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हिंदुत्व के इतिहास में गाय के ऊपर इससे ज़्यादा बेवकूफ़ी भरा वीडियो नहीं बना है

आलम ये है कि हिंदुस्तान में इस वक़्त हर इंसान की दो माएं हैं. एक वो जो असल मां हैं और एक वो जिसे मानना आपकी मजबूरी भी हो सकती है. क्यूंकि नहीं माना तो अखबार में आपकी तस्वीर होगी और आपका नाम #NotInMyName के जमावड़े में ज़ोर-ज़ोर से लिया जा रहा होगा.

गाय की बातें खूब होती हैं. गाय नई रजनीकांत बन गई है. सवाल होता था – “रजनीकांत ने सवा एकड़ का एक खेत खरीदा. उस खेत के चारों कोनों पर एक-एक कुआं खुदवा दिया. बताओ क्यूं?” जवाब मिला – “क्यूंकि रजनीकांत कैरम खेलना चाहता था.” जब कहीं ठण्ड पड़े तो कहा जाए कि रजनीकांत ने अपना फ्रिज खुला छोड़ दिया. जब गरमी लगे तो कहा जाये कि रजनीकांत ने हीटर ऑन करके छोड़ दिया. बारिश हो तो कहा जाए कि रजनीकांत के बाथरूम में शॉवर खुला छूट गया. ये मज़ाक था. लेकिन ऐसी ही बातें जब गायों के बारे में कही गईं तो पूरी गंभीरता के साथ.

न्यूज़ ऐंकर खड़े हुए, बैठे हुए, चलते हुए, सोते हुए, टीवी पर करोड़ों लोगों के सामने बता रहे थे कि गाय इस दुनिया का एकमात्र जानवर है जो ऑक्सीजन लेता है और देता है. माने इसके शरीर में कुछ हो ही नहीं रहा है. इंसानी शरीर में जब मेटाबोलिज़्म होता है तो उस पूरे प्रॉसेस में कई प्रोडक्ट तैयार होते हैं. इसमें एनर्जी और कार्बनडाई ऑक्साइड मुख्य हैं. मेटाबोलिज़्म असल में वो प्रोसेस होता है जिसके ज़रिये हमारा खाया खाना और पिया गया पानी एनर्जी में बदलता है. हम जब ऑक्सीजन अन्दर लेते हैं तो खून में शामिल रेड-ब्लड-सेल ऑक्सीजन सोख लेते हैं. और मेटाबोलिज़्म से तैयार हुई कार्बन-डाई-ऑक्साइड वो बाहर भेज देते हैं. लेकिन ‘माननीयों के अनुसार’ गाय के साथ ऐसा नहीं होता है. टीवी चैनलों पर खूब जोर से ये अफ़वाह सच्चाई बनाकर प्रसारित की जाती है.

अब ये मज़ेदार वीडियो सामने आया है. ये सबूत है इंसानी सोच के क्रिएटिव चरम का.

वीडियो में कुछ पॉइंट्स दिए गए हैं:

#1. गाय की सींगें रेडियोऐक्टिविटी को सोख लेती हैं और उन्हें फैलने नहीं देतीं.

#2. गाय की सींगों के बीच अगर आप एफ़एम रेडियो रखिये तो आपको कोई भी चैनल नहीं सुनाई देगा क्यूंकि सींगों ने रेडियो वेव्स को सोख लिया होगा.

#3. रेडियो को सींगों के बीच रखने के बाद जो आवाज़ निकलेगी वो सिर्फ़ एक लम्बी ‘हम्म्म्म्म’ की आवाज़ आएगी. और ये आवाज़ ॐ के उच्चारण सी होगी.

#4. गाय का गोबर सरकार चाहे तो देश के उत्थान में काम ला सकती है. परमाणु प्लांट्स को प्लूटोनियम की ज़रुरत पड़ती है. ये प्लूटोनियम हमें गाय के गोबर से मिल सकता है.

#5. अगर सरकार ध्यान दे तो हम गोबर में से प्लूटोनियम निकाल कर उसे इम्पोर्ट करने की मुसीबत से बच सकते हैं.

#6. गोमूत्र से कैंसर सही हो जाता है.

#7. वीडियो में दिखाए जा रहे गोभक्त के एक दोस्त थे जेम्स. उन्हें ब्लड कैंसर था. उन्होंने गोमूत्र पिया और उनका कैंसर ठीक हो गया. हालांकि वो दवाइयां भी खा रहे थे लेकिन उनके ब्लड कैंसर ठीक होने की असल वजह गोमूत्र ही थी.

#8. अभी हाल ही में अहमदाबाद में ईबोला वायरस आने की खबर आई थी. सांप, जिसे हिन्दू पूजते हैं, अपनी छोड़ी गई सांस से इबोला जैसे वायरस मार सकते हैं.

#9. अगर आप इस पॉइंट तक सकुशल पहुंच गए हैं और अपने अपने सर को दीवार में मार कर अन्दर का भेजा निकाल कर उसे तवे पर फ्राई कर लोन-मिर्च छिड़ककर मेहमानों के सामने नहीं परोसा है तो आपके साथ मेरी संवेदनाएं हैं. आइये आगे बढ़ते हैं.

इन सभी बातों के बारे में एक ही जवाब है. ये सब ग़लत है. आपको बेवकूफ़ बनाया जा रहा है. गाय की संग के बीचों बीच रखा गया एफ़एम रेडियो अगर ‘हम्म्म्म’ की आवाज़ निकाल रहा है तो उसकी बैट्री बदलिए या फिर सही करवाइए. सबसे अव्वल बात तो ये कि अगर आज के टाइम में आप रेडियो रखते हैं तो आपको कुछ दशक पहले ही मर जाना चाहिए था. कायदे से इतनी उम्र तो बस बरगद के पेड़ों या आडवाणी जी की ही होती है. 

ये बातें, बातें कम और चुटकुले ज़्यादा मालूम दे रही हैं. गोमूत्र से ब्लड कैंसर ठीक हो गया? और हुज़ूर-ए-आला को ये भी मालूम था कि जो दवाइयां खाई जा रही थीं उन्होंने असर नहीं किया बल्कि सारा काम गोमूत्र का ही था. सांप जो सांस छोड़ते हैं उससे ईबोला सही हो जाता है? ई बोला ही काहे? बोलने से पहले सोचा काहे नहीं?

गजब क्रिएटिविटी है भाईसाब! पहले गाय को मां बनाया. अब उसके बारे में फैक्ट्स भी बना दिए. फिर कहते हैं कि विश्वास करो नहीं सड़क पर ही पेले जाओगे. वीडियो बनेगा, सबमें बंटेगा. और जो पेलेगा उसे राजशाही का साथ प्राप्त होगा और आने वाली नस्लें उन्हें ईवीएम के एक बटन के आगे पायेंगी.

मेरा देश बदल रहा है, गाय के मूत से कैंसर ठीक कर रहा है.

ॐ शांति!


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