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लांडे, शिवदीप लांडे नाम है हमारा

बिहार कैडर के एसपी शिवदीप वामन लांडे वापस अपने गृह-राज्य महाराष्ट्र जा चुके हैं. ट्रांसफर हो गया उनका. बिहार में मातम मना था. मातम उनके दिलों में भी था जिनका बिहार से कोई लेना-देना नहीं है, पर काम की इज्जत करना जानते हैं. शिवदीप बस एक पुलिस अफसर नहीं, बल्कि कहानियों के पात्र हैं. वैसे अफसर जिनके बारे में जनता बस कल्पना करती थी. सामने ऐसा इंसान देखना अजूबा लगता है.

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शिवदीप लांडे ने अपने फेसबुक पेज पर बिहार के प्रति अपने प्यार को बयान किया था-

Quote 1‘बिहार’ ये महज़ एक राज्य का नाम नहीं है मेरे लिए. पर मेरे जीवन का एक सबसे बड़ा और प्रिय अंश है. हम कहां और किसके यहां पैदा हों ये हमारे वश में नहीं, हमारा नाम भी हमारे होश के पहले तय कर दिया जाता है. बचपन का पहला समझ आने पे हम देश, राज्य, धर्म और विश्वासों के बीच में खुद को पाते हैं.

बचपन से ही मुझे कुछ अलग हट कर करने का जुनून था। अत्यंत अभाव था घर में पर वो मजबूरियां भी कभी मेरे पैरों की बेड़ियां बनने की सफलता नहीं पा सकीं. महाराष्ट के एक प्रसिद्ध कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी और फिक I.R.S. का पदभार भी मुझे बहुत दिनों तक रोक नहीं पाया. 2006 में I.P.S. की सफलता और फिर बिहार को बतौर राज्य मिलना मेरे जीवन का लक्ष्य तय करने वाला था.

बिहार ने मुझे इन आठ वर्षों की नियुक्ति में मुझे बहुत सारी यादें संजोने को दिया है. मुंगेर से तबादले के बाद 6 k.m. तक फूलों से विदा करना, भीषण ठण्ड में पटना से मेरे तबादला में लोगों की भूख हड़ताल, अररिया से तबादले पे 48 घंटों तक लोगों ने मुझे जिले से बाहर न जाने दिया, रोहतास में पत्थर माफियाओं के खिलाफ मेरी मुहिम में सबका साथ और अनेकों मौकों पर सबका मेरे साथ खड़ा होना शायद हमेशा मेरे दिल में रहेगा. अनेकों बार मुझपे जानलेवा हमले हुए लेकिन फिर भी अगर मुझे बिहार की रक्षा में अपनी जान भी देनी होती तो शायद बहुत कम होता.

मेरी नियुक्ति जहां भी रहीं मुझे लोगों ने अपनाया है. अपने अभिवावक तुल्य मेरे सीनियर्स, मीडिया के भाई, मेरे साथ काम कर रहे मेरे मित्र और मेरे सम्पूर्ण परिवार बिहार की जनता का मैं पूरे दिल से धन्यवाद देता हूं. मीडिया के भाइयों ने कभी मुझे ‘दबंग’, ‘सिंघम’, ‘रॉबिन हुड’ और न जाने कितने उपनाम दिए पर मुझे ख़ुशी है कि मेरे मित्रों ने मुझे मेरे ‘शिवदीप’ नाम से बुलाना ज्यादा पसंद किया है. मैं हमेशा आपका अपना शिवदीप ही रहना चाहता हूं.

मेरा प्रतिनियुक्ति आज अगले तीन वर्षों के लिए महाराष्ट्र में हुई है. जब मैंने पुलिस सर्विस को अपनाया तो फिर केंद्र सरकार के बुलावे पे मुझे कहीं भी अपने फ़र्ज़ को निभाना होगा. मैं जन्म से शायद महाराष्ट्र का हूं पर अपने कर्म और मन से पूरा बिहारी हूं. बिहार की शान को बढ़ाना ही मेरा सौभाग्य होगा.

शिवदीप की कहानी सीधा बॉलीवुड की फिल्मों से आई है. ना जाने कितनी फिल्मों में ऐसे पात्र रचे गये हैं. जब शिवदीप पटना आए थे तब शहर गुंडों से त्रस्त था. तमंचे वाले तो थे ही. शरीफ गुंडे भी थे. दवाई वाले. जो बंदूक नहीं रखते थे. पर दवाईयों का अकाल पड़ा देते थे शहर में. ब्लैक मार्केटिंग कर के. दारु की दुकानें जरूरत से ज्यादा खुल गई थीं. बिना लाइसेंस के. दस महीनों में शिवदीप ने शहर को रास्ते पर ला दिया. और ये सब कुछ स्टाइल में होता था. ये नहीं कि पुलिस गई और गिरफ्तार कर के लाई. नये तरीके आजमाये जाते थे. कभी शिवदीप बहुरुपिया बन के जाते.

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कभी लुंगी-गमछा पहन के पहुंच जाते. कभी चलती मोटरसाइकिल से जंप मार देते. कभी चलती मोटरसाइकिल के सामने खड़े हो जाते.

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Quote 1महाराष्ट्र के अकोला के हैं शिवदीप. घर की हालत अच्छी नहीं थी. किसी तरह पढ़े. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की. लेक्चरार भी लगे. फिर IRS में हो गया. पर फिर परीक्षा दी और पुलिस में आ गये. बिहार कैडर मिला. 2006 में. काम बड़ा जबर्दस्त किया. पॉपुलर भी हैं. अभी फेसबुक पर इनके 60 हजार फॉलोवर हैं. कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि शिवदीप अपनी सैलरी का पचास प्रतिशत बच्चों की पढ़ाई में दे देते हैं.

पटना की लड़कियों में शिवदीप का क्रेज था. प्रेम था. शादी का ही मसला नहीं था. लड़कियां ऐसे भी प्रेम करती थीं. और जब लड़कियां ऐसे ही प्रेम करती हैं किसी से तो उस इंसान के बारे में आप अंदाजा लगा सकते हैं.

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पटना के मोबाइलों में शिवदीप का नंबर तैरता था. लड़कियों की एक कॉल पर शिवदीप अपनी बाइक से दनदनाते पहुंच जाते थे मजनुओं की धुनाई करने. पटना में लहरिया कट में बाइक चला लड़कियों को परेशान करने वाला गैंग बहुत सक्रिय था. इंजीनियरिंग, मेडिकल की तैयारी के नाम पर लड़के जमे रहते थे. और बाइक लेकर लड़कियों का पीछा करते रहते. वीमेन कॉलेजों के बाहर खड़े होकर फब्तियां कसते. सीने पर हाथ मार के भाग जाते. शिवदीप ने सबको रास्ते पर लाया. जब शिवदीप का पटना से ट्रांसफर हुआ तो लड़कियां रास्ता रोके खड़ी थीं. लोग जाने नहीं दे रहे थे.

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फिर जब शिवदीप रोहतास के एसपी थे तब एक बार इनकी जान जाने की भी नौबत आ गई थी. रविवार का दिन था. लोग घरों में थे. माइनिंग माफिया घात लगाये बैठा था. क्योंकि शिवदीप अवैध खनन की मशीनें जब्त करने निकले थे. सब कुछ पहले से तय था. पहले माफिया परिवारों के लोग शिवदीप के सामने आये. औरतें और बच्चे. और फिर शिवदीप पर फायरिंग होने लगी. 30 राउंड फायरिंग हुई. पर उनको अंदाजा नहीं था.

टेलीग्राफ से
टेलीग्राफ से

कुछ देर बाद शिवदीप खुद जेसीबी मशीन चलाकर अवैध खनन का सारा जुगाड़ तहस-नहस कर रहे थे. एक दिन में 100 स्टोन क्रशर जुगाड़ उखाड़ दिये गये. 500 लोग गिरफ्तार भी हुये थे.

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जब शिवदीप का ट्रांसफर अररिया हुआ तो लोगों ने कहा कि पॉलिटिकल वजहों से किया गया है. पनिशमेंट पोस्टिंग है. पर दिल में जब कीड़ा रहता है, तो इंसान भूत हो जाता है. शिवदीप ने अररिया में मनरेगा घोटाले की बखिया उधेड़ दी. बहुत लोग पकड़े गये.

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और अगर किसी को लगता है कि शिवदीप बस मार-कुटाई वाले इंसान हैं. खड़ूस टाइप के. तो ये वीडियो देख लें. डांस फ्लोर जल रहा है शिवदीप के डांस से.

शिवदीप की शादी भी हो चुकी है. बहुत सी लड़कियों का दिल टूटा था. बहुत सारे मैसेज आये थे शिवदीप को उस वक्त. अब एक लड़की भी है.

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फेसबुक से

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