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नोटबंदी क्या हुई, गुजरात के इस बैंक में नोटों की बहार आ गई

नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को जमा करके नए नोट जारी करने की पूरी कवायद ढंग से हो, इसके लिए रिज़र्व बैंक ने क्या नहीं किया. दर्जन के हिसाब से रोज़ नोटिफिकेशन्स निकाले. आईडी मांगी. ऊंगली पर स्याही लगाई. पूरी कवायद कैमरे में रिकॉर्ड की. बहुतेरे प्रयास. लेकिन हिन्दुस्तानी आदमी जुगाड़ से अपना काम न निकाल ले जाए तो हिन्दुस्तानी कहलाएगा कैसे !

नोटबंदी के लगभग तुरंत बाद से ही ऐसी ख़बरें सामने आईं कि बैंकों में सेटिंग कर के काला धन सफ़ेद किया जा रहा है. इसी सीरीज़ में ताज़ा खबर गुजरात के राजकोट से है. यहां के एक सहकारी बैंक (कोऑपरेटिव बैंक) में बड़ा हेर-फेर हुआ है.

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आंकड़े फाइनेंशियल एक्सप्रेस  के हवाले से

इस बैंक में इतना बड़ा लेन-देन आमतौर पर साल भर में भी नहीं होता है, और ये सब 50 दिन में हो गया. इनकम टैक्स विभाग की अहमदाबाद ब्रांच अब मामले की तह तक जाने की तैयारी में है. उसने बैंक से सारे ज़रूरी दस्तावेज़ मंगा लिए हैं. सब कुछ साफ़ होने में अभी वक़्त लगेगा. लेकिन यहां बड़ा घोटाला हुआ है, इसके पूरे असार हैं.

ज़्यादा गौर उन 25 हाई वैल्यू डिपॉजिट्स पर किया जाने वाला है जिनमें बिना KYC (नो योर कस्टमर) दस्तावेजों के 30 करोड़ रुपए जमा हुए हैं.

नोटबंदी के बाद से इनकम टैक्स विभाग लगातार मनी लॉन्डरिंग को पता लगाने के लिए सर्वे कर रहा है. इस बैंक पर शक तब हुआ, जब ये देखा गया कि यहां खाते खोलने से लेकर पैसे डालने-निकालने तक हर चीज़ में 8 नवम्बर के बाद ज़बरदस्त उछाल आया.

नए खाते:
नोटबंदी के 50 दिनों में यहां साढ़े छह गुना की रफ़्तार से खाते खुले. जो 4551 नए खाते खुले, उनमें से 62 खातों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज है. कई खातों में मिलते-जुलते पते दर्ज हैं. इसके अलावा कई खाते एक दूसरे से लिंक भी हैं.

डॉर्मंट खातों में पैसे की बाढ़:
नोटबंदी के बाद 10 करोड़ जितनी रकम डॉर्मंट बैंक खातों में जमा की गई. जिन खातों में कई महीनों तक कोई ट्रांज़ेक्शन नहीं होता, वो डॉर्मंट हो जाते हैं. माने उनसे लेनदेन पर एक अस्थाई रोक लगा दी जाती है. ऐसे ही एक खाते में (जो कि एक पेट्रोलियम कंपनी का था) में ढाई करोड़ रुपए जमा किए गए.

सिंबॉलिक इमेज
सिंबॉलिक इमेज

पे-इन स्लिप में झोल:
बैंक में कैश जमा करने में इस्तेमाल की गई पे-इन स्लिप्स में भी खूब गड़बड़ी है. इनमें से किसी में भी जमा करने वाले का पैन नंबर नहीं भरा गया है. कई में तो जमा करने वाले के दस्तख़त तक नहीं हैं. इस तरह से जमा हो रहे पैसे का सोर्स छुपाया गया.

अपनों का भला:
नोटबंदी के बाद से बैंक के एक्स डायरेक्टर के बेटे के 30 खातों में कुल एक करोड़ रुपए कैश जमा हुआ है. इन सभी डिपॉजिट्स की ‘पे-इन’ स्लिप्स एक ही इंसान ने भरी हैं. बैंक के वाइस चेयरमैन की मां को इसी बैंक के खातों के ज़रिए 64 लाख रुपए मिले, जो एक ज्वेलर को ट्रांसफर कर दिए गए. इनकम टैक्स विभाग जल्द इन दोनों के बयान दर्ज करने वाला है.

8 नवंबर को जब से ऐलान हुआ कि ‘देशहित’ में देश की 86 फ़ीसदी करेंसी देश के सिस्टम से बाहर कर दी जाएगी, तो उम्मीद की गई कि सरकार की इस नेक मंशा का नतीजा अच्छा होगा. पब्लिक ने भी कुछ दिन तो भयंकर सब्र दिखाया. दिन भर लाइन में खड़े रहे, पर यही कहा कि अच्छा फैसला है. लेकिन ज्यों-ज्यों दिन बीते, नोटबंदी पर एक तरफ सरकार का स्टैंड बदलता दिखा, दूसरी ओर ऐसी ख़बरें भी आनी शुरू हुईं कि कुछ बैंकों में ‘सेटिंग’ कर ली गई है और दनादन बेनामी पैसा स्याह से सफ़ेद किया जा रहा है. लाइन में खड़े लोगों के साथ ये सबसे क्रूर मज़ाक था.

इन मामलों की ठीक से जांच करने के बाद गुनहगारों को सज़ा अगर नहीं मिलती, तो नोटबंदी की पूरी कवायद पर और उससे ज़्यादा देश के बैंकिंग सिस्टम पर से लोगों का भरोसा उठाना तय है.


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