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आडवाणी और जोशी तो सिर्फ खड़े थे, ये आदमी कुदाल लेकर बाबरी तोड़ रहा था

अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के सीनियर लीडर्स लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती पर केस चलाने का आदेश दिया है. 1992 में इन नेताओं की गतिविधियों की वजह से बना माहौल बाबरी मस्जिद के लिए घातक साबित हुआ. SC के आदेश के बाद से बाबरी और राम मंदिर पर ज्ञान बांटने की प्रक्रिया फिर तेज हो गई है, लेकिन इस बहस के बीच उस इंसान से मिलना रोचक है, जो बाबरी मस्जिद गिराने का दावा कर रहा है.

बीजेपी के एक मंच पर लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी
बीजेपी के एक मंच पर लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी

अयोध्या में कवरेज के दौरान दी लल्लनटॉप की मुलाकात हजारी लाल नाम के एक शख्स से हुई. ये जनाब 1992 से अयोध्या में रह रहे हैं. इन्होंने बातचीत की शुरुआत में ही बता दिया कि कारसेवा करते हुए इन्होंने बाबरी मस्जिद गिराने में सहयोग दिया था. हजारी के मुताबिक उस दिन लाठी, डंडों, कुदालों और बेल्चों के अलावा भी ढेर सारे हथियार इस्तेमाल किए गए थे और बाबरी गिरा दी गई. हजारी लाल में राम मंदिर बनाए जाने का उत्साह अब भी है.

दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत के दौरान हजारी लाल
दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत के दौरान हजारी लाल

‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ के नारे लगाने वाले लोग एक और नारा भी लगाते हैं. वो नारा है, ‘अयोध्या तो बस झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है’. हजारी इस नारे से सहमत नजर आते हैं. वह कहते हैं कि राम के काम में वह एक बार योगदान दे चुके हैं और अगर जरूरत पड़ी, तो वह काशी और मथुरा में भी कृष्ण और शिव की सेवा करने जाएंगे. हजारी ये भी बताते हैं कि कैसे लोग इकट्ठे हुए थे और कैसे वो हथियार खुद साथ लाए थे.

सुप्रीम कोर्ट 6 दिसंबर, 1992 के जिस हादसे की वजह से आडवाणी, जोशी और उमा पर केस चलाना चाहती है, उस मामले में हजारी जैसे सैकड़ों लोग शामिल हैं. यकीनन आडवाणी और जोशी जैसे नेता तो बस दूर खड़े थे. असल काम हजारी लाल और उनके जैसे ढेर सारे लोगों ने किया.

सुनिए दी लल्लनटॉप के साथ हजारी लाल की बातचीत:


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