्र कई जगह किया है. वो किताब भी बड़ी अजीब सी रोचक हुआ करती थी उस वक्त. ये उसके लेवल को मैच नहीं कर पाए हैं पर अपनी क्षमता के साथ न्याय किया है. सबसे बड़ी बात ये है कि हो सकता है कि स्टीफेंस भी झूठ बोल रहे हों. अब इनके किताब लिखने के दौरान इनके किए गूगल सर्च पता चलें तो बात बने. हालांकि इनके मुताबिक 13 महीने किसी साधु की तरह रहकर इन्होंने किताब लिखी है. पर बढ़िया प्रोडक्ट है ये. मजेदार है. पढ़नी चाहिए. बुक का नाम: Everybody Lies लेखक: सेठ स्टीफेंस प्रकाशन: Harper collins कीमत: 2001 रुपएये भी देखें:
बुक का रिव्यू 'दी लल्लनटॉप' के लिए ऋषभ ने किया है.
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