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प्रियंका की 'बे-वॉच' पामेला एंडरसन के बे-वॉच से हमेशा पीछे रहेगी

91 में जिस किसी ने होश संभाल लिया था, उसने एक बार बे-वॉच ज़रूर देखा और जिसने एक बार देखा, वो दोबारा देखने से खुद को नहीं रोक पाया. बे-वॉच का कल्ट कुछ ऐसा था कि निरे देहाती जमाने को अंग्रेजी घोट के पिलाने में रैपिडेक्स जलन खाती थी. आदमी अंग्रेजी बोलता भी था तो एकदम अमरीकी एक्सेंट में. इसीलिए बे-वॉच के नाम पर जो कुछ होता है, हमारे ज़ेहन में एक हल्की गुदगुदी पैदा करता है. इतना नॉस्टेल्जिया तो शक्तिमान ने नहीं जना होगा जितना बे-वॉच ने. ताज़ा किस्त आ रही है ‘बे-वॉच’ (फिल्म) की जिसकी चर्चा हिंदुस्तान में है. हल्ला इसलिए है क्यूंकि इसमें प्रियंका चोपड़ा होंगी. लेकिन ट्रेलर ने मायूस किया. वजह? ट्रेलर में प्रियंका की झलक भर दिखी. प्रियंका के फैन मायूस हुए. अच्छी बात ये है कि अब उनकी शिकायत दूर हो गई है. बे-वॉच का नया पोस्टर आया है जिसमें प्रियंका ही प्रियंका हैं.

बे-वॉच फिल्म के हैंडल से आज फिल्म का पोस्टर ट्वीट किया गयाः

फिल्म में दिखेगा कि ड्वेन जॉनसन (ये रॉक का असली नाम है), अपनी लाइफ गार्ड्स के साथ लॉस एंजेलिस (ये हॉलीवुड का असली नाम है) के तट पर कैसे लोगों की ज़िंदगियां बचाते हैं. जी हां. बे-वॉच की कुल जमा कहानी हमेशा से यही रही है. इसके अलावा जो भी होगा, 25 मई को पता चल ही जाएगा. लेकिन कम ही लोग इस बात पर विश्वास कर पाएंगे कि फिल्म असली बे-वॉच (टीवी सीरीज़) के तिलिस्म के करीब पहुंच पाएगा.

बे-वॉच यानी बदलते इंडिया के पॉप्युलर पॉप कल्चर का हिस्सा

भारत में एक वक्त सरकार ने सब कुछ कंट्रोल किया. स्टील बनाने वाली कंपनी सरकार की, उस स्टील से बनने वाली कार सरकार की, और मुद्दतों तक सिफारिशें ठेलने के बाद मिली कार घर लाने की खुश-खबरी देने के लिए जो फोन आप इस्तेमाल करते थे वो भी सरकार का. असल में सरकार में ही ‘कार’ है इसलिए उससे जुड़ा सब कुछ सरकार का तो होना ही था. आपके ड्राइंग रूम में रखा टीवी भी ‘सरकार के भोंपू’ से ज़्यादा कुछ नहीं था – दूरदर्शन पर अच्छे शो आते थे, लेकिन वही जो सरकार को आम हिंदुस्तानियों के ‘लायक’ लगते.

फिर 91 में मजबूरी और हिम्मत का मिक्सचर बना और नरसिम्हा राव ने हिंदुस्तान के दरवाज़े दुनिया भर के लिए खोल दिए. 91 के बदलावों को सिर्फ आर्थिक सुधार कहना उस फिनॉमेना को छोटा करना है. जो दरवाज़ा दुनिया की तरफ खुला, उसमें फॉरेन इंवेस्टमेंट के साथ-साथ ढेरों चीज़ें आईं. उन्हीं में से थे ‘बे-वॉच’ और साथ में प्रातः स्मरणीय पामेला एंडरसन. 

 

BAYWATCH, Nicole Eggert, David Hasselhoff, Alexandra Paul, David Charvet, Pamela Anderson, (Season 3, 1992), 1989-2001
बेवॉच (सीज़न 3)

टीवी मिलना आसान हुआ तो लोगों ने भी एक कदम आगे बढ़कर रंगीन टीवी खरीदा. प्रमोशन पाकर रंगीन टीवी ने एंटीना को तलाक दे दिया – दूरदर्शन डल हो गया था. सौ रुपए महीने में मुहल्ले का हर लड़का टीवी में छतरी वाले का ‘केबल’ देखकर खर्च हो रहा था. दुनिया भर के चैनल दिखने लगे. समाज में दो फांक हो गईं. वो जो केबल वाले थे और वो कुढ़ते थे. कुढ़ने वाले लड़के रात 8 बजे मार्क लिन को सुनते थे और 10 बजे सो जाते थे. जबकि केबल वाली जनता को पसंद आया स्टार गोल्ड. क्योंकि उसी पर बे-वॉच आता था.

बे-वॉच एक ड्रामा सीरीज़ थी. एक बार शुरु हुई तो दस साल तक एक ही फॉर्मेट में चली. कमोबेश एक ही कहानी के साथ. डेविड हैज़लहॉफ लॉस एंजेलिस काउंटी लाइफगार्ड्स की एक टीम को लीड करते हैं. इस बात का ध्यान रखते हैं कि समंदर में नहाते-नहाते कोई डूबने न पाए. और जब कोई लहरों में फंस जाता, तो डेविड की टीम से कोई उसे बचाने जाता – अमूमन पामेला एंडरसन. पामेला लाल स्विमसूट में बीच पर दौड़ते हुए जातीं और पूरी दुनिया उस वक़्त उस आदमी से खार खा रही होती थी जो पानी में डूब रहा था. डूबना हर कोई चाहता था बस शर्त इतनी थी कि बचाने पामेला एन्डरसन आये. 

पैमेला एंडरसन (फोटोःGlamaour)
पैमेला एंडरसन (फोटोः Glamaour)

लेकिन रात को टीवी से चिपके हिंदुस्तानी शार्क के हमले से लोगों को बचाते डेविड को नहीं देखना चाहते थे. न वो पूरा शो ही देखना चाहते थे. वो बस पैमेला को देखने टीवी चलाते. खजुराहो को पीछे, बहुत पीछे छोड़ चुके हिंदुस्तानियों के लिए पामेला को स्विमसूट में देखना किसी दूसरी दुनिया का अनुभव होता. चौपाटी पर जो लोग सिर्फ चाट खा सकते थे, वो लॉस एंजेलिस के बीच पर पैमेला को देखकर अपने अरमान पूरे करते थे.

बे-वॉच ने पॉप्यूलैरिटी के सारे रिकॉर्ड तोड़े. लेकिन चुप्पे-चुप्पे. कोई बताना नहीं चाहता था कि वो बेवॉच देखता है. लेकिन देखते सब थे – दद्दू भी और मोंटू भी.

पामेला हिंदुस्तान में खूब पसंद की गईं. 2010 में जब मुंबई एयरपोर्ट पर उतरीं तो पब्लिक ने घेर लिया. बचाकर ले जाना पड़ा. बिग बॉस के देसी एडिशन में भी उन्होंने शिरकत की.

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मिडिल ईस्ट के लोग बे-वॉच के लिए जेल जाने को तैयार थे

भारत में किसी औरत को बिकीनी में देखने की चाह होना आपके करप्ट होने की निशानी भर थी. लेकिन कुछ देश ऐसे भी थे जहां बे-वॉच को सीधे एक कल्चरल अटैक के तौर पर देखा गया. खाड़ी के कुछ मुस्लिम देशों में लोग बीच पर बिकिनी में दौड़ती लड़कियों को टीवी स्क्रीन पर कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते थे. मानना था कि औरत का बदन जितना ढका रहे, उतना बे-हतर है. मानो औरत न हो कटे फल हों. शो को वहां बैन किया गया. लेकिन शो के मुरीद बे-वॉच की पाइरेटेड कॉपी खरीद कर देखने लगे. हफिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक शो बनाने वाले माइकल बर्क कहते थे कि मुसलमान बे-वॉच देखने के लिए जेल तक जाने को तैयार थे. लेकिन सभी मुस्लिम देशों में ऐसा नहीं था. बे-वॉच मिस्र में टेलिकास्ट हुआ और खूब पसंद भी किया गया.

बे-वॉच 144 देशों में देखा जाता था, 44 भाषाओं में. सीरीज़ कामयाब हुई तो स्पिन ऑफ बना बे-वॉच नाइट्स नाम से. वीडियो फिल्में भी बनीं – ‘बे-वॉच द मूवीःफॉरबिडन पैरेडाइज़’ , ‘बे-वॉचः वाइट थंडर एट ग्लेशियर बे’ और ‘बे-वॉचः हवाइयन वेडिंग’. अब प्रियंका वाली बे-वॉच आ रही है. इसे देखने जाने वाले कई अंकल (और आंटी भी) एक गुदगुदी महसूस करेंगे, जिसकी वजह वो शायद ही किसी को बताएं. बता सकते हैं. कोई ज़ुर्म नहीं है.  


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