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इस लड़की को जलाने के लिए राजेश खन्ना ने अपनी बारात का रूट बदला था

क्योंकि गर्लफ्रेंड ने उन्हें चिढ़ाने के लिए एक क्रिकेटर से कर लिया था अफेयर. जलन का धुआं उठा. इश्क का दम घुटने लगा.

एक आदमी जो होता है, वो कई औरतों का जोड़ होता है. उन तमाम का, जिन्हें उसने चाहा या चाहना चाहा. ज्यादातर मर्द जालिम जमाने के नाम पर आह भर इसे कुबूल नहीं कर पाते. वो कह नहीं पाते. ये जो खिलखिलाती सी नजर आ रही है. ये जो किसी की बीवी है, बहन है, माशूका है. इससे मैं भी इश्क करता हूं.

पर राजेश ऐसा नहीं था. फिल्मी सितारा बनने से पहले ही उसका एक रिश्ता था. एक लड़की से. जो मॉडल थी और हीरोइन बनना चाहती थी. उसका नाम अंजू महेंद्रू है. जो 11 जनवरी 1946 को पैदा हुई. राजेश उसे निकी बोलता था. और वो राजेश को जतिन या जस्टिन कहती थी. मेरे दौर के ज्यादातर लोगों ने अंजू को सीरियलों में देखा. या फिल्मों में साइड रोल करते हुए. मसलन, ‘द डर्टी पिक्चर’ में अंजू फिल्म पत्रकार बनी थीं. देखने वालों की समझ कहती है कि ये रोल सत्तर के दशक की मशहूर फिल्म रिपोर्टर देवयानी चौबल पर बेस्ड था. इसी देवयानी ने अंजू और जतिन (राजेश खन्ना का असल नाम) के इश्क पर मिट्टी पाने में खूब कसर लगाई थी.

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अंजू

ये सिलसिला निकी से शुरू हुआ. खूब आग पकड़ी. मगर बीच में ही सब बुझ गया. जतिन को लगता कि मेरी गर्लफ्रेंड मॉडलिंग और एक्टिंग के चक्कर में क्यों पड़ी है. मैं हूं ना पंजाबी मुंडा, जो घर का ख्याल रख रहा है. निकी तो बस मुझे संवारे. घर सजाए. निकी ऐसी नहीं थी. वो आजाद ख्याल थी. मगर इश्क में भी.

जतिन और निकी के प्यार के कई किस्से एबीपी न्यूज में एंटरटेनमेंट देखने वाले रिपोर्टर यासिर उस्मान ने सुनाए हैं. अपनी किताब कुछ तो लोग कहेंगे में. उन्हें पढ़कर, छांटकर लाया हूं आपके लिए ये वाकये:

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राजेश खन्ना स्टार बनने के बाद भी अकसर अंजू के घर ही पाए जाते. सुबह वहीं से अंडे का नाश्ता निपटा शूटिंग पर जाते. स्कूली लड़कियां बाहर खड़ी उनकी कार की चुम्मी लेतीं और धूल अपनी मांग में भर लेतीं. मीडिया का भी राजेश के साथ-साथ अंजू पर भरपूर फोकस रहता. क्या पहना, कहां गई. किससे बात की, किससे नहीं की.

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अंजू के लिए वो राजेश खन्ना नहीं था. जतिन था. जिसे वो कभी कभी प्यार से जस्टिन भी कहती थीं. जतिन टिपिकल इंडियन बॉयफ्रेंड था. वो चाहता था कि अंजू मॉडलिंग न करे. अंजू ने छोड़ दिया. बकौल महेंद्रू. वो चाहता था कि मैं हर वक्त उसके पैरों पर गिरी रहूं. जैसे उसके चमचे गिरे रहते थे. मैं उससे प्यार करती थी, मगर चापलूसी नहीं कर सकती थी.

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राजेश खन्ना की जिंदगी की दूसरी अहम औरत थीं देवयानी चौबल. सफेद साड़ी, जूड़े का खास स्टाइल और गॉसिप से भरा कॉलम- ‘फ्रैंकली स्पीकिंग’. ये नजर आता था ‘स्टार एंड स्टाइल’ मैगजीन में. देवयानी ने ही राजेश खन्ना के लिए बार बार लगातार सुपरस्टार वर्ड इस्तेमाल किया. दोनों की पहली मुलाकात फिल्म ‘आराधना’ की रिलीज के बाद हुई थी. उसके बाद लंबे लंबे सेशन होने लगे. राजेश उन्हें बताते, किसका किससे टांका है, कौन कहां क्या कर रहा है. देवयानी भी अपने हिस्से की खबरें सप्लाई करतीं. राजेश के लिए उन्होंने लिखा था- एक पिता, एक बच्चे या एक प्रेमी का रूप हो. राजेश खन्ना हर रूप में महिलाओं के लिए आनंद का प्रतीक हैं. खुद देवयानी के मुताबिक मैं राजेश के लिए माशूका से भी बढ़कर हूं. वो बच्चा है मेरा.

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राजेश खन्ना और अंजू महेंद्रू ने पहली बार नरिंदर बेदी की फिल्म बंधन में काम किया. मगर पब्लिक को काका और मुमताज की जोड़ी ज्यादा पसंद आई. अंजू को हमेशा लगा कि जतिन उसके करियर में अड़ंगा लगा रहा है.

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राजेश खन्ना को बेस्ट एक्टर का पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड सच्चा झूठा के लिए मिला. मनमोहन देसाई की इस फिल्म में राजेश का डबल रोल था. इसका गाना ‘मेरी प्यारी बहनिया’ आज भी विदाई के दौरान चेंप दिया जाता है.

प्रेम त्रिकोण था भी और नहीं भी.
प्रेम त्रिकोण था भी और नहीं भी.

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कार्टर रोड पर नौशाद के बंगले के पास एक बंगला था. दो मंजिल का. बुरी हालत में. उसे राजेंद्र कुमार ने खरीद लिया. इसके लिए जरूरी पइसा जुटाने को उन्होंने बीआर चोपड़ा की फिल्म ‘कानून’ कर ली. इसमें गाने नहीं थे. खैर, 60 हजार में बंगला खरीद लिया. दोस्त मनोज कुमार राजेंद्र से बोले. भूत वगैरह की सब बातें होती रहती हैं. आप हवन करवा लो. गृह प्रवेश से पहले. करवा लिया. और अपनी बेटी के नाम पर बंगले का नाम रखा डिंपल. ये उनके लिए महालकी साबित हुआ. उनकी हर फिल्म सिल्वर जुबिली मनाती. लोग उन्हें जुबिली कुमार कहते. पइसा और आया तो वे पाली हिल में एक नए बंगले में रहने चले गए.

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फिर इस बंगले पर पड़ी राजेश खन्ना की नजर. उन दिनों साउथ इंडिया का एक प्रोड्यूसर एमएम चिनप्पा देवर राजेश के पास आया. बोला, मेरी फिल्म तमिल में सुपरहिट है. हाथी और इंसान की कहानी है. आप कर लो. हिंदी में भी चलेगी. राजेश बोले, 9 लाख रुपये लूंगा. ये उस वक्त के हिसाब से आसमानी प्राइज था. मगर देवर ने 5 लाख एडवांस तुरंत दे दिया. राजेश उस पैसे को सूटकेस में भर दफ्तर आने वाले खासमखास लोगों को दिखाते. फिर इसी रकम से बंगला खरीद लिया. उनके पापा ने बंगले को नया नाम दिया. आशीर्वाद.

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हाथी की कहानी कंडम थी. मगर राजेश एडवांस ले चुके थे. फिर उन्होंने दो लड़कों को बुलाया. इनसे वह सिप्पी फिल्म्स के दफ्तर में मिले थे पहले. सलीम खान और जावेद अख्तर. राजेश बोले, इस फिल्म की कहानी को दुरुस्त करो. दोनों ने फ्री हैंड मांगा. मिला. चार हाथियों के अलावा सब बदल दिया. फिल्म बनी हाथी मेरे साथी. सुपरहिट रही.

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आशीर्वाद में राजेश रहते और रहतीं उनकी गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू. ये उस वक्त के लिहाज से बोल्ड स्टेप था. तब लिव इन कॉमन नहीं था. बंगले में सब अंजू मेमसाब की मर्जी से होता. हालांकि राजेश की मम्मी यानी चाईजी उन्हें पसंद नहीं करती थीं.

Source: Reuters
Source: Reuters

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एक बार फिर जतिन और निकी का झगड़ा हुआ. उसी दौरान अंजू वेस्टइंडीज के क्रिकेटर गैरी सोबर्स से मिलीं. इंडीज की टीम इंडिया दौरे पर थी. अंजू और गैरी की जम गई. तभी एक दिन गैरी ने अंजू को कोलकाता बुलाया. और एक पार्टी में डांस के दौरान प्रपोज कर अंगूठी पहना दी. अंजू और राजेश का तब ब्रेकअप नहीं हुआ था. वो वापस आईं तो काका उन पर खूब चीखे और फिर रोने लगे. बकौल अंजू मैंने तो काका को चिढ़ाने के लिए गैरी से अफेयर कर लिया था. ऐसा नहीं था कि मैं उसे पसंद नहीं करती थी. खैर, मैंने गैरी को फोन किया और सगाई तोड़ दी.

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गैरी कांड के बाद राजेश अंजू पर शक और पहरेदारी करने लगे. नतीजन, इश्क का धुंआ उठा, जिसमें दोनों घुटने लगे. और तब राजेश ने चिढ़ में आकर डिंपल कपाड़िया से शादी कर ली. शादी के दिन जब वो बारात लेकर निकले, तो रूट बदलवा दिया. जान बूझकर अंजू के घर के सामने से गुजरे.

ये बात और है कि जब राजेश का स्टारडम गुजरा. तो अंजू फिर उनकी दोस्त बन चुकी थीं. और जब काका आखिरकार जमाने से गुजरे, तब भी अंजू साथ थीं.


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