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हर किसी को ऐसी नफरत करनी चाहिए, जैसी ये आदमी केजरीवाल से करता है

नफरत अच्छी चीज नहीं होती. छुटपने से अब तक यही पढ़ाया-सिखाया गया है न. बाप ये सब चीजें समझाने में खर्च नहीं होते थे. उनके पास तो 80% नंबर जैसी वैश्विक समस्याएं थीं, जो बलप्रयोग के बावजूद स्थिर रहती थीं. लेकिन डस्सू लोगों के पास मैटरों की कमी नहीं होती है. पर अब ये यूनिवर्सल ट्रुथ बदल गया है.

नफरत बहुत अच्छी चीज होती है. हर किसी को किसी न किसी से जरूर करनी चाहिए. लेकिन सुबेदार चौहान की तरह करनी चाहिए.

सुबेदार चौहान. इन्हें नहीं जानते? अरे बढ़िया आदमी हैं. ‘मुकद्दर का सिकंदर’ में अमिताभ बच्चन जितनी शिद्दत से कहते हैं, ‘तू मसीहा मोहब्बत के मारों का है,’ उसी आवाज में महसूस कीजिए. ‘सुबेदार चौहान मसीहा नफरत के मारों के हैं.’ वो अरविंद केजरीवाल से नफरत करते हैं. केजरीवाल के दुख में सुखी होते हैं. उनके सुख में दुखी भी होते होंगे.

केजरीवाल की पार्टी पंजाब में हार गई. वो और उनकी पार्टी एक ही हैं. बीच में कोई भी थिन चीज नहीं है. हमारे सुबेदार चौहान बहुत खुश हुए. इतने खुश कि भंडारा दे रहे हैं. 19 तारीख को. संडे है न उस दिन. लोगों की सहूलियत के हिसाब से दिन चुना है उन्होंने. समय रखा है दोपहर 1 बजे का. वो कोई दिखावा नहीं करना चाहते. दिल से नफरत करते हैं, तो दिल से भंडारा दे रहे हैं. रखने को शाम 4 बजे का भी टाइम रख सकते थे. भले मानुष तब तक डकारें निकाल चुके होते हैं. अब कोई भंडारे के चक्कर में गोधूलि बेला तक भूखा तो बैठा नहीं रहेगा. लेकिन वो ऐन खाने के वक्त खिलाना शुरू करेंगे.

एक बार फिर उनका पोस्टर देखिए. धर के शेयर हो रहा है वॉट्सऐप और सोशल मीडिया पर.

bhandara

सुबेदार जी ने कितने इंकलाबी फॉन्ट में लिखवाया है ‘केजरीवाल की पंजाब में हार की खुशी में विशाल भंडारा’. ऐसा पुनीत कार्य मंदिर में ही होना चाहिए. सुबेदार ने इसका भी ध्यान रखा.

उनके सिर पर टोपी फब रही है. उनके चेहरे की चमक दांतों के प्रकाश को फीका कर रही है. आई रिपीट, हर किसी को किसी न किसी से सुबेदार चौहान की तरह नफरत करनी चाहिए. उनके नफरत करने की वजह से 19 तारीख को न जाने कितने लोगों को खाना मिलेगा. भंडारे में वो रिक्शेवाला भी खाएगा, जिसका आधा दिन बीड़ी-खैनी पर निकलता है. और वो भंडारा-प्रेमी, जो तीनों बार नए पत्तल में ही खाते हैं. शर्बत की व्यवस्था हुई, तो हो सकता है आदमी गाड़ी रोककर भी चला आए.

सुबेदार जी, आपकी ये नफरत बनी रहे. बस भंडारे के वादे से मुकरिएगा मत. हर हर महादेव.


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