Submit your post

Subscribe

Follow Us

इस एक बयान की वजह से BJP यूपी चुनाव हार जाती, अगर किसान वोटबैंक होते

यूपी इलेक्शन मोड में है. टिकट बंट रहे हैं, रैलियां हो रही हैं, वादे हो रहे हैं और वादों के सहारे वोट-बैंक साधे जा रहे हैं. ये वो दौर है, जब ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया, दलित, मुस्लिम, बेरोजगार, नौकरीवाले… सब गोहराए जा रहे हैं. बस एक ही है जिसकी बात कहीं नहीं हो रही. किसान. वो किसी के लिए वोट-बैंक नहीं हैं. उनके लिए कभी इतना भी नहीं किया गया कि चुनाव के वक्त किसी को उनसे आकर्षण की उम्मीद हो.

खैर, यूपी के भदोही से बीजेपी सांसद और किसान मोर्चे के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह को किसानों की याद आई है. तीसरी बार सांसद बने वीरेंद्र सिंह ने अपने ‘भाइयों’ के लिए कलेजा चीरने वाली बात कही है. पढ़िए…

‘नोटबंदी की वजह से किसानों को कोई तकलीफ नहीं हुई है. उल्टा नोटबंदी की वजहह से तो उनकी आलीशान शादियां करने और शराब पीने जैसी उनकी फिजूलखर्ची बंद हुई है. नोटबंदी का सबसे बड़ा फायदा ये हुआ है कि इसने किसानों में बचत की आदत फिर से डाल दी है वरना लोन लेने की आदत ने उन्हें खुले हाथ से खर्च करने की आदत डाल दी थी. वो सोचते थे कि चाहे जितना कर्ज ले लो, बाद में माफ हो जाएगा.’


सच कहता हूं. अगर यूपी में किसान भी वोट-बैंक होते न, तो बीजेपी ये विधानसभा चुनाव एकतरफा हार जाती.

पर अफसोस. किसान किसी की गुडबुक में नहीं हैं. वीरेंद्र जी, किसानों का खर्च ही क्यों, उनकी तो पूरी जिंदगी ही फिजूलखर्च है. वो किसके लिए खुद को खपाते हैं? दूसरों के लिए? देश के लिए? अगर ऐसा है, तो वो गैर-जरूरी खर्च कर रहे हैं. कर्ज में पैदा होने वाला किसान जिंदगीभर कर्ज में एड़ियां रगड़कर आखिर में कर्ज में ही मर जाता है. जिस कर्ज के माफ करने की आप बात कर रहे हैं, वही कर्ज किसानों की जान ले लेता है. फिर सरकारें आती हैं और बचत का पूरा ध्यान रखते हुए मुआवजे में 100-50 रुपए के चेक बांटती हैं.

यूपी के एक किसान को मिला 100 रुपए का चेक
यूपी के एक किसान को मिला 100 रुपए के मुआवजे का चेक

 

महाराष्ट्र के एक किसान को मिला 80 रुपए के मुआवजा का चेक
महाराष्ट्र के एक किसान को मिला 80 रुपए के मुआवजा का चेक

वीरेंद्र सिंह की बात बिल्कुल सही है. अरे इससे ज्यादा फिजूलखर्ची क्या होगी कि खुदकुशी के लिए जहर और फांसी की रस्सी पर पैसे खर्च करते हैं. अरे मरना ही है, तो कुएं में डूब जाओ. सस्ता, सुंदर, टिकाऊ तरीका. किसान भी खुश, वीरेंद्र सिंह भी खुश और सरकार भी खुश. नाहक ही सरकार को दोष लगाने का मौका देते हैं.

अरे हां, वीरेंद्र सिंह ने शास्त्रों का भी तो हवाला दिया. देखिए न, किसानों को कोसने के चक्कर में वो बताना तो भूल ही गया. उन्होंने कहा था,

‘शास्त्रों में हमें सब कुछ संयम के साथ खर्च करना सिखाया गया है. यही काम नोटबंदी ने कर दिखाया है. इसने फिजूलखर्ची पर रोक लगाई है. पूंजीवाद ने किसानों को कर्ज लेकर आलीशान शादियां करने की आदत डलवा दी है. एक दावत में आखिर कितना खर्च आता है? ज्यादातर पैसा तो दिखावे, शराब और पटाखों पर खर्च किया जाता है. अब इस पर रोक लगी है. लोगों ने मोटर साइकिलें चलानी शुरू कर दी थीं, लेकिन नोटबंदी के बाद से लोगों की आदत में सुधार आया है और उन्होंने पैदल चलना शुरू कर दिया है.’

vire

क्यों मजाक करते हैं सरकार! सीधे-सीधे कह दीजिए न कि आप हमें घुटनों पर लाना चाहते हैं. और घुटने क्या, हम तो जुबान के सहारे घिसटने को तैयार हैं, जैसे जगन्नाथ की कथा में उनके दर्शन करने जा रहा आदमी करने लगता है. आप एक बार रजा तो कीजिए. हम सब करने को तैयार हैं हुजूर-ए-आला. बस, हड्डियों के ढांचे पर खाल लिए घूमने वाले किसानों के बारे में ऐसे मजाक न किया कीजिए.

बाइ द वे, सांसदजी का हलफनामा बताता है कि वो पेशे से किसान हैं और करोड़पति हैं.


ये भी पढ़ें:

टमाटर बेच नहीं पाए, तो सड़कों पर फेंक दिए, ये किसानों का खून है, पसीना मिक्स

जिंदा किसान ने लिवर, आंखें और दिल डोनेट कर बचाईं 6 जानें

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

ग्राउंड रिपोर्ट

यूपी इलेक्शन में पार्टियां जीतेंगी तो इसलिए, और हारेंगी तो इसलिए!

चारों प्रमुख दलों को एग्जाम से पहले क्वेश्चन पेपर पढ़ना हो तो यहां आए.

UP के उस ज़िले से ग्राउंड रिपोर्ट, जहां चारों विधायक समाजवादी पार्टी के हैं

नोटबंदी की वजह से क्या ये विधायक इस बार हार जाएंगे. या फिर ध्रुवीकरण बचा ले जाएगा.

वरुण गांधी के सुल्तानपुर से UP इलेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट

क्या अखिलेश ने काम किया है? क्या नोट बैन से लोग नाराज़ हैं?

मैनपुरी से ग्राउंड रिपोर्ट 2: किशनी और करहल विधानसभाओं का हाल

UP चुनाव: मुलायम के गढ़ में क्या है माहौल?

UP इलेक्शन की पहली लल्लनटॉप ग्राउंड रिपोर्ट: सपा के गढ़ मैनपुरी से

चार सीटें हैं, फिलहाल चारों पर सपा काबिज है. और इस बार?

पॉलिटिकल किस्से

इंडियन पार्टियों के चुनावी नारों की कथा, इससे बेस्ट आज कुछ नहीं पढ़ेंगे

किस-किस ने कब क्या नारे गढ़े और क्यों गढ़े. जानकर सबकी पॉलिटिक्स समझ आ जाएगी.

कहानी उस कत्ल की, जिसने यूपी में माफियाराज स्थापित कर दिया

सारे गैंगस्टर एक ही गैंगवार से पैदा हुए थे.

यूपी का वो मुख्यमंत्री, जो रिजाइन कर रिक्शे से घर चला गया

पूर्वांचल का गांधी, जिनका नाम व्यापम में आया.

यूपी के इस मुख्यमंत्री की बहू सरकार के फैसले बदल देती थी!

यूपी की राजनीति में बहुएं पीछे तो नहीं ही रही हैं.

यूपी का वो मुख्यमंत्री, जिसका करियर अमिताभ बच्चन ने खत्म कर दिया

डॉक्टर ने आराम करने को बोला तो इस नेता ने कहा कि हेमवती समोसा खाने के लिए पैदा नहीं हुआ है.