अस्थिरता के कारण एक साथ काफी निवेशकों के मार्केट से निकल जाने के कारण क्रूड ऑयल (Crude Oil) के दामों में काफी उतार चढ़ाव देखा जा रहा है. खास तौर से हेज फंड्स और स्पेक्युलेटर्स के हाथ पीछ खींच लेने की वजह से पिछले साल के मुकाबले तेल के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से तेल कंपनियों को तेल की खरीदारी करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है. बताया जा रहा है कि इन सब कारणों के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price) में बड़ा उछाल आ सकता है.
पेट्रोल-डीजल का गंदा काम अब शुरू हुआ है
निवेशक छोड़ रहे हैं ऑयल मार्केट. बताया जा रहा है कि तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है.


अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनो में व्यापारिओं और फंड मैनेजर्स को क्रूड आयल मार्केट से निकलते हुए देखा गया है. दरसअल, अस्थिरता के चलते कच्चे तेल के दामों में लगातार बड़ा उतार-चढ़ाव हो रहा है. इसकी वजह से निवेशक अब क्रूड ऑयल मार्केट में निवेश करने से कतरा रहे हैं. इस वजह से ऊर्जा, ऑयल एंड गैस, फूड एंड बेवरेज जैसे सेक्टर्स की कंपनियां तेल की खरीदारी नहीं कर पा रही हैं और उनके ऊपर अच्छा खासा-असर पड़ा है.
रिपोर्ट के अनुसार ऑयल मार्केट से निवेशकों के बाहर जाने के कारण ग्लोबल ऑयल क्राइसिस लगातार बढ़ता जा रहा है. रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई की वजह से क्रूड ऑयल के दामों में अस्थिरता बहुत बढ़ी है. एनर्जी एनालिस्ट अर्जून मूर्ति ने अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को बताया,
अस्थिरता से बुरा असर"दामों में अस्थिरता की वजह से कैपिटल एक्सपेंडिचर की बढ़त देरी से हो रही है. जब अस्थिरता बढ़ती है, तब ऑयल कंपनियों का प्राइस फोरकास्ट पर से भरोसा कम हो जाता है. आने वाले समय में ये अस्थिरता नए Capex (Capital Expenditure) को जस्टिफाई नहीं कर पाएगी."
रिपोर्ट्स के अनुसार कई सारे बैंकों, उत्पादकों और निवेशकों ने ऑयल मार्केट से निकलने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि कीमतों में अस्थिरता की हालत ऐसी हो गई थी कि एक दिन दामों में खूब गिरावट देखी गई तो दूसरे दिन खूब बढ़ोतरी.
शींडर इलेक्ट्रिक की तरफ से जुलाई में किए गए सर्वे के मुताबिक, इस साल तेल के दामों में अस्थिरता की वजह से बिज़नेस पर काफी बुरा असर पड़ा है. सर्वे के अनुसार, 24 फीसदी कंपनियों ने इस बात को माना है. वहीं 43 प्रतिशत कंपनियों ने ये कहा कि
उनके एनर्जी बजट पर इस अस्थिरता से बहुत असर पड़ा है, जो कोविड महमारी के कारण पहले से ही प्रभावित था.
इधर 17 प्रतिशत कंपनियों ने ये कहा की अब उनको हेजिंग करने में ना के बराबर भरोसा रह गया है. ऊर्जा के दामों का इतना बढ़ जाने से वसूली, उत्पादन और बजटिंग करने की प्रक्रिया में असंतुलन आ गया है. और इस बात से कंपनियों को काफी मुश्किलें हो रही हैं.
(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं शिवानी ने लिखी है.)
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