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कौन हैं श्री सौरभ?

सौरभ एक बातूनी बालक है. उसे लगता है कि बात में ही बात होती है, वर्ना किसी में क्या बात होती है. तो सब सौरभ से और सौरभ सब से बात करता है. फिर एक दिन, एक बात आई. सौरभ यूं ही सबको बताता रहता है, सिनेमा के किस्से, इश्क के मसलों का इलाज, जिंदगी के दुखों को दुचरने के तरीके. तो जरा ढंग से बताए. अरे कद्दू कटे तो सबमें बंटे, कोई यूं ही नहीं कह गया न. तो मितरों के कहने पर सौरभ ने सबके सवालों के जवाब देने शुरू कर दिए. आपके पास भी कोई सवाल हो तो पूछिए. प्रेमी नहीं बन रहा. जीवन में कुछ अच्छा नहीं लगता. पेट साफ नहीं होता. हीरोइन की याद आती है. हीरो से शादी करनी है. फिल्म का मतलब समझना है. मतलबी लोगों से दूर रहना है. पास आना है. सास को मनाना है. और ऐसे ही हजारों हजार सवाल. प्रॉमिस नहीं करता, एक्शन लेता हूं. 100 परसेंट गारंटीड इलाज. 32 साल से एक ही पते पर.

हां, वो सब तो ठीक है, पर सवाल ये है कि सौरभ कौन है…

सौरभ एक सुदर्शन युवक है. सुदर्शन एक चैनल है, जिस पर धार्मिक कहानियां आती हैं. कहानियां बरसों बरस चलती हैं. बरस उम्र का एक पैमाना है. मगर पैमाने में तो शराब भरते हैं. शराब सेहत के लिए बुरी है. सेहत तो सोना चांदी खाने से आती है. पर खाना आजकल नसीब में कहां. नसीब तो अमिताभ बच्चन का था. बच्चन अभिषेक भी है. पर अभिषेक तो सलमान खान का हुआ. प्रेमरतन धन पायो में. धन तो शोभन वाले बाबा ने भी पाया था, पर सरकार न खोज पाई. पाई गणित का एक टर्म है. हमें न तो गणित आती है, न ही टर्म्स कंडिशन समझ आते हैं. समझदार को इशारा कैसा. इशारों इशारों में तो दिल दिया जाता है. दिल अपना होता है और प्रीत पराई. जब तुझ संग प्रीत लगाई. तो आन मिलो सजना. पर सजना संवरना तो जवानी का खेल है. खेल तो सचिन तेंदुलकर खेलता था. सचिन गाता भी था, तब जब वह देवबर्मन था. देव वैसे आनंद भी थे. मगर आनंद को तो कैंसर हो गया था. कैंसर युवा को हो तो ज्यादा बुरा लगता है. और न हो तो युवा सुदर्शन होता है. और सौरभ तो सुदर्शन युवक है ही.

कैसे पूछें सौरभ से सवाल

सिंपल है यार. ‘सवाल दागो’ पर क्लिक करो तो खुलेगी एक खिड़की. इसमें होंगी तीन चीजें.

1. डायरेक्ट लॉग-इन फेसबुक/जीमेल से: आपके सवाल के साथ दिखेगा आपकी फेसबुक या जीमेल प्रोफाइल वाला नाम.

2. साइन अप: FB या जीमेल से लॉग-इन नहीं करना? कोई बात नहीं. एक ईमेल अड्रेस डालो, रापचिक सा यूजरनेम लिखो, पासवर्ड सेट करो और बन गया ‘दी लल्लनटॉप’ पर आपका फ्रेश अकाउंट. इसका आपके फेसबुक अकाउंट से कोई लेना देना नहीं. और गुरु साइन-अप एक ही बार करना पड़ता है, मजा बार-बार मिलता है. अगली बार बस लॉग-इन में जाकर यूजरनेम-पासवर्ड डालो. पूछ डालो, जो मन में है.

3. मैं गुमनाम रहना चाहता हूं: कोई परेशानी-समस्या है और नाम बताते हुए लाज आती है? कोई दिक्कत नहीं. स्वागत करते हैं हम आपका. बस इतना करो कि ‘मैं गुमनाम रहना चाहता हूं’ के बॉक्स पर टिक कर दो. उसके बाद भी लॉग-इन तो करना पड़ेगा, लेकिन भगवान कसम कह रहे हैं, आपका नाम किसी को नहीं बताएंगे. गंगा कसम.

सौरभ द्विवेदी

thelallantopsd@gmail.com

सौरभ द्विवेदी बचपन से बाबा बनना चाहते थे. ऐसा बाबा जो पोंगाओं का चोंगा उतार दे. नाम भी सोच रखा था. एंटी बाबा. पर पत्रकार बन गए. सिनेमा और सियासत को भरपूर जिया. और अब यहां इस अवतार में सामने हैं. जो मन आए पूछ लीजिए. क्योंकि पूछेंगे नहीं तो पप्पू बने रहेंगे.