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क्या आपको पता है ये 6 क्रिकेटर्स दिव्यांग हैं?

बचपन से सुनते हैं कि स्पोटर्स करना चाहिए. किसी न किसी खेल से जुड़ना चाहिए. स्पोटर्स कल्चर का विकास होना चाहिए. मगर सही मायनों में देखा जाए तो स्पोटर्स सिर्फ फिटनेस के लिए ही नहीं है. नाम और पैसा कमाने का ही जरिया भर नहीं है. इन 6 लोगों की लाइफ से तो ये लगता है कि खेल जीने का जज्बा सिखाता है. एक अनुशासन है जो गिर पड़ने पर रूकने की नहीं, तुंरत उठ खड़े होने और जिंदगी की आंखों में आंखे डाल ये कहने ‘Come Again! कहने का कॉन्फिडेंस है.

#1 लगान फिल्म में कचरा को भूले तो नहीं?

 

बी एस चंद्रशेखर (करियर: 1964-1979)
बी एस चंद्रशेखर (करियर: 1964-1979)

लगान फिल्म के कचरा का कैरेक्टर याद है? और यह भी याद होगा कि वह कैसे अपनी कमजोरी को मजबूती में तब्दील कर लेता है. यह तो एक रील लाइफ स्टोरी है. मगर रियल लाइफ में ऐसा ही कैरेक्टर रहा है- भागवत सुब्रमन्य चंद्रशेखर का. 5 साल की उम्र में पोलियो अटैक पड़ा और दाएं हाथ की कलाई मुड़ गई. मगर चंद्रशेखर ने हार नहीं मानी और इसे अपना हथियार बना लिया. गली क्रिकेट से शुरुआत करते हुए अपनी इसी मुड़ी हुई कलाई से गेंद को यूं टर्न करने लगे कि इंटरनेशनल लेवल तक बड़े-बड़े बल्लेबाजों को खूब छकाया.
1974 में तब की सबसे धाकड़ टीम वेस्टइंडीज इंडिया के दौरे पर थी. पहले मैच में चंदू टीम में थे और 19 साल की उम्र में टीम इंडिया में शामिल हो गए. 16 साल लंबे अपने करियर में चंदू ने भारत के लिए 58 टेस्ट मैच खेले और 242 विकेट झटके. चंद्रशेखर, ईएएस प्रसन्ना,बिशन सिंह बेदी और एस वेंकटराघवन की चौकड़ी इतनी फेमस हुई कि दुनिया भर के बल्लेबाज इनकी गेंदों का सामना करने में नर्वस महसूस करते थे.

 

चंदू के साथ बिशन सिंह बेदी, ईएएस प्रसन्ना औऱ
स्पिन चौकड़ी: चंदू, बिशन सिंह बेदी, ईएएस प्रसन्ना औऱ एस वेंकटराघवन

टीम 1971 में इंग्लैंड दौरे पर थी. ओवल मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ़ 38 रन देकर 6 विकेट ले लिए और पूरी टीम 101 रनों पर सिमट कर रह गई थी. अंग्रेजों से चंदू को खास लगाव था. इसलिए इंग्लैंड के खिलाफ खेले 23 टेस्ट मैचों में इस खिलाड़ी ने 95 विकेट लिए. इस रिकॉर्ड को अनिल कुंबले (19 टेस्ट- 92 विकेट) और बिशन सिंह बेदी (22 टेस्ट-85 विकेट) भी नहीं तोड़ पाए. चंद्रशेखर को साल 2002 में ‘बेस्ट बॉलिंग परफॉर्मेंस ऑफ द सेंचुरी’ का अवॉर्ड भी मिला .

#2 एक मिनट इस पर सोचना जरूर

 

1995 में लेन हटन (बाएं) लंदन के ओवल मैदान पर उतरते हुए
1955 में लेन हटन (बाएं) लंदन के ओवल मैदान पर उतरते हुए

साल 1937 से 1955 तक इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलने वाले लेन हटन की कहानी भी काफी प्रेरक है. 1938 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में 364 रन की पारी खेलकर हटन खुद को साबित कर चुके थे. ये पारी उस दौर की सबसे बड़ी टेस्ट पारी थी. आगे चलकर वे इंग्लैंड के कप्तान भी बने और एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को भी हराया. इसी बीच सेकेंड वर्ल्ड वॉर शुरू हो गया और यह अदभुत खिलाड़ी 6 साल का ब्रेक लेकर वर्ल्ड वॉर में शामिल हो गया.
कमांडो ट्रेनिंग के दौरान उनका बायां हाथ जख्मी हो गया. कई ऑप्रेशन हुए मगर चोट ठीक नहीं हुई. आखिर में उनका टूटा हुआ बाजू गलत ढंग से जुड़ गया और यह दूसरे से करीब दो इंच छोटा हो गया. एक तो क्रिकेट से 6 साल की दूरी और ऊपर से ये हाथ. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ जैसा आप सोच रहे हैं. वापसी करने पर हटन ने और 14 सेंचुरी मारीं. इनमें 3 डबल सेंचुरी भी थीं.

 

#3 टाइगर नाम यूं ही नहीं पड़ा होगा

 

मंसूर अली खान पटौदी
मंसूर अली खान पटौदी

दुनिया भर में टाइगर पटौदी के नाम से मशहूर हुए इस क्रिकेटर को उसके खेल के लिए जाना गया. बड़े से बड़े धुरंधर गेंदबाजों की चमक इनके सामने फीकी पड़ती  थी. 16 साल की उम्र में इंग्लैंड में अपने करियर की शुरुआत कर चुके मंसूर अली खान पटौदी का इंग्लैंड में साल 1961 में कार एक्सीडेंट हो गया. कांच टूटकर उनकी दायीं आंख में घुस गया और हमेशा के लिए रोशनी चली गई. मगर पटौदी ने खेलना नहीं छोड़ा. अपने एक इंटरव्यू उन्होंने कहा था कि शुरू-शुरू में तो जब गेंद सामने आती थी तो एक नहीं दो गेंदें दिखती थीं. जिस पर वे वे हमेशा अंदर की तरफ वाली गेंद पर बल्ला चलाते थे. दायीं आंख को कैप से ढक कर रखते थे. घटना के 6 महीने के भीतर ही पटौदी ने दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला. 21 साल की उम्र में वे कप्तान बन गए जो 2004 तक विश्व रिकॉर्ड रहा. आज भी पटौदी के नाम सबसे युवा भारतीय कप्तान होने का रिकॉर्ड है. देश के लिए 46 मैच खेले. एक ही आंख से देख पाने के बावजूद पटौदी ने उनकी बैटिंग (6 शतक और 17 अर्द्धशतक) और बेहतरीन फील्डिंग से कभी लगने नहीं दिया कि उन्हें कोई परेशानी हो रही हो.

 

#4 पैर कट गया तो क्या, जिंदगी तो अभी बाकी थी

 

मार्टिन गुप्टिल औऱ उनका दुर्घटनाग्रस्त पैर
मार्टिन गुप्टिल औऱ उनका दुर्घटनाग्रस्त पैर

न्यूजीलैंड का यह खिलाड़ी देश के लिए ओपनिंग करता है. 2009 में डैब्यू किया था. आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने के लिए मशहूर गुप्टिल 13 साल के थे जब उनका पैर सामान ढोने वाली लिफ्ट में फंस गया था. पैर की तीन उंगलियां कट गईं. इसके बाद शायद ही कोई क्रिकेटर बनने की सोचे. मगर जैसे ही गुप्टिल ने दोबारा चलना शुरू किया, पहले से ज्यादा मजबूत इरादे से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया. मानों खुद को खुशकिश्मत समझकर इसका बेस्ट यूज करना चाहते हों. अपने पहले ही वनडे मैच में शतक ठोकने वाले पहले कीवी बैट्समैन बने और 2015 वर्ल्ड कप में इनकी नाबाद 237 रनों की पारी से दुनिया में इनका नाम हो गया. अभी IPL में गुप्टिल KXIP का हिस्सा हैं.

 

#5 बिना बॉल-बैट से भी मैदान मार लिया

 

फ्रैंक
अम्पायर फ्रैंक चैस्टर

19 साल की उम्र में अपने पीछे करीब 1000 रन लिए इंग्लैंड के इस क्रिकेटर में असीम संभावनाएं देखी जा रहीं थी. फ्रैंक चैस्टर 1914 में वॉरसेस्टरशायर के लिए खेल रहे थे और पहले विश्व युद्द के दौरान वे बुरी तरह चोटिल हो गए. उनका दाहिना हाथ इतना जख्मी हो गया कि कोहनी के नीचे का हिस्सा हमेशा के लिए काट दिया गया. यह चैस्टर के लिए बहुत बड़ा झटका था. सबने कहना शुरू कर दिया कि अब तो गेम से दूर ही रहना होगा. मगर क्रिकेट के शौकीन इस खिलाड़ी को यह मंजूर नहीं था. चैस्टर मैदान पर उतरे. मगर इस बार अंपायर के कोट में. उन्हें उस दौर के बेस्ट अंपायर्स में गिना गया. इस कटे बाजू के साथ चैस्टर 1924 से 1955 तक 48 टेस्ट मैचों में अंपायरिंग करते दिखे.

 

#6 गेम से ही आई गहराई

 

राहुल शर्मा
राहुल शर्मा

साल 2010 में पंजाब के जालंधर से एक 6’3 फीट लंबा स्पिनर खबरों में आ रहा था. पहले घरेलू क्रिकेट में चमकने के बाद लेगब्रेक गुगली के उस्ताद राहुल शर्मा को जगह मिली थी IPL की टीम पुणे वॉरियर्स में. मुंबई में टीम का कैंप चल रहा था. एक सुबह जब राहुल उठे तो उनका दायीं तरफ से चेहरा सुन्न पड़ा था. छूने पर कुछ महसूस नहीं हो रहा था. इसी बीच राहुल ने एक प्रैक्टिस मैच भी खेला जिसमें इस लेग स्पिनर ने एंड्रयू साइमंड्स को आउट किया. मैच के बाद जब राहुल डॉक्टर से मिले तो पता चला कि उन्हें बैल्स पाल्सी है. यानी वो बीमारी जिसमें चेहरे का एक हिस्सा सुन्न पड़ जाता है और एक तरफ से मुड़ भी जाता है. इस बीमारी से राहुल की दाएं तरफ वाली आंख न तो पूरी बंद हो पाती है और न पूरी खुल पाती है. चेहरा भी हल्का मुड़ा हुआ है. इस बीच राहुल चेन्नई सुपर किंग्स और किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेले. साथ ही इंडिया के लिए भी 4 टेस्ट और 2 T20 मुकाबले खेल चुके हैं. एक टाइम पर इन्हें टीम इंडिया का अगला अनिल कुंबले भी कहा गया.

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